फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kushinagar News ›   demand money for making certificate

Kushinagar News: जाति हो या आय-निवास, पैसे देंगे तो जल्दी पूरी होगी आस

Mon, 01 May 2023 12:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Mon, 01 May 2023 12:38 AM IST
विज्ञापन
demand money for making certificate
डुमरियागंज तहसील।
सिद्धार्थनगर। जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र (अधिवास) की जरूरत सभी को पड़ती है। वर्तमान व्यवस्था में प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन के बाद राजस्वकर्मियों की रिपोर्ट लगती है, लेकिन यह रिपोर्ट लगवाने में लोगों को पसीने छूट जाते हैं। चढ़ावा नहीं दिया तो सात दिन के भीतर बनने वाले कागज के लिए कई दिनों तक चक्कर लगाते रहिए।
विज्ञापन

तहसील से जुड़े लोगों का कहना है कि लेखपालों की ढिलाई से प्रमाणपत्र बनने में विलंब होता है। कई बार कोई न कोई कमी दिखाकर आवेदन लौटा दिया जाता है। जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र के जिले में 11 हजार से अधिक मामले लंबित हैं।
विज्ञापन


मांग पूरी नहीं होने पर रिपोर्ट लगाने में करते हैं हीलाहवाली
ऐसे तमाम लोग हैं, जिनको जाति, निवास और आय प्रमाणपत्र के लिए परेशान होना पड़ रहा है। कई लोगों का आवेदन बिना किसी सूचना या कारण बताए निरस्त कर दिया जाता है। वे समझ ही नहीं पाते हैं कि कौन सा प्रपत्र कम था जिसकी वजह से ऐसा हुआ। असल में यहां खेल दूसरा चलता है। मांग पूरी नहीं होने पर राजस्व कर्मी रिपोर्ट लगाने में हीलाहवाली करते हैं। प्रमाणपत्र जारी करने की समयसीमा खत्म होने वाली होती है तो आवेदन को निरस्त करके खुद का बचाव कर लेते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन



प्रमाणपत्र न बनने के हैं कई बहाने
जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने के बाद आवेदक के प्रमाणपत्रों की जांच की जाती है। राजस्वकर्मी संबंधित आवेदक के पास पहुंचकर रिपोर्ट तैयार करते हैं। इसमें राज्य, जिला, किराएदारी सहित अन्य कारणों का हवाला देकर लेखपाल की रिपोर्ट नहीं लगाई जाती। फिर वसूली के बाद ही काम किया जाता है। आवेदक ने पैसे नहीं खर्च किए, तो उसे तहसील का चक्कर काटना पड़ेगा। किसी अधिकारी से शिकायत के बाद भी मामला जांच में अटका रह जाएगा। तहसील अधिवक्ताओं के मुताबिक जिनका जुगाड़ नहीं होता है, उनके आवेदन निरस्त हो जाते हैं। सदर तहसील में हर माह करीब 10 से 15 फीसदी जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र अस्वीकृत हो जाते हैं।


तय नहीं कोई कीमत, रकम आवेदक की जरूरत पर निर्भर
प्रमाणपत्र के लिए कितनी कीमत चुकानी होगी, यह आपकी जरूरत पर निर्भर है। आवेदन के समय एक प्रमाणपत्र के लिए 30 रुपये फीस ली जाती है। असली खेल आवेदन की प्रक्रिया के बाद शुरू होता है। पांच सौ रुपये से जांच की शुरुआत होती है। बाद में आवेदक की आवश्यकता और उसकी परिस्थिति के मुताबिक रकम ली जाती है।


यह फंसाते है पेंच
- किराए के कमरे में रहने वाले लोगों के प्रमाणपत्र जैसे आधार इत्यादि को संशोधन के लिए कहते हैं।
- नाम और पते में आंशिक बदलाव या गड़बड़ी को आधार बनाकर आवेदन को निरस्त कर देते हैं।
- आवेदन के लिए प्रधान और सभासद के प्रमाणपत्र में कोई न कोई कमी बताई जाती है।
- लेखपाल की जगह उनके मुंशी आवेदकों से बात करके मामला तय करते हैं। आसपास के लोगों से बात करके रिपोर्ट लगा देते हैं।
- प्रधान, सभासद और अन्य किसी से बात करके रिपोर्ट लगाने के दौरान गड़बड़ी आती है।
- अनुचित मांग न पूरी होने पर आवेदन को निरस्त कर दिया जाता है। लोगों को दोबारा आवेदन करना पड़ता है।
- कई बार लेखपाल अपने आप के बाहर होने या अन्य किसी काम में व्यस्त होने हवाला देकर भी मामला टाल देते हैं।



फीस के अलावा पांच सौ रुपये खर्च हुए
डुमरियागंज क्षेत्र के निवासी सफाकत अली को आय प्रमाणपत्र हासिल करने में करीब एक माह का समय लग गया। ऐसा आवेदन के बाद लेखपाल के रिपोर्ट लगाने में विलंब के चलते हुआ। उनके मुताबिक, उन्होंने जब आवेदन किया तो उनके मोबाइल नंबर पर किसी का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को मुंशी बताया। कहा कि फीस के अलावा उनके पांच सौ रुपये खर्च हो गए।



निरस्त हो जा रहा आवेदन, परेशान हैं रामसेवर
बांसी क्षेत्र की रहने वाले रामसेवक ने आय प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। उनका आवेदन दो बार निरस्त हो चुका है। उनका कहना है कि रिपोर्ट लगाने के बदले में वह किसी को पैसे नहीं दे रहे हैं। इसलिए उनके साथ ऐसा हो रहा है। इस तरह की मनमानी पर अंकुश लगाने की जरूरत है। शासन की ओर से गलत काम करने वालों को चिह्नित करना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed