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पति के कृत्यों से आहत, नहीं जाएगी ससुराल
Tue, 28 May 2019 11:35 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 28 May 2019 11:35 PM IST
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रामपुर बरहन गांव के टोला खानगी में शान्ति और उसका भाई सुरेंद्र।
- फोटो : अमर उजाला
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बरवापट्टी/दुदही। माता-पिता की नृशंस हत्या और 14 वर्षीय भतीजे काे गंभीर रूप से घायल कर देने के आरोपी पति के कृत्यों से आहत शांति ने अब ससुराल नहीं जाने का नहीं निर्णय लिया है। मेडिकल कॉलेज में भर्ती भतीजा आदित्य जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
रोते हुए शांति ने बताया कि जिस घर में कभी पत्नी को दर्जा नहीं मिला और उल्टे चारित्रिक लांछन लगा दिया गया। उस घर में जाने का अब क्या मतलब? भाइयों ने भी शांति को उस घर में नहीं भेजने का निर्णय लिया है।
शांति का कहना है कि माता-पिता के हत्यारे के घर रहने से भीख मांग कर गुजारा अच्छा है। दो वर्ष में कभी उसने पत्नी का दर्जा नहीं दिया। हमेशा प्रताड़ित ही किया है। घर में दो देवर, तीन ननदें और सास-ससुर हैं। जब मंटू मद्देेशिया (पति) मारता-पीटता था तो घर का कोई व्यक्ति छुड़ाने तक नहीं आता था।
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ससुर कभी आ भी जाते, तो मंटू उनको भी मारता पीटता था। उसे हमेशा शंका की नजर से देखता था। हत्यारे की पत्नी बन कर रहना उसं गवारा नहीं है। मायके में ही भीख मांगकर एक वर्षीय बेटे अभिनंदन का पालन-पोषण कर लूंगी। शांति के भाई रघुपत, सुरेंद्र एवं माधो ने बताया कि अब बहन को उस घर में नहीं भेजेंगे। बहनोई मंटू को फांसी की सजा दिलाने की लड़ाई लड़ते रहेंगे।
साढ़ू मंटू की हरकतों से वाकिफ थे दीपू
दुदही/बरवापट्टी। हत्यारोपी मंटू घटना के दिन ससुराल में ही था। बार-बार फोनकर वह अपने साढू़ और साली को बुला रहा था। पूर्व में उसकी हरकतें देख चुके साढू़ और साली नहीं आए। गोपालगंज के बनकटा निवासी दीपू और उनकी पत्नी अनीता बताती हैं कि मंटू पहले से ही उल्टी-सीधी बातें करता था। उसकी हरकत से आभास हो रहा था कि कुछ गड़बड़ कर सकता है। घायल आदित्य बार-बार अपने दादा-दादी के बारे में पूछ रहा है।
माता-पिता का शव देख फफक पड़े तीनों बेटे
दुदही/बरवापट्टी। रामपुर बरहन के टोला खानगी में रविवार की रात सोते समय बांगुर गुप्ता और उनकी पत्नी किसमती की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गई थी। उनके 14 वर्षीय पोते आदित्य को जख्मी कर दिया गया था। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार शाम को दंपती का शव गांव लाया गया तो कोहराम मच गया।
पूना कमाने गए तीनों बेटे रघुपत, सुरेंद्र और माधो मंगलवार को घर पहुंचे। माता-पिता का शव देख तीनों दहाड़े मारकर रोने लगे। बहनोई मंटू के कृत्यों की निंदा की। रोते हुए बताया कि मंटू ने हंसते-खेलते दो परिवारों को उजाड़ दिया। मां-बाप को मौत के घाट उतारकर हमें अनाथ कर दिया। गांव के अधिकतर घरों में चूल्हे नहीं जले। मंगलवार को एक साथ दंपती की अर्थी उठी तो पूरा गांव दहल उठा। लक्ष्मीपुर गांव के सामने नारायणी नदी के घाट पर दंपती का अंतिम संस्कार हुआ। बड़े बेटे रघुपत ने पिता को और छोटे बेटे माधो ने मां की चिता को मुखाग्नि दी। एसओ श्रीप्रकाश ने बताया कि आरोपी मंटू को जेल भेज दिया गया है।
