{"_id":"5a16b4864f1c1b87698bd4bd","slug":"181511437446-kushinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वैज्ञानिक व तकनीकी विधि से खेती ही लाभप्रद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वैज्ञानिक व तकनीकी विधि से खेती ही लाभप्रद
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Thu, 23 Nov 2017 07:05 PM IST
विज्ञापन
उन्नति ख्ाेती
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कसया (कुशीनगर)। तहसील क्षेत्र के गांव कुड़वा उर्फ दिलीपनगर के टोला फुलवापट्टी में बृहस्पवितार को किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान से जुड़ी उसरा बाजार की इकाई की तरफ से आयोजित इस गोष्ठी में वैज्ञानिक व कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को गुणवत्तायुक्त फसल उत्पादित करने के तरीके बताए।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए उप निदेशक देवरिया डॉ. रजनीश मिश्र ने कहा कि वैज्ञानिक व तकनीक पर आधारित खेती किसानों के लिए लाभप्रद होगी। उन्होंने कहा कि प्याज, लहसुन, भिंडी, मेंथी, लोविया व आलू का बीज उपलब्ध है। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल पर खेती करने वाले किसान को प्रतिष्ठान की तरफ से 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।
गोष्ठी में तकनीकी अधिकारी अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि किसानों को प्रशिक्षित करने का कार्य भी किया जाता है। वहीं प्याज की फसल का प्रदर्शन भारत सरकारी की योजना के तहत खेत पर किए जाने की बात कही। प्रगतिशील किसान मोहन मुरारी सिंह, ओमप्रकाश व महेंद्र प्रसाद ने भी अपना अनुभव गोष्ठी में साझा किया।
विज्ञापन
इस मौके पर काशी कुशवाहा, रामसागर, जवाहर कुशवाहा, चंद्र प्रसाद, मुमताज अली, सुग्रीव कुशवाहा, ग्यासुद्दीन आलम, दीनानाथ कुशवाहा, रियाज अंसारी, कन्हैया कुमार गोंड, शहाबुद्दीन अली, मुहम्मद अली हुसैन, संदीप कुशवाहा, मृत्युंजय पटेल आदि किसान मौजूद रहे।
----
प्याज व पपीता का डेमो दिखाया गया
कसया। एकीकृत बागवानी मिशन के तहत फुलवापट्टी में आयोजित किसान गोष्ठी में किसानों ने प्याज व पपीता का डेमो मौजूद कृषि वैज्ञानिक व किसानों को खेत पर पहुंचकर दिखाया। किसान जितेंद्र कुशवाहा ने खेत में प्याज की फसल दिखाते हुए कहा कि एक एकड़ प्याज की खेती करने में लागत करीब 13500 रुपये आई, वहीं लाभ करीब एक लाख रुपये की बताए। पपीता की खेती कर रहे किसान रामसागर कुशवाहा ने बताया कि डेढ़ एकड़ पपीता की खेती करने में एक लाख आठ हजार रुपये व्यय हुआ, अभी तक आधे एकड़ की फसल बिक्री से चार लाख तीस हजार रुपये तक मिल चुका है।
विज्ञापन
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए उप निदेशक देवरिया डॉ. रजनीश मिश्र ने कहा कि वैज्ञानिक व तकनीक पर आधारित खेती किसानों के लिए लाभप्रद होगी। उन्होंने कहा कि प्याज, लहसुन, भिंडी, मेंथी, लोविया व आलू का बीज उपलब्ध है। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल पर खेती करने वाले किसान को प्रतिष्ठान की तरफ से 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।
विज्ञापन
गोष्ठी में तकनीकी अधिकारी अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि किसानों को प्रशिक्षित करने का कार्य भी किया जाता है। वहीं प्याज की फसल का प्रदर्शन भारत सरकारी की योजना के तहत खेत पर किए जाने की बात कही। प्रगतिशील किसान मोहन मुरारी सिंह, ओमप्रकाश व महेंद्र प्रसाद ने भी अपना अनुभव गोष्ठी में साझा किया।
विज्ञापन
इस मौके पर काशी कुशवाहा, रामसागर, जवाहर कुशवाहा, चंद्र प्रसाद, मुमताज अली, सुग्रीव कुशवाहा, ग्यासुद्दीन आलम, दीनानाथ कुशवाहा, रियाज अंसारी, कन्हैया कुमार गोंड, शहाबुद्दीन अली, मुहम्मद अली हुसैन, संदीप कुशवाहा, मृत्युंजय पटेल आदि किसान मौजूद रहे।
----
प्याज व पपीता का डेमो दिखाया गया
कसया। एकीकृत बागवानी मिशन के तहत फुलवापट्टी में आयोजित किसान गोष्ठी में किसानों ने प्याज व पपीता का डेमो मौजूद कृषि वैज्ञानिक व किसानों को खेत पर पहुंचकर दिखाया। किसान जितेंद्र कुशवाहा ने खेत में प्याज की फसल दिखाते हुए कहा कि एक एकड़ प्याज की खेती करने में लागत करीब 13500 रुपये आई, वहीं लाभ करीब एक लाख रुपये की बताए। पपीता की खेती कर रहे किसान रामसागर कुशवाहा ने बताया कि डेढ़ एकड़ पपीता की खेती करने में एक लाख आठ हजार रुपये व्यय हुआ, अभी तक आधे एकड़ की फसल बिक्री से चार लाख तीस हजार रुपये तक मिल चुका है।