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आबादी 18 लाख, बसें चल रहीं सिर्फ 16
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परिवहन निगम की महज 16 बसों के जिम्मे 18 लाख आबादी के आवागमन का जिम्मा
डग्गामार वाहनों के हवाले दोआबा की यातायात व्यवस्था, परेशान हो रहे मुसाफिर
प्रमुख कस्बों को आपस में जोड़ने के लिए परिवहन निगम की ओर से नहीं किया जा रहा बसों का संचालन
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। जिले की 18 लाख की आबादी के लिए परिवहन निगम की ओर से सिर्फ 16 बसों का संचालन किया जा रहा है। जिले के प्रमुख कस्बों को आपस में जोड़ने के लिए परिवहन निगम की ओर से बसों की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। कड़ा धाम-दारानगर, चरवा, पूरब-पश्चिमशरीरा, चायल समेत आधा दर्जन प्रमुख कस्बों से रोडवेज बसों का संचालन ही नहीं है। ऐसे में इन स्थानों की यातायात व्यवस्था डग्गामार वाहनों के हवाले है। इसके चलते मुसाफिरों को परेशान होना पड़ रहा है।
प्रयागराज से चार अप्रैल 1997 को काटकर कौशाम्बी जिले के रूप में अलग किए गए दोआबा की यातायात व्यवस्था ढाई दशक बाद भी डग्गामार वाहनों के हवाले है। भरवारी कस्बे में 15 से 30 किलोमीटर की दूरी पर बसें धाता, खखरेरू, सैनी, मुरतगंज, मंझनपुर, समशाबाद, सरायकिल, मनौरी, सिराथू आदि प्रमुख बाजारों तक जाने के लिए रोडवेज की कोई बसें नहीं हैं। आवागमन के लिए मुसाफिरों को डग्गामार या फिर निजी वाहनों का ही सहारा लेना पड़ रहा है। सरायअकिल से प्रयागराज के लिए तो राज्य परिवहन निगम की बसें चल रही हैं, लेकिन शाम पांच बजे के बाद सरायअकिल से प्रयागराज के लिए कोई बस सेवा नहीं है। इसके बाद यदि कोई प्रयागराज जाना चाहे तो निजी अथवा डग्गामार वाहन ही सहारा है। इसके अलावा पुरखास, चायल, मनौरी, मंझनपुर, पर्यटक स्थल कौशाम्बी, यमुना किनारे बसे कनैली आदि स्थानों के लिए प्राइवेट बसों के सहारे ही सफर करना पड़ता है। चायल कस्बे में प्रयागराज से सरायअकिल तक के लिए तो बस सुविधा है, लेकिन जिला मुख्यालय से तहसील मुख्यालय को जोड़ने के लिए निगम की कोई बस सेवा नहीं है। इसके अलावा चायल कस्बे से करारी, चरवा, सिराथू, भरवारी आदि प्रमुख कस्बों में आवागमन के लिए सरकारी बसों की कोई सुविधा नहीं है। कस्बे के लोगों ने सरायअकिल, चरवा, मंझनपुर, करारी, पश्चिम शरीरा, भरवारी, सिराथू कस्बे के लिए बसें चलवाने की मांग की है। नगर पंचायत होने के बावजूद चरवा से तहसील मुख्यालय चायल अथवा जिला मुख्यालय मंझनपुर के लिए निगम की बस सेवा नहीं है। चरवा से कहीं भी आवागमन करना है तो आपको निजी वाहन का ही सहारा लेने का एकमात्र विकल्प है।
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पर्यटन स्थल कौशाम्बी और शक्तिपीठ शीतलाधाम के लिए भी बस सेवा नहीं
मंझनपुर। जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थानों के लिए भी निगम की कोई बस सेवा नहीं है। बात अगर पर्यटन स्थल कौशाम्बी की करें तो जैन-बौद्घ की तपोस्थली होने के कारण यहां देश-विदेश से साल भर में तकरीबन 20 हजार श्रद्धालु आते हैं। मगर यातायात की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण सभी को अपने-अपने वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। कमोवेश यही हाल 51 शक्तिपीठों में शामिल शीतलाधाम कड़ा का है। यहां नवरात्र के अलावा आम दिनों में भी देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्घालु मां की दरबार में माथा टेकने आते हैं। इसके बाद भी यहां के लिए परिवहन निगम की बसों का संचालन नहीं किया जाता है।
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इनका कहना है
कौशाम्बी जिले में फिलहाल परिवहन निगम की 16 बसों का संचालन किया जा रहा है। जल्द ही मंझनपुर में नए डिपो का शुभारंभ होने वाला है। इसके बाद बसों की संख्या में इजाफा होने पर विभिन्न कस्बों में निगम की सेवाएं प्रारंभ हो जाएंगी।
