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यूपी बोर्ड: जमकर लुटे अंक, कोई बना राजा कोई बना रंक

Tue, 03 Aug 2021 12:58 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 03 Aug 2021 12:58 AM IST
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up board : points rained on some some disappointed
up board : points rained on some some disappointed
यूपी बोर्ड ने 31 जुलाई को हाईस्कूल व इंटरमीडिएट का परिणाम जारी कर दिया। बोर्ड ने छात्रों पर ऐसे अंक ऐसे लुटाए हैं कि किसी पर खूब अंक बरसे हैं तो कोई मायूस है। इससे विद्यार्थियों में भी खासा आक्रोश है। आक्रोश भी वे ही दिखा रहे हैं जो मेधावी हैं और या फिर जिनका परिणाम अटक गया है।
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इस समस्या को विद्यार्थी व प्रधानाचार्य दोनों दो चार हैं। जांच के बाद बोर्ड ने छात्रों को ऐसे अंक जारी किए हैं जिससे किसी पर अंकों की बरसात हो गई है तो किसी के हाथ मायूसी लगी है। ऐसी स्थिति जिले के कुछ विद्यालयों के सामने आई है।
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धीरे-धीरे दिन बीतने के बाद जब सभी कॉलेजों में नंबर देने का खुलासा होगा तो अभी ऐसे मामलों अधिक आएंगे। यूपी बोर्ड ने जब परिणाम जारी किया तो पहली बार ही ऐसा हुआ है कि विद्यार्थी हो या शिक्षक फिर चाहे अधिकारी कोई भी जिलास्तर पर परिणाम नहीं देख पाया।
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विद्यालयों के कोड डालकर कुछ प्रधानाचार्यों ने संस्थान का परीक्षा परिणाम देखना चाहा तो आधा-अधूरा परिणाम देखने को मिला। वहीं इन प्रधानाचार्यों के होश तब उड़ गए जब कुछ विद्यार्थियों के परिणाम अटके दिखाई दे रहे थे। यानि न विद्यार्थी की गिनती पास मेें थी और न ही फेल में। जबकि सभी विद्यार्थियों को प्रमोट किया गया है।
अंकों की बरसात वाले संस्थानों में आई समस्या
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार गुरुजनों की अंकों की बरसात की वजह से यह समस्या सामने आ रही है। दरअसल, जब यूपी बोर्ड ने विद्यार्थियों के आंतरिक मूल्यांकन, छमाही परीक्षा, प्री-बोर्ड परीक्षा, नौवीं के अंक या 11वीं के अंक मांगें तो शिक्षकों ने ताबड़तोड़ नंबर देने शुरू कर दिए।
इसमेें ये भी नहीं देेखा कि किसी विद्यार्थी ने विद्यालय से अपना नाम वापस लेकर किसी अन्य कॉलेज से पंजीकरण तो नहीं करा लिया। कोरोना काल के चलते विद्यार्थी भी पूर्व के विद्यालय में अपना पंजीकरण कैंसल कराने नहीं गए। दूसरी जगह से भी वे पंजीकृत हो गए।

जब नंबर देने की बारी आई तो दोनों ही संस्थानों से नंबर दे दिए गए। बोर्ड की साइट पर ऐसे विद्यार्थियों के अंक डबल शो हो रहे हैं। इसलिए उनके परिणाम अटके नजर आ रहे हैं। डीआईओएस का कहना है कि ऐसे मामलों का समाधान तभी होगा जब बोर्ड की ओर से पहले वाले विद्यालय से पंजीकरण कैंसल कर डिलीट किया जाए और नए वाले विद्यालय मेें नाम जोड़ा जाए, तभी एक परिणाम को हटाकर विद्यार्थी का परिणाम जारी हो सकेगा।
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