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खतरे में है देश का संविधान व लोकतंत्र : मेधा पाटकर
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कुशीनगर में सद्भावना यात्रा को संबोधित करतीं सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर। संवाद
- फोटो : KUSHINAGAR
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खतरे में है देश का संविधान व लोकतंत्र : मेधा पाटकर
कसया। समाजवादी समागम और फैक्टर की तरफ से नफरत छोड़ो संविधान बचाओ सद्भावना यात्रा बुधवार को कुशीनगर से शुरू हुई। तिरंगा दिखाकर सद्भावना यात्रा की शुरुआत करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा कि देश का लोकतंत्र और संविधान संकट में है। देश को ऐसे हालात से बचाने के लिए अहिंसा रूपी अस्त्र को अपनाना होगा।
उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को जाति और धर्म के नाम पर उकसाया जा रहा है। इसके दुखद परिणाम दिखाई पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले गोरे अंग्रेजों का शासन था अब काले अंग्रेज सत्ता में बैठे हैं। धर्म और जाति के साथ लिंगभेद की बात चल रही है, दुष्कर्मियों का सम्मान जाति के नाम पर किया जा रहा है। लोगों को समाज में भेदभाव तोड़ने की हिम्मत करनी होगी। बुद्ध से कबीर तक जाने के लिए अहिंसा के अतिरिक्त दूसरा कोई मार्ग नहीं है। नफरत की दीवार तोड़ने के अलावा देश को बचाने का दूसरा कोई रास्ता नहीं है।
जल, जंगल, जमीन को बचाना होगा, नहीं तो कोरोना नहीं कई अन्य वायरस सक्रिय हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि शोषण को हिंसा से नहीं बल्कि सहिष्णुता से मिटाया जा सकता है। जन शक्ति से ही मानव धर्म बच सकता है। इस यात्रा के दौरान महात्मा गांधी समेत अन्य महापुरुषों की प्रतिमा पर लोगों ने माल्यार्पण किया।
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इसके पूर्व भगवान बुद्ध की लेटी प्रतिमा पर चीवर दान किया गया। सद्भावना यात्रा को इसके संयोजक प्रो. चितरंजन मिश्र, पूर्व मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी, पूर्व मंत्री श्याम रजक, पूर्व मंत्री राधेश्याम सिंह, अरुण श्रीवास्तव आदि ने संबोधित किया। यात्रा की अध्यक्षता पूर्व मंत्री रामगोविंद चौधरी और संचालन प्रदीप राव ने किया। इस यात्रा का समापन कबीर की धरती मगहर में होगा। कार्यक्रम में पूर्व एमएलसी रामअवध यादव, पूर्व विधायक पूर्णवासी देहाती, उमेश शाही, मधुर श्याम राय, राजन त्रिपाठी, मनीष त्रिपाठी, राजेश पांडेय, प्रियेश त्रिपाठी, पुरेंद्र प्रताप यादव, कृष्ण लाल, विजय आदि मौजूद रहे।
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कसया। समाजवादी समागम और फैक्टर की तरफ से नफरत छोड़ो संविधान बचाओ सद्भावना यात्रा बुधवार को कुशीनगर से शुरू हुई। तिरंगा दिखाकर सद्भावना यात्रा की शुरुआत करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा कि देश का लोकतंत्र और संविधान संकट में है। देश को ऐसे हालात से बचाने के लिए अहिंसा रूपी अस्त्र को अपनाना होगा।
उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को जाति और धर्म के नाम पर उकसाया जा रहा है। इसके दुखद परिणाम दिखाई पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले गोरे अंग्रेजों का शासन था अब काले अंग्रेज सत्ता में बैठे हैं। धर्म और जाति के साथ लिंगभेद की बात चल रही है, दुष्कर्मियों का सम्मान जाति के नाम पर किया जा रहा है। लोगों को समाज में भेदभाव तोड़ने की हिम्मत करनी होगी। बुद्ध से कबीर तक जाने के लिए अहिंसा के अतिरिक्त दूसरा कोई मार्ग नहीं है। नफरत की दीवार तोड़ने के अलावा देश को बचाने का दूसरा कोई रास्ता नहीं है।
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जल, जंगल, जमीन को बचाना होगा, नहीं तो कोरोना नहीं कई अन्य वायरस सक्रिय हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि शोषण को हिंसा से नहीं बल्कि सहिष्णुता से मिटाया जा सकता है। जन शक्ति से ही मानव धर्म बच सकता है। इस यात्रा के दौरान महात्मा गांधी समेत अन्य महापुरुषों की प्रतिमा पर लोगों ने माल्यार्पण किया।
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इसके पूर्व भगवान बुद्ध की लेटी प्रतिमा पर चीवर दान किया गया। सद्भावना यात्रा को इसके संयोजक प्रो. चितरंजन मिश्र, पूर्व मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी, पूर्व मंत्री श्याम रजक, पूर्व मंत्री राधेश्याम सिंह, अरुण श्रीवास्तव आदि ने संबोधित किया। यात्रा की अध्यक्षता पूर्व मंत्री रामगोविंद चौधरी और संचालन प्रदीप राव ने किया। इस यात्रा का समापन कबीर की धरती मगहर में होगा। कार्यक्रम में पूर्व एमएलसी रामअवध यादव, पूर्व विधायक पूर्णवासी देहाती, उमेश शाही, मधुर श्याम राय, राजन त्रिपाठी, मनीष त्रिपाठी, राजेश पांडेय, प्रियेश त्रिपाठी, पुरेंद्र प्रताप यादव, कृष्ण लाल, विजय आदि मौजूद रहे।