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कटान से प्रभावित चार लोग तोड़वाने लगे मकान
kushinagar
Updated Fri, 06 Jul 2018 11:09 PM IST
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अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
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तमकुहीरोड। अहिरौलीदान के कचहरी टोला में गंडक नदी के कटान की जद में आए चार लोगों ने अपने पक्के मकानों को तोड़वाना शुरू कर दिया है। इन लोगों को आशंका है कि अब उनका घर नदी की कटान से नहीं बच पाएगा। पानी कम होने के बाद भी नदी कटान करती हुई उनके घर तक पहुंचकर तबाही मचा सकती है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन उनकी कोई सुधि नहीं ले रहा है और न ही गांवों को कटान से बचाने का प्रयास ही किया जा रहा है।
गंडक नदी में वाल्मिकीनगर बैराज से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में कमी आने के बाद भी अहिरौलीदान के कचहरी टोला पर नदी की भृकुटि टेढ़ी हो गई है। बचाव कार्य न होता देख लोगों में दहशत का माहौल है। यही कारण है कि इस टोले के निवासी पूर्व प्रधान हरिकृष्ण सिंह, श्रीकिशुन सिंह, गया सिंह, और रामाज्ञा सिंह समेत चार लोगों ने पक्के मकानों को तोड़वाने का कार्य शुरू करा दिया है। नदी में पानी कम है, फिर भी कटान तेज है और शीघ्र बचाव कार्य शुरू नहीं हुआ, तो नदी कई और घरों को निशाना बना सकती है। इस साल नदी की जद में कचहरी टोला के साथ नोनिया पट्टी, खैरखुटा, मदुरही, डीह टोला भी है। इस गांव के जिला पंचायत सदस्य अरविंद सिंह पटेल का कहना है कि विभागीय लापरवाही के चलते ही पिछले साल कंचन टोला और चित्तू टोला कटान की भेंट चढ़ गया था। इस साल भी वही स्थिति बनती नजर आ रही है, जो गांवों की सुरक्षा के लिए खतरनाक है।
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गंडक नदी में वाल्मिकीनगर बैराज से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में कमी आने के बाद भी अहिरौलीदान के कचहरी टोला पर नदी की भृकुटि टेढ़ी हो गई है। बचाव कार्य न होता देख लोगों में दहशत का माहौल है। यही कारण है कि इस टोले के निवासी पूर्व प्रधान हरिकृष्ण सिंह, श्रीकिशुन सिंह, गया सिंह, और रामाज्ञा सिंह समेत चार लोगों ने पक्के मकानों को तोड़वाने का कार्य शुरू करा दिया है। नदी में पानी कम है, फिर भी कटान तेज है और शीघ्र बचाव कार्य शुरू नहीं हुआ, तो नदी कई और घरों को निशाना बना सकती है। इस साल नदी की जद में कचहरी टोला के साथ नोनिया पट्टी, खैरखुटा, मदुरही, डीह टोला भी है। इस गांव के जिला पंचायत सदस्य अरविंद सिंह पटेल का कहना है कि विभागीय लापरवाही के चलते ही पिछले साल कंचन टोला और चित्तू टोला कटान की भेंट चढ़ गया था। इस साल भी वही स्थिति बनती नजर आ रही है, जो गांवों की सुरक्षा के लिए खतरनाक है।
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