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पति की दीर्घायु के लिए रखा तीज का व्रत
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sun, 04 Sep 2016 11:57 PM IST
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जिले में रविवार को सुहागिनों और कुंवारी कन्याओं ने हरितालिका तीज का निर्जला व्रत रखा। शाम को नए कपड़े पहनने के बाद सोलह शृंगार कर सुहागिन महिलाओं ने भगवान शंकर की विधि विधान से पूजा की। वहीं कुंआरी कन्याओं ने व्रत रखकर मनचाहे वर प्राप्ति की कामना की। शाम को पूजन-अर्चन के बाद कुछ महिलाओं ने फलाहार का सेवन किया तो कुछ ने जल तक ग्रहण नहीं किया। व्रत का पारायण सोमवार की सुबह भगवान भोलेनाथ के ध्यान के बाद किया जाएगा।
शिवपुराण के मुताबिक माता पार्वती ने भगवान भोले नाथ को पति के रूप में पाने के लिए 12 साल तक बेलपत्र और जल पीकर तपस्या की थी। कथा पर जाएं तो कलयुग में कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर पाने के लिए तीन दिन निर्जला व्रत रखने का प्राविधान किया गया था, लेकिन भगवान भोलेनाथ ने इसे एक दिन के लिए कर दिया। इसके अलावा यह व्रत रखने वाली सुहागिन महिलाओं का सुहाग कभी संकट में नहीं पड़ सकता, तब से लेकर आज तक इस व्रत का महत्व महिलाओं के लिए बना हुआ है। रविवार को भादव मास शुक्ल पक्ष की तीज होने पर जिले की सुहागिनों और कन्याओं ने पूरे भक्तिभाव से व्रत रखा।
पूर्व संध्या पर ढूढ़े नहीं मिला दूध
हरितालिका तीज व्रत के एक दिन पूर्व महिलाएं घरों में सेवई पकाती हैं। माना जाता है कि सेवई खाने के बाद व्रत रखने से दूसरे दिन भूख कम लगती है साथ ही दूध की ताकत के चलते शरीर कमजोर नहीं पड़ता। ऐसे में पर्व से एक दिन पूर्व सेवई बनाने के लिए दूध की मांग इतनी बढ़ गई कि दूध ढूढ़े नहीं मिल रहा था।
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दोगुना हुआ खीरे का भाव
हरितालिका तीज व्रत रखने वाली महिलाएं भगवान भोलेनाथ की पूजा में बेलपत्र, फूल, माला के अलावा सोलह श्रृंगार की सामग्री चढ़ाती हैं। पूजन के दौरान खीरे का विशेष महत्व रहता है। ऐसे में खीरे की मांग बढ़ना स्वाभाविक था। रविवार की सुबह जब खीरे की खरीददारी बढ़ती गई तो बेचने वालों ने भाव दोगुना कर दिया।
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शिवपुराण के मुताबिक माता पार्वती ने भगवान भोले नाथ को पति के रूप में पाने के लिए 12 साल तक बेलपत्र और जल पीकर तपस्या की थी। कथा पर जाएं तो कलयुग में कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर पाने के लिए तीन दिन निर्जला व्रत रखने का प्राविधान किया गया था, लेकिन भगवान भोलेनाथ ने इसे एक दिन के लिए कर दिया। इसके अलावा यह व्रत रखने वाली सुहागिन महिलाओं का सुहाग कभी संकट में नहीं पड़ सकता, तब से लेकर आज तक इस व्रत का महत्व महिलाओं के लिए बना हुआ है। रविवार को भादव मास शुक्ल पक्ष की तीज होने पर जिले की सुहागिनों और कन्याओं ने पूरे भक्तिभाव से व्रत रखा।
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पूर्व संध्या पर ढूढ़े नहीं मिला दूध
हरितालिका तीज व्रत के एक दिन पूर्व महिलाएं घरों में सेवई पकाती हैं। माना जाता है कि सेवई खाने के बाद व्रत रखने से दूसरे दिन भूख कम लगती है साथ ही दूध की ताकत के चलते शरीर कमजोर नहीं पड़ता। ऐसे में पर्व से एक दिन पूर्व सेवई बनाने के लिए दूध की मांग इतनी बढ़ गई कि दूध ढूढ़े नहीं मिल रहा था।
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दोगुना हुआ खीरे का भाव
हरितालिका तीज व्रत रखने वाली महिलाएं भगवान भोलेनाथ की पूजा में बेलपत्र, फूल, माला के अलावा सोलह श्रृंगार की सामग्री चढ़ाती हैं। पूजन के दौरान खीरे का विशेष महत्व रहता है। ऐसे में खीरे की मांग बढ़ना स्वाभाविक था। रविवार की सुबह जब खीरे की खरीददारी बढ़ती गई तो बेचने वालों ने भाव दोगुना कर दिया।