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रोते हुए शांति ने बताया कि जिस घर में कभी पत्नी को दर्जा नहीं मिला और उल्टे चारित्रिक लांछन लगा दिया गया। उस घर में जाने का अब क्या मतलब? भाइयों ने भी शांति को उस घर में नहीं भेजने का निर्णय लिया है।
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शांति का कहना है कि माता-पिता के हत्यारे के घर रहने से भीख मांग कर गुजारा अच्छा है। दो वर्ष में कभी उसने पत्नी का दर्जा नहीं दिया। हमेशा प्रताड़ित ही किया है। घर में दो देवर, तीन ननदें और सास-ससुर हैं। जब मंटू मद्देेशिया (पति) मारता-पीटता था तो घर का कोई व्यक्ति छुड़ाने तक नहीं आता था।
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ससुर कभी आ भी जाते, तो मंटू उनको भी मारता पीटता था। उसे हमेशा शंका की नजर से देखता था। हत्यारे की पत्नी बन कर रहना उसं गवारा नहीं है। मायके में ही भीख मांगकर एक वर्षीय बेटे अभिनंदन का पालन-पोषण कर लूंगी। शांति के भाई रघुपत, सुरेंद्र एवं माधो ने बताया कि अब बहन को उस घर में नहीं भेजेंगे। बहनोई मंटू को फांसी की सजा दिलाने की लड़ाई लड़ते रहेंगे।
साढ़ू मंटू की हरकतों से वाकिफ थे दीपू
दुदही/बरवापट्टी। हत्यारोपी मंटू घटना के दिन ससुराल में ही था। बार-बार फोनकर वह अपने साढू़ और साली को बुला रहा था। पूर्व में उसकी हरकतें देख चुके साढू़ और साली नहीं आए। गोपालगंज के बनकटा निवासी दीपू और उनकी पत्नी अनीता बताती हैं कि मंटू पहले से ही उल्टी-सीधी बातें करता था। उसकी हरकत से आभास हो रहा था कि कुछ गड़बड़ कर सकता है। घायल आदित्य बार-बार अपने दादा-दादी के बारे में पूछ रहा है।
माता-पिता का शव देख फफक पड़े तीनों बेटे
दुदही/बरवापट्टी। रामपुर बरहन के टोला खानगी में रविवार की रात सोते समय बांगुर गुप्ता और उनकी पत्नी किसमती की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गई थी। उनके 14 वर्षीय पोते आदित्य को जख्मी कर दिया गया था। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार शाम को दंपती का शव गांव लाया गया तो कोहराम मच गया।
पूना कमाने गए तीनों बेटे रघुपत, सुरेंद्र और माधो मंगलवार को घर पहुंचे। माता-पिता का शव देख तीनों दहाड़े मारकर रोने लगे। बहनोई मंटू के कृत्यों की निंदा की। रोते हुए बताया कि मंटू ने हंसते-खेलते दो परिवारों को उजाड़ दिया। मां-बाप को मौत के घाट उतारकर हमें अनाथ कर दिया। गांव के अधिकतर घरों में चूल्हे नहीं जले। मंगलवार को एक साथ दंपती की अर्थी उठी तो पूरा गांव दहल उठा। लक्ष्मीपुर गांव के सामने नारायणी नदी के घाट पर दंपती का अंतिम संस्कार हुआ। बड़े बेटे रघुपत ने पिता को और छोटे बेटे माधो ने मां की चिता को मुखाग्नि दी। एसओ श्रीप्रकाश ने बताया कि आरोपी मंटू को जेल भेज दिया गया है।