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घर-घर बिराजीं मां भवानी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Fri, 22 Sep 2017 02:06 AM IST
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शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा को भक्तों ने अपने घरों में कलश स्थापना कर मां भगवती का विधिवत पूजन शुरू किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुरोहितों ने पूजा पंडालों में पहुंचकर कलश स्थापित कराया। इसी के साथ भक्तों ने नौ दिन के व्रत की शुरुआत की। उधर, दिन भर चले पूजन-अर्चन के बाद पूजा पंडाल देर रात तक भक्तिगीतों से गुलजार रहे। प्रतिपदा के दिन से ही पूरा दोआबा मां भगवती की भक्ति में सराबोर नजर आया।
नवरात्रि पर्व को लेकर जिले में तैयारियों जोरों पर थीं। बृहस्पतिवार सुबह भक्तों ने पंचांग के निर्धारित समयानुसार अपने-अपने घरों में पुरोहित को बुलाकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश स्थापना कराई। नव दुर्गा पूजा पंडालों में कमेटियों द्वारा मूर्ति स्थापित कराने के बाद पूजन-अर्चन शुरू किया गया। इसी के साथ भक्तों ने नौ दिवसीय व्रत की शुरुआत की। दूसरी ओर गांवों और कस्बों के पूजा पंडालों में स्थापित की गई मां अंबे की आकर्षक मूर्तियों को देखने के लिए दिन भर भक्तों का तांता लगा रहा। शाम को सात बजते ही बिजली की रोशनी से जगमगा रहे पूजा पंडालों में भक्तों की भीड़ जुटने लगी। इस दौरान भक्तिगीतों का कार्यक्रम स्थानीय कलाकारों और महिलाओं द्वारा देर रात तक किया गया। प्रतिपदा को कलश और मूर्ति स्थापना के बाद पूरा दोआबा मां अंबे की भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। सुबह से देर रात तक गांव और कस्बे मां भगवती के जयकारों से गुंजायमान रहे।
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नवरात्रि पर्व को लेकर जिले में तैयारियों जोरों पर थीं। बृहस्पतिवार सुबह भक्तों ने पंचांग के निर्धारित समयानुसार अपने-अपने घरों में पुरोहित को बुलाकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश स्थापना कराई। नव दुर्गा पूजा पंडालों में कमेटियों द्वारा मूर्ति स्थापित कराने के बाद पूजन-अर्चन शुरू किया गया। इसी के साथ भक्तों ने नौ दिवसीय व्रत की शुरुआत की। दूसरी ओर गांवों और कस्बों के पूजा पंडालों में स्थापित की गई मां अंबे की आकर्षक मूर्तियों को देखने के लिए दिन भर भक्तों का तांता लगा रहा। शाम को सात बजते ही बिजली की रोशनी से जगमगा रहे पूजा पंडालों में भक्तों की भीड़ जुटने लगी। इस दौरान भक्तिगीतों का कार्यक्रम स्थानीय कलाकारों और महिलाओं द्वारा देर रात तक किया गया। प्रतिपदा को कलश और मूर्ति स्थापना के बाद पूरा दोआबा मां अंबे की भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। सुबह से देर रात तक गांव और कस्बे मां भगवती के जयकारों से गुंजायमान रहे।
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