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तुलसीदास ज्योति और रत्नावली दीपक : मोरारी बापू

Tue, 09 Apr 2019 12:51 AM IST
shailendra Kumar अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी Published by: shailendra Kumar Updated Tue, 09 Apr 2019 12:51 AM IST
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Tulsidas Jyoti and Ratnavali Deepak: Morari Bapu
कौशाम्बी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
मंझनपुर। संत मोरारी बापू ने कहा कि दीपक के बगैर ज्योति और ज्योति के बिना दीपक का कोई मूल्य नहीं होता है। तुलसीदास अखंड ज्योति और रत्नावली दीपक का प्रतिरूप हैं। यदि ये दीया नहीं होता तो ज्योति नहीं जलती और रामचरित मानस का उजाला जग में नहीं फैलता। सोमवार को रत्नावली धाम में कथा सुनने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े।
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  संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से महेवा घाट पर आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के तीसरे दिन सोमवार को मोरारी बापू ने मानस रत्नावली के प्रसंग की महत्ता बताई। कहा कि रत्नावली मां में यथार्थ दर्शन है। रत्नावली शैलपुत्री हैं क्योंकि उनके पिता दीनबंधु से कोई शास्त्रार्थ नहीं कर सकता था। रत्नावली एक अचल, अटल बाप की बेटी थीं। रत्नावली ब्रह्मचारिणी हैं। रत्नावली चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कन्धमाता भी हैं। जिसने हम सबको परम धर्म सिखाया। रत्नावली भ्रम से दूर करती हैं। कालरात्रि के रूप में मृत्यु के भय का निवारण करती हैं। उन्होंने कहा कि व्यासपीठ किसी को सिद्ध करने नहीं बल्कि मैं स्वयं को शुद्ध करने आया हूं। मेरी कल्पना में कोई रुचि नहीं है। लेकिन शिव रूपी संकल्पना बहुत जरूरी है। इस दौरान कथा के मुख्य आयोजनकर्ता मदन पालीवाल, ट्रस्टी प्रकाश पुरोहित, रविंद्र जोशी, रूपेश व्यास, विकास पुरोहित, मंत्रराज पालीवाल आदि ने व्यासपीठ पर पुष्प अर्पित कर कथा श्रवण का लाभ लिया।
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