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1998 के मध्यावधि चुनाव में शैलेंद्र ने खोला था सपा का खाता
Sat, 06 Apr 2019 12:51 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Sat, 06 Apr 2019 12:51 AM IST
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सिराथू। देश में 12 वीं लोक सभा का मध्यावधि चुनाव दो साल बाद 1998 में हुआ। दोआबा की सियायत में समाजवादी पार्टी काफी मजबूत हो चुकी थी। उस वक्त बाहुबली अतीक अमहद के प्रभाव वाली शहर पश्चिमी विधानसभा भी चायल संसदीय सीट का हिस्सा हुआ करता था। अतीक का साथ मिलने से सपा के शैलेंद्र कुमार पहली बार सपा का खाता खोलने में कामयाब हुए।
वर्ष 1998 में सरकार गिर जाने से देश सियासी अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था। देश मध्यावधि चुनाव की आग में झोंक दिया गया। चायल सुरक्षित सीट से सपा ने शैलेंद्र कु मार, भाजपा ने अपने सिटिंग एमपी डॉ. अमृत लाल भारती, बसपा ने इंद्रजीत सरोज, कांग्रेस ने रामनिहोर राकेश और जनता दल ने काली चरण को मैदान में उतारा। इसी के साथ आधा दर्जन निर्दल प्रत्याशियों ने भी अपनी किस्मत आमजाने के लिए चुनावी दंगल में ताल ठोंका। महज दो साल के अल्प कार्यकाल में भाजपा से सांसद रहे डॉ. अमृत लाल भारती जनता का विश्वास खो चुके थे। क्षेत्र का सियासी माहौल भी बदल चुका था। सपा के बैनर तले स्थानीय क्षत्रपों का जुड़ाव हो चुका था। सपा के सबसे बड़े मददगार के रूप में इलाहाबाद की पश्चिम सीट से बाहुबली विधायक अतीक अहमद का मुलायम सिंह की गहरी दोस्ती पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हुई। अतीक अहमद अपनी सीट से जिताने के साथ दोबाआ में भी ताबड़तोड़ जन सभाएं कर सियासी माहौल सपा के पक्ष में करने मे कामयाब रहे।
भाजपा के विरोध में वोटों का ऐसा ध्रुवीकरण हुआ, जिससे चुनाव परिणाम बदल गया। चुनाव में सपा के शैलेंद्र सर्वाधिक 187049 मत पाकर विजय पताका फहराने में सफल रहे। भाजपा प्रत्याशी डॉ. भारती 165703 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। चुनाव में बसपा तीसरी ताकत के रूप में उभर कर आई। बसपा के इंद्रजीत सरोज 140457 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस प्रत्याशी रामनिहोर राकेश 27897 मत पाकर चौथे स्थान पर रहे। जनता दल के काली चरण को 4331 निर्दल बच्ची लाल पासी को 15896, बाबू लाल को 2249, राम सूरत को 1954, राम शरण को 1541,दिनेश को 1058 तथा राज कुमार को सिर्फ 811 मतों से ही संतोष करना पड़ा।
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वर्ष 1998 में सरकार गिर जाने से देश सियासी अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था। देश मध्यावधि चुनाव की आग में झोंक दिया गया। चायल सुरक्षित सीट से सपा ने शैलेंद्र कु मार, भाजपा ने अपने सिटिंग एमपी डॉ. अमृत लाल भारती, बसपा ने इंद्रजीत सरोज, कांग्रेस ने रामनिहोर राकेश और जनता दल ने काली चरण को मैदान में उतारा। इसी के साथ आधा दर्जन निर्दल प्रत्याशियों ने भी अपनी किस्मत आमजाने के लिए चुनावी दंगल में ताल ठोंका। महज दो साल के अल्प कार्यकाल में भाजपा से सांसद रहे डॉ. अमृत लाल भारती जनता का विश्वास खो चुके थे। क्षेत्र का सियासी माहौल भी बदल चुका था। सपा के बैनर तले स्थानीय क्षत्रपों का जुड़ाव हो चुका था। सपा के सबसे बड़े मददगार के रूप में इलाहाबाद की पश्चिम सीट से बाहुबली विधायक अतीक अहमद का मुलायम सिंह की गहरी दोस्ती पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हुई। अतीक अहमद अपनी सीट से जिताने के साथ दोबाआ में भी ताबड़तोड़ जन सभाएं कर सियासी माहौल सपा के पक्ष में करने मे कामयाब रहे।
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भाजपा के विरोध में वोटों का ऐसा ध्रुवीकरण हुआ, जिससे चुनाव परिणाम बदल गया। चुनाव में सपा के शैलेंद्र सर्वाधिक 187049 मत पाकर विजय पताका फहराने में सफल रहे। भाजपा प्रत्याशी डॉ. भारती 165703 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। चुनाव में बसपा तीसरी ताकत के रूप में उभर कर आई। बसपा के इंद्रजीत सरोज 140457 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस प्रत्याशी रामनिहोर राकेश 27897 मत पाकर चौथे स्थान पर रहे। जनता दल के काली चरण को 4331 निर्दल बच्ची लाल पासी को 15896, बाबू लाल को 2249, राम सूरत को 1954, राम शरण को 1541,दिनेश को 1058 तथा राज कुमार को सिर्फ 811 मतों से ही संतोष करना पड़ा।
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