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स्वर्णकार का शव लाया गया
कुशीनगर
Updated Sat, 23 Apr 2016 11:32 PM IST
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शव पहुुंचते ही उनके घर पर कोहराम मच गया।
- फोटो : अमर उजाला
तुर्कपट्टी। शुक्रवार को दिन में 11 बजे आजमगढ़ में सराफ ा व्यवसायी जितेंद्र के आभूषणों की लूट और हत्या के बाद देर रात उनका शव पैतृक गांव तुर्कपट्टी लाया गया। शव पहुुंचते ही उनके घर पर कोहराम मच गया।
कमाऊ पूत का शव देख गांववालों की भी आंखें नम हो गईं। शनिवार को गांव की श्मशान में अंतिम संस्कार कर दिया गया। 30 वर्षीय जितेंद्र के पिता करीब बीस वर्ष पूर्व व्यवसाय के सिलसिले में आजमगढ़ जनपद के तरांव गए थे।
वह वहां फेरी लगाकर कपड़े बेचते थे, जबकि बेटा जितेंद्र तरांव में ही सोने चांदी की दुकान कर रखा था। शुक्रवार को 11 बजे दिन में एक बाइक पर सवार तीन बदमाश आए और गहने देखने लगे। गहने जब ज्यादा एकत्र हो गए तो दो बदमाश लेकर भागने लगे। जितेंद्र ने दोनों बदमाशों का प्रतिरोध भी किया, लेकिन बाइक पर सवार तीसरे बदमाश ने उनके सिर में गोली मार दी।
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जितेंद्र की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। बदमाश करीब तीन लाख रुपये के जेवर लेकर भागने में सफल रहे।। शुक्रवार की देर रात उनका शव जैसे ही उनके गांव तुर्कपट्टी लाया गया, घरवालों का रो रोकर बुरा हाल हो गया।
उनकी पत्नी गुड़िया की हालत सबसे खराब थी। वह तीन बच्चों पायल छह वर्ष, ख़ुशी चार वर्ष और बेटा आयुष को गोद में चिपकाए बेहोश हो जा रही थीं। पूरे गांव के लोगों की आंखों में आंसू थे। शनिवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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कमाऊ पूत का शव देख गांववालों की भी आंखें नम हो गईं। शनिवार को गांव की श्मशान में अंतिम संस्कार कर दिया गया। 30 वर्षीय जितेंद्र के पिता करीब बीस वर्ष पूर्व व्यवसाय के सिलसिले में आजमगढ़ जनपद के तरांव गए थे।
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वह वहां फेरी लगाकर कपड़े बेचते थे, जबकि बेटा जितेंद्र तरांव में ही सोने चांदी की दुकान कर रखा था। शुक्रवार को 11 बजे दिन में एक बाइक पर सवार तीन बदमाश आए और गहने देखने लगे। गहने जब ज्यादा एकत्र हो गए तो दो बदमाश लेकर भागने लगे। जितेंद्र ने दोनों बदमाशों का प्रतिरोध भी किया, लेकिन बाइक पर सवार तीसरे बदमाश ने उनके सिर में गोली मार दी।
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जितेंद्र की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। बदमाश करीब तीन लाख रुपये के जेवर लेकर भागने में सफल रहे।। शुक्रवार की देर रात उनका शव जैसे ही उनके गांव तुर्कपट्टी लाया गया, घरवालों का रो रोकर बुरा हाल हो गया।
उनकी पत्नी गुड़िया की हालत सबसे खराब थी। वह तीन बच्चों पायल छह वर्ष, ख़ुशी चार वर्ष और बेटा आयुष को गोद में चिपकाए बेहोश हो जा रही थीं। पूरे गांव के लोगों की आंखों में आंसू थे। शनिवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया।