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Kushinagar News: लगातार आ रहे मामले, अवैध अस्पतालों पर लगाम नहीं
Sun, 15 Jun 2025 12:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 15 Jun 2025 12:04 AM IST
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पकड़ियार बाजार। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र में बगैर रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे निजी अस्पताल, अल्ट्रासाउंड व पैथालॉजी सेंटर ग्रामीणों के आर्थिक शोषण का कलेक्शन सेंटर बन गए हैं। इन अस्पतालों में इलाज के नाम पर मरीजों के जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। इलाज में लापरवाही से आए दिन मौत होने और शिकायत के बाद भी अस्पतालों पर कार्रवाई न होने से धड़ल्ले से अवैध अस्पताल संचालित हो रहे हैं।
क्षेत्र के पकड़ियार बाजार, कोटवा, नौरंगिया, नेबुआ, ढोलहा, बिहारी छपरा, क्रांति चौराहा, सिंगहा, सिरसा, खजुरी, सेखुई, कलवारी पट्टी में मिलाकर लगभग 20 निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इसमें 10 तो सिर्फ कोटवा बाजार में ही चल रहे हैं। प्राइवेट अस्पताल लोगों की जान के दुश्मन बने हैं।
ऐसे अस्पतालों में डाक्टरों की लापरवाही से कई बार मरीजों की मौत तक हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अस्पताल संचालक बेखौफ नियमों को ताक पर रख संचालन कर रहे हैं। लोगों की माने तो ऐसे अस्पताल संचालकों ने अल्ट्रासाउंड से लेकर ईसीजी व्यवस्था उपलब्ध होने का जगह-जगह बड़े-बड़े पोस्टर, होर्डिंग व बैनर लगा रखे हैं, जबकि इन पर ऐसी सुविधाओं के लिए विभाग से कोई अनुमति व लाइसेंस ही नहीं है। वहीं बगैर किसी प्रशिक्षित लैब टेक्निशियन के ही अप्रशिक्षित व्यक्ति की ओर से ही सभी तरह की जांच कराई जा रही है। वहीं संचालित हो रहे अस्पतालों में सिर्फ नाम मात्र के लिए एमबीबीएस व एमडी डाक्टरों का नाम दर्शाया जाता है, जबकि ऑपरेशन कंपाउंडर व अप्रशिक्षित डाक्टर करते हैं। संवाद
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क्षेत्र के पकड़ियार बाजार, कोटवा, नौरंगिया, नेबुआ, ढोलहा, बिहारी छपरा, क्रांति चौराहा, सिंगहा, सिरसा, खजुरी, सेखुई, कलवारी पट्टी में मिलाकर लगभग 20 निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इसमें 10 तो सिर्फ कोटवा बाजार में ही चल रहे हैं। प्राइवेट अस्पताल लोगों की जान के दुश्मन बने हैं।
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ऐसे अस्पतालों में डाक्टरों की लापरवाही से कई बार मरीजों की मौत तक हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अस्पताल संचालक बेखौफ नियमों को ताक पर रख संचालन कर रहे हैं। लोगों की माने तो ऐसे अस्पताल संचालकों ने अल्ट्रासाउंड से लेकर ईसीजी व्यवस्था उपलब्ध होने का जगह-जगह बड़े-बड़े पोस्टर, होर्डिंग व बैनर लगा रखे हैं, जबकि इन पर ऐसी सुविधाओं के लिए विभाग से कोई अनुमति व लाइसेंस ही नहीं है। वहीं बगैर किसी प्रशिक्षित लैब टेक्निशियन के ही अप्रशिक्षित व्यक्ति की ओर से ही सभी तरह की जांच कराई जा रही है। वहीं संचालित हो रहे अस्पतालों में सिर्फ नाम मात्र के लिए एमबीबीएस व एमडी डाक्टरों का नाम दर्शाया जाता है, जबकि ऑपरेशन कंपाउंडर व अप्रशिक्षित डाक्टर करते हैं। संवाद
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