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Kushinagar News: दीपोत्सव को लेकर मिट्टी के दीयों की बढ़ी मांग, बनाने में जुटे कुम्हार

Tue, 31 Oct 2023 12:39 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Tue, 31 Oct 2023 12:39 AM IST
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Demand for earthen lamps increased due to Deepotsav, potters are busy in making them.
कसया। दीपावली पर्व को देखते हुए मिट्टी के दीये और मिट्टी से बनने वाले खिलौने समेत अन्य सामानों की मांग बढ़ गई है। बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए क्षेत्र के कुम्हार उसे बनाने में जुट गए हैं।
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दीपावली व छठ पर्व पर बाजार में मिट्टी के दीये, कोषा, घंटी, जांता, कलशा, टेनी सहित अन्य सामानों की मांग बढ़ जाती है। लोग इलेक्ट्राॅनिक्स सामानों की अपेक्षा मिट्टी से बने सामानों की मांग कर रहे हैं। इसको देखते हुए क्षेत्र के कुम्हारों ने मिट्टी का सामान बनाना शुरु कर दिया है।
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क्षेत्र के गांव सेमरी निवासी हीरा प्रजापति के बताया कि हमारे यहां मिट्टी बनाने का व्यवसाय कई पुश्तों से चला आ रहा है। बचपन से ही मिट्टी के बर्तन बनाने का कार्य किया जा रहा है। इससे ही परिवार का भरण पोषण होता है। बीच में आर्थिक स्थिति काफी खराब थी, लेकिन अब मिट्टी के बर्तनों की मांग बढ़ रही है।
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दीपावली पर काफी लोग मिट्टी के सामानों की मांग किए हैं। करीब बीस हजार दीया बनाने हैं। इसलिए दिन रात काम करना पड़ रहा है। इसके अलावा भी छठ पर्व पर इस्तेमाल होने वाले मिट्टी के बर्तनों का ऑर्डर लिया गया है।
कसया क्षेत्र के मथौली, रामनगर, बेलवा पलकधारी सिंह, धुरिया नौका टोला, खेहिया नौका टेला, कुडवा, सेमरी, रामबर, विशुनपुरा आदि गांवों मे कुम्हारों द्वारा मिट्टी के बर्तन बनाए जाते हैं। दीपावली को देखते हुए इन लोगों के कामों में काफी तेजी आ गई है।

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इलेक्ट्रिक चाक ने बढ़ाई रफ्तार


मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हार शेषनाथ बताते हैं कि बदलते वक्त के साथ तकनीक बदली तो हम लोगों का काम भी थोड़ा आसान हुआ है। सरकार की ओर से मिले इलेक्ट्रिक चाक की मदद से अब एक दिन में चार से पांच गुना ज्यादा दीये तैयार हो जाते हैं। पहले दीपावली के लिए हाथों से दीपक तैयार करने के लिए छह महीने पहले से जुट जाते थे। इलेक्ट्रिक चाक आने के बाद अब दो से ढाई महीने में अच्छी मात्रा में दीये तैयार हो जाते हैं।
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