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‘नेटवर्क’ के खतरे में जीवन का ‘बीमा’
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Tue, 06 Dec 2016 12:21 AM IST
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डाकघर से ‘डाक जीवन बीमा’ लोगों ने हाथों हाथ खरीदा है। करारी डाक घर से नोटबंदी के पहले तीन सौ बीमा लोगों ने अपने परिजनों का कराया था। तीन पॉलिसी जमा करने के बाद इसका क्लेम लोगों को मिलना है। एक-एक किस्त जमा हुई, इसके बाद डाकघर का नेटवर्क फेल हो गया। इसकी किस्त ऑनलाइन ही जमा होती है। किस्त जमा न होने से लोग परेशान हैं। उन्हें अब खतरा महसूस होने लगा है कि यदि नेटवर्क की यही समस्या बनी रही तो बीमा का क्लेम उन्हें कैसे मिलेगा?
करारी डाकघर में डाक जीवन बीमा नाम की एक पॉलिसी को लोगों ने खरीद रखा है। इसमें करारी कस्बे के 35 लोग हैं। इनके अलावा क्षेत्र के अन्य लोगों ने भी पॉलिसी खरीदी है। कुल 300 लोगों ने यह पॉलिसी खरीदी है। पहली किस्त जमा करने के बाद लोगों को सामने नेटवर्क की समस्या खड़ी हो गई। पुरानी ऑफिस से जब डाकघर नए ऑफिस में गया तो भी नेटवर्क की समस्या से लोगों को निजात नहीं मिली। अभी तक यह सर्वर नहीं आया है।
इस पॉलिसी की सारी किस्तें ऑनलाइन ही जमा होती है। लोगाें के पास रुपया तो है, लेकिन सर्वर न होने की वजह से वह ऑनलाइन जमा नहीं कर पा रहे हैं। कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने इलाहाबाद से अपनी किस्त जमा कर ली है, लेकिन अधिकांश लोगों की किस्त अभी भी जमा होनी है। तीन पॉलिसी जमा होने के बाद ही वह क्लेम की स्थिति में आते हैं। इनमें से 35 फीसदी ऐसे बीमाधारक हैं, जिनकी पहली अथवा दूसरी ही किस्त जमा है, ऐसे लोग बीमा को लेकर हलाकान हैं। उन्हें अपना बीमा खतरे में दिखाई दे रहा है। बीमाधारक रामलौटन, संजीत मोदनवाल, सुदामा, राकेश वर्मा, शारधा साहू आदि का कहना है कि वह किस्त जमा करने के लिए परेशान हैं। इसके लिए पूरा प्रयास भी कर रहे हैं, लेकिन डाकघर के जिम्मेदार उनकी किस्त नगद नहीं जमा कर रहे हैं।
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सीबीएस नहीं हो सका करारी डाकघर
करारी डाकघर अभी तक सीबीएस नहीं हो सका है। इससे लोगों को किसान विकास पत्र, एनएससी आदि नहीं दी जा रही है। इसके लिए लगातार डाकघर के अधिकारियों से बातचीत की जा रही है। इसके बाद भी डाकघर को सीबीएस नहीं किया गया है। राष्ट्रीयकृत बैंक प्रणाली से न जोड़े जाने के कारण ग्राहकों का यहां से ऑनलाइन लेन-देन भी नहीं हो पा रहा है।
पोस्ट मास्टर छोटेलाल प्रजापति का कहना है कि नेटवर्क न होने के कारण सीफी मशीन नहीं चल रही है। इससे लोगों की आनलाइन किस्त नहीं जमा हो पा रही है। इसके अलावा अभी तक डाकघर को सीबीएस का दर्जा नहीं मिला। इससे अन्य काम भी बाधित चल रहे हैं। जल्द ही यह सारी व्यवस्था हो जाएंगी।
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करारी डाकघर में डाक जीवन बीमा नाम की एक पॉलिसी को लोगों ने खरीद रखा है। इसमें करारी कस्बे के 35 लोग हैं। इनके अलावा क्षेत्र के अन्य लोगों ने भी पॉलिसी खरीदी है। कुल 300 लोगों ने यह पॉलिसी खरीदी है। पहली किस्त जमा करने के बाद लोगों को सामने नेटवर्क की समस्या खड़ी हो गई। पुरानी ऑफिस से जब डाकघर नए ऑफिस में गया तो भी नेटवर्क की समस्या से लोगों को निजात नहीं मिली। अभी तक यह सर्वर नहीं आया है।
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इस पॉलिसी की सारी किस्तें ऑनलाइन ही जमा होती है। लोगाें के पास रुपया तो है, लेकिन सर्वर न होने की वजह से वह ऑनलाइन जमा नहीं कर पा रहे हैं। कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने इलाहाबाद से अपनी किस्त जमा कर ली है, लेकिन अधिकांश लोगों की किस्त अभी भी जमा होनी है। तीन पॉलिसी जमा होने के बाद ही वह क्लेम की स्थिति में आते हैं। इनमें से 35 फीसदी ऐसे बीमाधारक हैं, जिनकी पहली अथवा दूसरी ही किस्त जमा है, ऐसे लोग बीमा को लेकर हलाकान हैं। उन्हें अपना बीमा खतरे में दिखाई दे रहा है। बीमाधारक रामलौटन, संजीत मोदनवाल, सुदामा, राकेश वर्मा, शारधा साहू आदि का कहना है कि वह किस्त जमा करने के लिए परेशान हैं। इसके लिए पूरा प्रयास भी कर रहे हैं, लेकिन डाकघर के जिम्मेदार उनकी किस्त नगद नहीं जमा कर रहे हैं।
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सीबीएस नहीं हो सका करारी डाकघर
करारी डाकघर अभी तक सीबीएस नहीं हो सका है। इससे लोगों को किसान विकास पत्र, एनएससी आदि नहीं दी जा रही है। इसके लिए लगातार डाकघर के अधिकारियों से बातचीत की जा रही है। इसके बाद भी डाकघर को सीबीएस नहीं किया गया है। राष्ट्रीयकृत बैंक प्रणाली से न जोड़े जाने के कारण ग्राहकों का यहां से ऑनलाइन लेन-देन भी नहीं हो पा रहा है।
पोस्ट मास्टर छोटेलाल प्रजापति का कहना है कि नेटवर्क न होने के कारण सीफी मशीन नहीं चल रही है। इससे लोगों की आनलाइन किस्त नहीं जमा हो पा रही है। इसके अलावा अभी तक डाकघर को सीबीएस का दर्जा नहीं मिला। इससे अन्य काम भी बाधित चल रहे हैं। जल्द ही यह सारी व्यवस्था हो जाएंगी।