प्रेम कुमार- एआरएम-लीडर रोड बस डिपो,प्रयागराज
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डग्गामार वाहनों के हवाले दोआबा की यातायात व्यवस्था, परेशान हो रहे मुसाफिर
प्रमुख कस्बों को आपस में जोड़ने के लिए परिवहन निगम की ओर से नहीं किया जा रहा बसों का संचालन
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। जिले की 18 लाख की आबादी के लिए परिवहन निगम की ओर से सिर्फ 16 बसों का संचालन किया जा रहा है। जिले के प्रमुख कस्बों को आपस में जोड़ने के लिए परिवहन निगम की ओर से बसों की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। कड़ा धाम-दारानगर, चरवा, पूरब-पश्चिमशरीरा, चायल समेत आधा दर्जन प्रमुख कस्बों से रोडवेज बसों का संचालन ही नहीं है। ऐसे में इन स्थानों की यातायात व्यवस्था डग्गामार वाहनों के हवाले है। इसके चलते मुसाफिरों को परेशान होना पड़ रहा है।
प्रयागराज से चार अप्रैल 1997 को काटकर कौशाम्बी जिले के रूप में अलग किए गए दोआबा की यातायात व्यवस्था ढाई दशक बाद भी डग्गामार वाहनों के हवाले है। भरवारी कस्बे में 15 से 30 किलोमीटर की दूरी पर बसें धाता, खखरेरू, सैनी, मुरतगंज, मंझनपुर, समशाबाद, सरायकिल, मनौरी, सिराथू आदि प्रमुख बाजारों तक जाने के लिए रोडवेज की कोई बसें नहीं हैं। आवागमन के लिए मुसाफिरों को डग्गामार या फिर निजी वाहनों का ही सहारा लेना पड़ रहा है। सरायअकिल से प्रयागराज के लिए तो राज्य परिवहन निगम की बसें चल रही हैं, लेकिन शाम पांच बजे के बाद सरायअकिल से प्रयागराज के लिए कोई बस सेवा नहीं है। इसके बाद यदि कोई प्रयागराज जाना चाहे तो निजी अथवा डग्गामार वाहन ही सहारा है। इसके अलावा पुरखास, चायल, मनौरी, मंझनपुर, पर्यटक स्थल कौशाम्बी, यमुना किनारे बसे कनैली आदि स्थानों के लिए प्राइवेट बसों के सहारे ही सफर करना पड़ता है। चायल कस्बे में प्रयागराज से सरायअकिल तक के लिए तो बस सुविधा है, लेकिन जिला मुख्यालय से तहसील मुख्यालय को जोड़ने के लिए निगम की कोई बस सेवा नहीं है। इसके अलावा चायल कस्बे से करारी, चरवा, सिराथू, भरवारी आदि प्रमुख कस्बों में आवागमन के लिए सरकारी बसों की कोई सुविधा नहीं है। कस्बे के लोगों ने सरायअकिल, चरवा, मंझनपुर, करारी, पश्चिम शरीरा, भरवारी, सिराथू कस्बे के लिए बसें चलवाने की मांग की है। नगर पंचायत होने के बावजूद चरवा से तहसील मुख्यालय चायल अथवा जिला मुख्यालय मंझनपुर के लिए निगम की बस सेवा नहीं है। चरवा से कहीं भी आवागमन करना है तो आपको निजी वाहन का ही सहारा लेने का एकमात्र विकल्प है।
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पर्यटन स्थल कौशाम्बी और शक्तिपीठ शीतलाधाम के लिए भी बस सेवा नहीं
मंझनपुर। जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थानों के लिए भी निगम की कोई बस सेवा नहीं है। बात अगर पर्यटन स्थल कौशाम्बी की करें तो जैन-बौद्घ की तपोस्थली होने के कारण यहां देश-विदेश से साल भर में तकरीबन 20 हजार श्रद्धालु आते हैं। मगर यातायात की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण सभी को अपने-अपने वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। कमोवेश यही हाल 51 शक्तिपीठों में शामिल शीतलाधाम कड़ा का है। यहां नवरात्र के अलावा आम दिनों में भी देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्घालु मां की दरबार में माथा टेकने आते हैं। इसके बाद भी यहां के लिए परिवहन निगम की बसों का संचालन नहीं किया जाता है।
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इनका कहना है
कौशाम्बी जिले में फिलहाल परिवहन निगम की 16 बसों का संचालन किया जा रहा है। जल्द ही मंझनपुर में नए डिपो का शुभारंभ होने वाला है। इसके बाद बसों की संख्या में इजाफा होने पर विभिन्न कस्बों में निगम की सेवाएं प्रारंभ हो जाएंगी।
प्रेम कुमार- एआरएम-लीडर रोड बस डिपो,प्रयागराज