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केला देगा कौशाम्बी के आर्थिक विकास को रफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Tue, 29 May 2018 12:40 AM IST
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कौशाम्बी का केला अब जिले के आर्थिक विकास को रफ्तार देगा। केले के विभिन्न हिस्सों का इस्तेमाल कर कई उत्पाद तैयार करने की योजना है। जिलाधिकारी ने केले की खेती करने वाले किसानों के साथ बैठक कर जानकारी दी और सुझाव भी मांगे।
सोमवार को कलेक्ट्रेट के सम्राट उदयन सभागार में केले की खेती करने वाले किसानों के साथ बैठक की। इसमें जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि शासन की मंशा के मुताबिक एक जनपद एक उत्पाद योजना के तहत केले को शामिल किया गया है। यहां बड़ी संख्या में किसान केले की खेती करते हैं।
डीएम ने अग्रणी बैंक के जिला प्रबंधक (एडीएम) को निर्देश दिया कि केला से बनने वाले उत्पाद के लिए किसानों को बैंक की तरफ से पूरी सहायता उपलब्ध कराई जाए। बैठक में 32 किसान शामिल हुए थे। गुआरा तैयबपुर से आए किसान कमलेश सिंह व पूरब शरीरा से आए मंगला प्रसाद ने केले से बनाए गए अचार, जैम, चिप्स, जूस एवं केले के रेशे से बनाए गए पत्तल, पर्स, झोला, चप्पल जैसे वस्तुओं का प्रदर्शन किया। किसानों ने बताया कि केले के रेशे से उत्तम गुणवत्ता वाला पेपर, कपड़ा, हस्त निर्मित पेपर, जैविक खाद, मछली का दाना, हस्तशिल्प, जैविक खाद भी बनाई जा सकती है।
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डीएम ने कहा कि यहां केले के उत्पादन को देखते हुए किसानों के आर्थिक विकास की काफी संभावनाएं हैं। बैठक में बृजेश कुमार, रमेशचंद्र शर्मा, हैदर अली, सुशील कुमार, अशोक कुमार, अभय कुमार, उमेश कुमार, रुस्तम, वीरेन्द्र कुमार, गोविंद प्रसाद, महताब सहित कुल 32 किसान शामिल हुए।
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सोमवार को कलेक्ट्रेट के सम्राट उदयन सभागार में केले की खेती करने वाले किसानों के साथ बैठक की। इसमें जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि शासन की मंशा के मुताबिक एक जनपद एक उत्पाद योजना के तहत केले को शामिल किया गया है। यहां बड़ी संख्या में किसान केले की खेती करते हैं।
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डीएम ने अग्रणी बैंक के जिला प्रबंधक (एडीएम) को निर्देश दिया कि केला से बनने वाले उत्पाद के लिए किसानों को बैंक की तरफ से पूरी सहायता उपलब्ध कराई जाए। बैठक में 32 किसान शामिल हुए थे। गुआरा तैयबपुर से आए किसान कमलेश सिंह व पूरब शरीरा से आए मंगला प्रसाद ने केले से बनाए गए अचार, जैम, चिप्स, जूस एवं केले के रेशे से बनाए गए पत्तल, पर्स, झोला, चप्पल जैसे वस्तुओं का प्रदर्शन किया। किसानों ने बताया कि केले के रेशे से उत्तम गुणवत्ता वाला पेपर, कपड़ा, हस्त निर्मित पेपर, जैविक खाद, मछली का दाना, हस्तशिल्प, जैविक खाद भी बनाई जा सकती है।
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डीएम ने कहा कि यहां केले के उत्पादन को देखते हुए किसानों के आर्थिक विकास की काफी संभावनाएं हैं। बैठक में बृजेश कुमार, रमेशचंद्र शर्मा, हैदर अली, सुशील कुमार, अशोक कुमार, अभय कुमार, उमेश कुमार, रुस्तम, वीरेन्द्र कुमार, गोविंद प्रसाद, महताब सहित कुल 32 किसान शामिल हुए।