{"_id":"a5688cb4e16c23e281459a4d2a22bea0","slug":"the-light-is-switched-off-for-9-years-satarganj-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"9 साल से गुल है सतारगंज में बत्ती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
9 साल से गुल है सतारगंज में बत्ती
ब्यूरो/अमर उजाला, कौशाम्बी
Updated Sun, 08 Mar 2015 11:43 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आंधी में तार, खंभे टूट जाने से कौशाम्बी के सतारगंज गांव में नौ साल से बिजली आपूर्ति ठप है। इससे बस्ती के करीब 70 घरों के लोगों को रात अंधेरे में गुजारनी पड़ रही है। आरोप है कि एक्सईएन, एसडीओ, जेई के साथ ही सांसद, विधायक से भी शिकायत की गई। इसके बाद भी अब तक टूटे हुए खंभे-तार बदले नहीं जा सके हैं। इसका गांववालों में जबरदस्त गुस्सा है।
कौशाम्बी के यमुना कछार में बसा है सतारगंज गांव। गुपसहसा उपकेंद्र से जुड़े करीब 70 मकानों के इस गांव में वर्ष 2005 में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना से विद्युतीकरण कराया गया था। गांव के रहने वाले बच्चालाल यादव, राजेंद्र त्रिपाठी, मूलचंद्र, श्रीप्रकाश, विनय कुमार, लवकुश आदि ने बताया कि वर्ष 2006 की गर्मी में आई आंधी में पोल-तार टूटकर गिर गए थे। तभी से पूरे गांव में बिजली आपूर्ति ठप है। ग्रामीणों ने बताया कि आंधी में तार-खंभे टूटने की जानकारी दूसरे दिन ही गुपसहसा उपकेंद्र के तत्कालीन अवर अभियंता को दी गई थी। इसके बाद से लगातार इसकी शिकायत एक्सईएन, एसडीओ और अवर अभियंता से की जाती रही है। कई बार सांसद, विधायक को भी खंभे-तार टूटे होने से बिजली आपूर्ति ठप होने की जानकारी दी गई।
आरोप है कि अफसर, नेता किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। जिसका खामियाजा पूरे गांव के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उधर, गांव में नौ साल से बिजली आपूर्ति ठप होने से जहां गांववालों को रात अंधेरे में गुजारनी पड़ रही है। वहीं ग्रामीणों को तमाम अन्य परेशानियों से भी जूझना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या तो गांववालों को अपने मोबाइल की बैटरी चार्ज करने में होती है। लोग बाजार में जाकर दुकानदारों को दो रूपये देकर मोबाइल की बैटरी चार्ज कराते हैं। मामले में अवर अभियंता श्रवण कुमार ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। अब तक टूटे हुए तार-खंभे क्यों नहीं बदले गए। इसकी जानकारी करके जल्द ही गांव में बिजली आपूर्ति बहाल कराने की कोशिश की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
कौशाम्बी के यमुना कछार में बसा है सतारगंज गांव। गुपसहसा उपकेंद्र से जुड़े करीब 70 मकानों के इस गांव में वर्ष 2005 में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना से विद्युतीकरण कराया गया था। गांव के रहने वाले बच्चालाल यादव, राजेंद्र त्रिपाठी, मूलचंद्र, श्रीप्रकाश, विनय कुमार, लवकुश आदि ने बताया कि वर्ष 2006 की गर्मी में आई आंधी में पोल-तार टूटकर गिर गए थे। तभी से पूरे गांव में बिजली आपूर्ति ठप है। ग्रामीणों ने बताया कि आंधी में तार-खंभे टूटने की जानकारी दूसरे दिन ही गुपसहसा उपकेंद्र के तत्कालीन अवर अभियंता को दी गई थी। इसके बाद से लगातार इसकी शिकायत एक्सईएन, एसडीओ और अवर अभियंता से की जाती रही है। कई बार सांसद, विधायक को भी खंभे-तार टूटे होने से बिजली आपूर्ति ठप होने की जानकारी दी गई।
विज्ञापन
आरोप है कि अफसर, नेता किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। जिसका खामियाजा पूरे गांव के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उधर, गांव में नौ साल से बिजली आपूर्ति ठप होने से जहां गांववालों को रात अंधेरे में गुजारनी पड़ रही है। वहीं ग्रामीणों को तमाम अन्य परेशानियों से भी जूझना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या तो गांववालों को अपने मोबाइल की बैटरी चार्ज करने में होती है। लोग बाजार में जाकर दुकानदारों को दो रूपये देकर मोबाइल की बैटरी चार्ज कराते हैं। मामले में अवर अभियंता श्रवण कुमार ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। अब तक टूटे हुए तार-खंभे क्यों नहीं बदले गए। इसकी जानकारी करके जल्द ही गांव में बिजली आपूर्ति बहाल कराने की कोशिश की जाएगी।
विज्ञापन