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लोस चुनाव:पहली परीक्षा में ही फेल हो गई आधी आबादी
Mon, 22 Apr 2019 12:21 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Mon, 22 Apr 2019 12:21 AM IST
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मंझनपुर। आजादी के बाद से अब तक हुए लोक सभा चुनावों में किसी राजनैतिक दल ने जिले की महिलाओं को उच्च सदन में भागीदारी करने का मौका नहीं दिया। भाजपा ने एक बार मंजू चंद्रा पर दांव भी लगाया तो चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। इस बार भी निर्दल और अन्य दल से दो महिला प्रत्याशी मैदान में थीं। हालांकि नामांकन पत्रों की जांच के दौरान उनके पर्चे खारिज हो गए।
वर्ष 1952, 1957, 1962, 1967, 1971, 1977 के चुनावों के दौरान किसी सियासी दल ने आधी आबादी पर भरोसा नहीं दिखाया। महिलाओं ने यहां निर्दल के तौर पर भी अपना नामांकन नहीं दाखिल किया। वर्ष 1980 के लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी ने सरला चौधरी को चायल सुरक्षित से टिकट दिया था। लेकिन वह तीसरे स्थान पर रही। इसके बाद 1984, 1989 के चुनाव में किसी राजनैतिक दल ने महिला प्रत्याशी पर भरोसा नहीं किया। वर्ष 1991 के चुनाव में भाजपा ने मंजू चंद्रा पर दांव लगाया। उस दौरान देश में जनता दल की लहर चल रही थी। नतीजतन मंजू चंद्रा चुनाव हार गईं। यहां जनता दल के शशि प्रकाश सांसद चुने गए थे। 1996 के चुनाव में राम मंदिर लहर थी। लेकिन इस चुनाव में भाजपा ने मंजू चंद्रा पर दांव लगाने की जहमत नहीं उठाई। चुनाव में मंजू चंद्रा की जगह अमृत लाल भारती प्रत्याशी बनाए गए।
इस चुनाव में 24 प्रत्याशी तो थे लेकिन महिला उम्मीदवार एक भी नहीं थी। वर्ष 1998, 1999, 2004, 2009 के चुनाव में किसी भी राजनैतिक दल ने महिला प्रत्याशी को तरजीह नहीं दी। वर्ष 2014 के चुनाव में राष्ट्रीय समानता दल ने मालती देवी, निर्दल बीनारानी आम आदमी पार्टी से स्वर्ण लता कुसुम चुनाव मैदान में थीं। इस चुनाव में भाजपा के विनोद सोनकर निर्वाचित हुए। अब 17 वीं लोकसभा के चुनाव के लिए 22 लोगों ने नामांकन किया था। शनिवार को नामांकन पत्रों की जांच के बाद अयोग्य मिलने पर दस पर्चे खारिज कर दिए गए। इन दस उम्मीदवारों में अन्नदाता पार्टी से चुनाव मैदान में उतरी लीलावती और निर्दलीय ओम दुर्गा शक्ति का नामांकन शामिल हैं। ऐसे में अब संसदीय सीट से मौजूदा समय चुनाव में उतरे 12 प्रत्याशियों में एक भी महिला प्रत्याशी नहीं बची हैं।
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वर्ष 1952, 1957, 1962, 1967, 1971, 1977 के चुनावों के दौरान किसी सियासी दल ने आधी आबादी पर भरोसा नहीं दिखाया। महिलाओं ने यहां निर्दल के तौर पर भी अपना नामांकन नहीं दाखिल किया। वर्ष 1980 के लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी ने सरला चौधरी को चायल सुरक्षित से टिकट दिया था। लेकिन वह तीसरे स्थान पर रही। इसके बाद 1984, 1989 के चुनाव में किसी राजनैतिक दल ने महिला प्रत्याशी पर भरोसा नहीं किया। वर्ष 1991 के चुनाव में भाजपा ने मंजू चंद्रा पर दांव लगाया। उस दौरान देश में जनता दल की लहर चल रही थी। नतीजतन मंजू चंद्रा चुनाव हार गईं। यहां जनता दल के शशि प्रकाश सांसद चुने गए थे। 1996 के चुनाव में राम मंदिर लहर थी। लेकिन इस चुनाव में भाजपा ने मंजू चंद्रा पर दांव लगाने की जहमत नहीं उठाई। चुनाव में मंजू चंद्रा की जगह अमृत लाल भारती प्रत्याशी बनाए गए।
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इस चुनाव में 24 प्रत्याशी तो थे लेकिन महिला उम्मीदवार एक भी नहीं थी। वर्ष 1998, 1999, 2004, 2009 के चुनाव में किसी भी राजनैतिक दल ने महिला प्रत्याशी को तरजीह नहीं दी। वर्ष 2014 के चुनाव में राष्ट्रीय समानता दल ने मालती देवी, निर्दल बीनारानी आम आदमी पार्टी से स्वर्ण लता कुसुम चुनाव मैदान में थीं। इस चुनाव में भाजपा के विनोद सोनकर निर्वाचित हुए। अब 17 वीं लोकसभा के चुनाव के लिए 22 लोगों ने नामांकन किया था। शनिवार को नामांकन पत्रों की जांच के बाद अयोग्य मिलने पर दस पर्चे खारिज कर दिए गए। इन दस उम्मीदवारों में अन्नदाता पार्टी से चुनाव मैदान में उतरी लीलावती और निर्दलीय ओम दुर्गा शक्ति का नामांकन शामिल हैं। ऐसे में अब संसदीय सीट से मौजूदा समय चुनाव में उतरे 12 प्रत्याशियों में एक भी महिला प्रत्याशी नहीं बची हैं।
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