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Kaushambi News: जन्मदिन पर भाई से मिली साइकिल बनी कृष्णा की आखिरी सवारी
Tue, 27 Oct 2026 12:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Tue, 27 Oct 2026 12:44 AM IST
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घर पर रोते-बिलखते पीड़ित परिजन व लोगोें की लगी भीड़। संवाद
जन्मदिन की खुशियां अभी परिवार की यादों में ताजा ही थीं कि एक हादसे ने सब कुछ छीन लिया। जिस साइकिल को पाकर 14 वर्षीय कृष्णा केसरवानी खुश हुआ था, वही सोमवार सुबह उसकी आखिरी सवारी बन गई। 22 अक्तूबर को जन्मदिन पर मिली साइकिल लेकर वह रोज की तरह सुबह दोस्तों के साथ घूमने निकला था। परिवार को क्या पता था कि हंसते-खेलते घर से निकला कृष्णा के काल की गवाही वही साइकिल बनेगी, वह फिर कभी लौटकर नहीं आएगा।
ममेरे भाई ऋषि केसरी ने बताया कि 22 अक्तूबर को कृष्णा का जन्मदिन था। घर में काफी समय से उसकी ही एक साइकिल रखी थी। जन्मदिन पर उन्होंने उसे कृष्णा को उपहार में दे दिया। साइकिल मिलने के बाद से वह हर दिन सुबह साइकिल चलाने के लिए निकलता था।
सोमवार सुबह भी वह अपने साथियों के साथ साइकिल लेकर गया था। घर से करीब 500 मीटर दूर स्थित रास्ते में हुए हादसे ने परिवार की खुशियां मातम में बदल दीं। जन्मदिन पर भाई से मिली साइकिल ही कृष्णा की आखिरी सवारी बनी।
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हर किसी का करता था सम्मान, दौड़कर करता था काम
ऋषि ने बताया कि कृष्णा पढ़ाई-लिखाई में बहुत अच्छा था। घर में सबसे छोटा होने के कारण सभी का लाडला था। वह बड़ों का सम्मान करता था और कोई भी काम कहने पर दौड़कर पूरा करता था। उसकी मिलनसार आदतों के कारण परिवार के सभी लोग उसे बहुत प्यार करते थे। उसकी असमय मौत से पूरा परिवार टूट गया है।
कृष्णा की यादें अब परिजनों को बार-बार रुला रही हैं। जन्मदिन पर मिले उपहार को लेकर उसके चेहरे पर आई खुशी अब परिवार के लिए दर्दनाक याद बन गई है। जिस साइकिल को चलाने के लिए वह हर सुबह उत्साह से घर से निकलता था, सोमवार को उसी साइकिल के साथ निकला उसका सफर कभी न लौटने वाला बन गया। परिवार के लिए इस सदमे को सह पाना मुश्किल हो रहा है।
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ममेरे भाई ऋषि केसरी ने बताया कि 22 अक्तूबर को कृष्णा का जन्मदिन था। घर में काफी समय से उसकी ही एक साइकिल रखी थी। जन्मदिन पर उन्होंने उसे कृष्णा को उपहार में दे दिया। साइकिल मिलने के बाद से वह हर दिन सुबह साइकिल चलाने के लिए निकलता था।
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सोमवार सुबह भी वह अपने साथियों के साथ साइकिल लेकर गया था। घर से करीब 500 मीटर दूर स्थित रास्ते में हुए हादसे ने परिवार की खुशियां मातम में बदल दीं। जन्मदिन पर भाई से मिली साइकिल ही कृष्णा की आखिरी सवारी बनी।
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हर किसी का करता था सम्मान, दौड़कर करता था काम
ऋषि ने बताया कि कृष्णा पढ़ाई-लिखाई में बहुत अच्छा था। घर में सबसे छोटा होने के कारण सभी का लाडला था। वह बड़ों का सम्मान करता था और कोई भी काम कहने पर दौड़कर पूरा करता था। उसकी मिलनसार आदतों के कारण परिवार के सभी लोग उसे बहुत प्यार करते थे। उसकी असमय मौत से पूरा परिवार टूट गया है।
कृष्णा की यादें अब परिजनों को बार-बार रुला रही हैं। जन्मदिन पर मिले उपहार को लेकर उसके चेहरे पर आई खुशी अब परिवार के लिए दर्दनाक याद बन गई है। जिस साइकिल को चलाने के लिए वह हर सुबह उत्साह से घर से निकलता था, सोमवार को उसी साइकिल के साथ निकला उसका सफर कभी न लौटने वाला बन गया। परिवार के लिए इस सदमे को सह पाना मुश्किल हो रहा है।