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बेकार पड़ी पानी टंकी, 13 गांवों में पानी का संकट
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water tank became useless
- फोटो : KAUSHAMBI
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शोपीस बनी पानी टंकी, 13 गांवों में पानी का संकट
कौशाम्बी विकास खंड क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों में पानी की समस्या सिर चढ़कर बोल रही है। लोगों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए यहां के बिजिया चौराहे पर 30 साल पहले पानी टंकी का निर्माण कराया गया था। बामुश्किल चार.पांच साल चलने के बाद सप्लाई बंद कर दी गई। अब ग्रामीण हैंडपंपों के सहारे हैं। इसकी वजह से उन्हें दिक्कतें हो रही हैं। उधरए शिकायत के बाद भी जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं।
कौशाम्बी ब्लॉक के (कोसम इनाम) बिजिया चौराहे पर सन 1985 में 80 हजार लीटर की पानी टंकी का निर्माण कार्य शुरू कराया गया था। 1990 में यह बनकर तैयार हो गई। इसमें चार सबमर्सिबल लगे थे। बिजिया, बेहन पुरवा, सलेमपुर, बैगवां, जगन्नाथपुर, मुस्तफाबाद, आंबाकुआ, कोसम इनाम, पाली, गौराए, गोपसहसा, दाई का पुरवा व चांदकन सहित करीब 13 गांवों में जलापूर्ति की जाती थी। ग्रामीणों ने बताया कि बामुश्लि चार-पांच साल सप्लाई की गई। इसके बाद छोटी-छोटी खामियां दूर नहीं कराए जाने के कारण आपूर्ति बंद कर दी गई। लिहाजा ग्रामीण हैंडपंप के भरोसे हो गए। गांव वालों की मानें तो अधिकतर हैंडपंप पहले से ही बिगड़े हुए हैं।
कुछ ने गर्मी की शुरूआत होते ही हाथ खड़े कर दिए हैं। जिससे परेशानी बढ़ गई है। लोगों को दूसरे मोहल्लों में हैंडपंप पर पानी के लिए लाइन लगानी पड़ती है। गांव के लोगों का साफ कहना है कि हर गर्मी में पानी का अकाल पड़ जाता है। इस बार भी पानी टंकी दुरुस्त कराकर सप्लाई नहीं चालू कराई गई तो जल समस्या सिर चढ़कर बोलेगी। ये भी बताया कि अभी पांच साल पहले तक पानी टंकी में पंप ऑपरेटर आदि पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति थी। अक्सर ये आया भी करते थे। अब कोई नहीं आता है। टंकी में ताला लटकता रहता है।
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कौशाम्बी विकास खंड क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों में पानी की समस्या सिर चढ़कर बोल रही है। लोगों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए यहां के बिजिया चौराहे पर 30 साल पहले पानी टंकी का निर्माण कराया गया था। बामुश्किल चार.पांच साल चलने के बाद सप्लाई बंद कर दी गई। अब ग्रामीण हैंडपंपों के सहारे हैं। इसकी वजह से उन्हें दिक्कतें हो रही हैं। उधरए शिकायत के बाद भी जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं।
कौशाम्बी ब्लॉक के (कोसम इनाम) बिजिया चौराहे पर सन 1985 में 80 हजार लीटर की पानी टंकी का निर्माण कार्य शुरू कराया गया था। 1990 में यह बनकर तैयार हो गई। इसमें चार सबमर्सिबल लगे थे। बिजिया, बेहन पुरवा, सलेमपुर, बैगवां, जगन्नाथपुर, मुस्तफाबाद, आंबाकुआ, कोसम इनाम, पाली, गौराए, गोपसहसा, दाई का पुरवा व चांदकन सहित करीब 13 गांवों में जलापूर्ति की जाती थी। ग्रामीणों ने बताया कि बामुश्लि चार-पांच साल सप्लाई की गई। इसके बाद छोटी-छोटी खामियां दूर नहीं कराए जाने के कारण आपूर्ति बंद कर दी गई। लिहाजा ग्रामीण हैंडपंप के भरोसे हो गए। गांव वालों की मानें तो अधिकतर हैंडपंप पहले से ही बिगड़े हुए हैं।
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कुछ ने गर्मी की शुरूआत होते ही हाथ खड़े कर दिए हैं। जिससे परेशानी बढ़ गई है। लोगों को दूसरे मोहल्लों में हैंडपंप पर पानी के लिए लाइन लगानी पड़ती है। गांव के लोगों का साफ कहना है कि हर गर्मी में पानी का अकाल पड़ जाता है। इस बार भी पानी टंकी दुरुस्त कराकर सप्लाई नहीं चालू कराई गई तो जल समस्या सिर चढ़कर बोलेगी। ये भी बताया कि अभी पांच साल पहले तक पानी टंकी में पंप ऑपरेटर आदि पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति थी। अक्सर ये आया भी करते थे। अब कोई नहीं आता है। टंकी में ताला लटकता रहता है।

water tank became useless- फोटो : KAUSHAMBI
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