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गंगा तराई में पानी के लिए हाहाकार

Sun, 17 Apr 2016 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 17 Apr 2016 11:59 PM IST
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water problem in ganga kchar
नलों में सुबह-शाम लगती है पानी भरने के लिए लाइन
कौशाम्बी के गंगा कछारी गांवों में गर्मी आते ही पानी के लिए हाहाकार मचने लगा है। सिराथू के बम्हरौली सुजातपुर में स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि लोगों को बस्ती के उन हैंडपंपों में सुबह-शाम लाइन लगाकर पानी भरने की जद्दोजहद करनी पड़ रही है, जिन हैंडपंपों से पानी निकलता है। वहीं तमाम परिवार खेतों में लगे नलकूपों से पानी ढोने को मजबूर हैं।
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दोआबा में पेयजल की समस्या पिछले पांच सालों से लगातार बढ़ती जा रही है। मानसून के दौरान सूखे के कारण इस साल मार्च-अप्रैल महीने से स्थिति बिगड़ने लगी है। तेजी से नीचे जा रहे भू जलस्तर के कारण गांव-गांव हैंडपंपों से पानी निकलना बंद होने लगा है। जलनिगम के आंकड़े देखें तो जनपद में 6000 हैंडपंप रीबोर नहीं होने से बेकार पड़े हैं। अप्रैल महीने का पहला पखवारा ही बीता है। पर, कौशाम्बी के सिराथू और कड़ा ब्लॉक के गंगा तराई में बसे गांवों में 70 फीसदी हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो चुका है। सिराथू तहसील के गंगा की तराई में बसे गांवों पर नजर डालें तो 50 से अधिक गांवों में पेयजल की किल्लत से ग्रामीण जूझ रहे हैं। सबसे अधिक समस्या बम्हरौली, सुजातपुर, हिसामपुर परसखी, टड़हरपर, मोहनपुर, हब्बूनगर, सिपाह, ताज मल्लाहन, बिजलीपुर, मोंगरी कड़ा, पइंसा, नौगीरा आदि गांवों में है। यहां के वासिंदों को पेयजल जुटाने के लिए दूसरे मोहल्लों में लगे हैंडपम्पों पर जाना पड़ता है। भीड़ अधिक होने पर लोग बाल्टी, डिब्बे लेकर घंटे-घंटेभर तक लाइन लगाकर खड़े रहते हैं। वहीं कई गांवों के लोग खेत में लगे सबमर्सिबल पंपों से पानी लाने को मजबूर हैं। शिकायत पर अफसरों के पास बस एक जवाब रहता है कि शासन से पैसा न मिलने के कारण हैंडपंप रिबोर नहीं हो पा रहे हैं। धन मिलते ही खराब हैंडपम्पों का रीबोर शुरू करा दिया जाएगा।
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कुएं का दूषित पानी पी रहे हैं फरीदनपुर के लोग
 कौशाम्बी ब्लॉक के फरीदनपुर गांव में महीनेभर से पानी की किल्लत से 2000 लोग जूझ रहे हैं। गांव की प्रधान देवपति देवी, बांकेलाल मौर्य, राम लखन, हरिश्चंद्र, कामता प्रसाद, राजकुमार, उर्मिला देवी, सरिता देवी, वीरा देवी, रन्नो देवी, अमित कुमार आदि ने बताया कि गांव में कुल 10 हैंडपंप लगे हुए हैं। इनमें से 7 हैंडपंप महीनों से खराब पड़े हैं। जिन तीन हैंडपंपों से पानी निकल भी रहा है। उनमें भी दो-चार बाल्टी के बाद पानी निकलना बंद हो जाता है। गांव में 6 पुराने कुएं हैं। इनमें से तीन कुआं सूखा हुआ है। तीन कुएं में भी पानी गंदा निकलता है। यही गंदा पानी इस पूरे गांव के वासिदों को जिंदा रखे है। ग्रामीण कुएं का गंदा पानी भरकर रख लेते हैं। गंदगी बर्तन के नीचे बैठ जाने पर यही पानी पीने, खाना बनाने के उपयोग में लाया जाता है।
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अफसरों को तनिक भी परवाह नहीं
पेयजल की समस्या को लेकर अफसरों को तनिक भी परवाह नहीं है। वरना अफसर समस्या खड़ी होने पर टाल मटोल की रणनीति न अपनाते। मसलन, सीडीओ ओपी आर्या का कहना है कि हैंडपंपों के रीबोर के लिए भारी संख्या में आवेदन आए हैं। 2500 हैंडपंपों के रीबोर का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। पैसा मिलते ही जिन-जिन गांवों में पेयजल की समस्या गम्भीर है, वहां प्राथमिकता के आधार पर हैंडपंपों को रीबोर कराया जाएगा। जबकि जिला विकास अधिकारी का कहना है कि 4 सौ हैंडपंपों के रीबोर का लक्ष्य मिला है पर बजट नहीं। आखिर बजट के लिए पहल पहले क्यों नहीं की गई। अगर अब भी बजट मिलता है तो फिर हैंडपंप रीबोर कब तक होंगे अंदाजा लगाया जा सकता है।
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