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कैंसर से पीड़ित मुसहर समुदाय के युवक की मौत
Sat, 29 Dec 2018 11:29 PM IST
राकेश पांडेय
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: राकेश पांडेय
Updated Sat, 29 Dec 2018 11:29 PM IST
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चिरईहवा गांव में मुसहर समुदाय के युवक की मौत के बाद रोते परिजन और जुटी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
जटहां बाजार। चिरईहवा में कैंसर पीड़ित मुसहर समुदाय के युवक की मौत के चार दिन बाद शनिवार सुबह इसी गांव के अजय की भी मृत्यु जिला अस्पताल में हो गई। वह छह माह से लीवर कैंसर से पीड़ित था। सीएमओ ने दो दिन पूर्व एंबुलेंस से अस्पताल भेजवाया था।
विकास खंड विशुनपुरा के ग्राम चिरईहवा में चार दिन पहले पूर्णवासी की मौत हो गई थी। कैंसर से पीड़ित गांव के अजय को डीएम के साथ पहुंचे सीएमओ ने एंबुलेंस से जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। दो दिन उपचार के बाद बाद शनिवार सुबह उसकी भी मौत हो गई। पीड़ित पिता बाहर मजदूरी करते हैं। परिवार में जॉबकार्ड, अंत्योदय कार्ड बने हैं।
वर्ष 1998 में इंदिरा आवास मिला था, लेकिन बाढ़ आ जाने से आवास बन नहीं पाया था। अजय का बड़ा भाई सुरेंद्र दिव्यांग है। अजय की मौत के बाद गांव में पूर्ति निरीक्षक रत्नेश मिश्र, ग्राम पंचायत सचिव मिथिलेश कुमार मल्ल ने आर्थिक मदद कर अंतिम संस्कार कराया। गांव में चार दिन के अंदर दो युवकों की मौत के बाद लोग सहम गए।
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लोगों का कहना है कि सही समय पर अजय का इलाज हुआ होता तो शायद उसकी जान बच गई होती। परिवार के लोग आज भी झोपड़ी में रहने को विवश हैं। घर में बूढ़े पिता और उसकी मां के अलावा कोई कमाने वाला नहीं हैं। दोनों पैरों से दिव्यांग उसके बड़े भाई को पेंशन तक स्वीकृत नहीं हुई है। बीडीओ आनंद प्रकाश ने बताया कि उच्चाधिकारियों को संज्ञान में लाकर पीड़ित परिवार को आवास दिलाया जाएगा। उसके भाई को दिव्यांग पेंशन दिलाई जाएगी।
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विकास खंड विशुनपुरा के ग्राम चिरईहवा में चार दिन पहले पूर्णवासी की मौत हो गई थी। कैंसर से पीड़ित गांव के अजय को डीएम के साथ पहुंचे सीएमओ ने एंबुलेंस से जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। दो दिन उपचार के बाद बाद शनिवार सुबह उसकी भी मौत हो गई। पीड़ित पिता बाहर मजदूरी करते हैं। परिवार में जॉबकार्ड, अंत्योदय कार्ड बने हैं।
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वर्ष 1998 में इंदिरा आवास मिला था, लेकिन बाढ़ आ जाने से आवास बन नहीं पाया था। अजय का बड़ा भाई सुरेंद्र दिव्यांग है। अजय की मौत के बाद गांव में पूर्ति निरीक्षक रत्नेश मिश्र, ग्राम पंचायत सचिव मिथिलेश कुमार मल्ल ने आर्थिक मदद कर अंतिम संस्कार कराया। गांव में चार दिन के अंदर दो युवकों की मौत के बाद लोग सहम गए।
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लोगों का कहना है कि सही समय पर अजय का इलाज हुआ होता तो शायद उसकी जान बच गई होती। परिवार के लोग आज भी झोपड़ी में रहने को विवश हैं। घर में बूढ़े पिता और उसकी मां के अलावा कोई कमाने वाला नहीं हैं। दोनों पैरों से दिव्यांग उसके बड़े भाई को पेंशन तक स्वीकृत नहीं हुई है। बीडीओ आनंद प्रकाश ने बताया कि उच्चाधिकारियों को संज्ञान में लाकर पीड़ित परिवार को आवास दिलाया जाएगा। उसके भाई को दिव्यांग पेंशन दिलाई जाएगी।