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मेरे भैया, मेरे चंदा, मेरे अनमोल रतन
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Sun, 30 Aug 2015 01:07 AM IST
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मंझनपुर। भाई-बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन शनिवार को जिले में धूमधाम से मनाया गया। राखी की खुशी में चहकती बहनों ने इस दौरान भाई की आरती उतारी, माथे पर मंगल टीका लगाया। फिर कलाई में रेशम की डोर (राखी) बांधकर उनकी खुशहाली की कामना की। भाईयों ने भी उन्हें तोहफे दिए। साथ ही बहनों के हर सुख-दुख में उनके साथ रहने का वादा किया।
सावन पूर्णिमा पर भाई-बहन के प्रेम का पर्व रक्षाबंधन मनाया जाता है। इस साल राखी का यह त्यौहार शनिवार को मनाया गया। रक्षाबंधन की चहल-पहल तो सुबह से ही दिखने लगी थी। पर, राखी बांधने का शुभमुर्हुत दोपहर बाद होने के कारण इसमें तेजी आई। बहनों ने पूजा की थाल सजाकर भाईयों की आरती उतारी। उनके माथे में हल्दी, कुमकुम और अक्षत का मंगल टीका लगाया। राखी बांधकर मुंह मीठा कराया।
फिर उनसे तोहफे लेकर उनके जीवन में सभी खुशियां आने की कामना की। भाईयों ने भी बहनों के हर दुख-सुख में साथ रहने का वादा किया। वहीं राखी पर दिनभर बाजारों में भी चहल-पहल दिखी। मंझनपुर, सिराथू, चायल, अजुहा, कड़ा, देवीगंज, भरवारी, करारी, मूरतगंज, सरायअकिल, मनौरी, पुरामुफ्ती, पश्चिमशरीरा समेत सभी बाजारों में मिठाई और राखी की दुकान पर तो दिनभर खरीददारों की भीड़ रही। वहीं रक्षाबंधन पर पुरोहितों ने भी यजमानों के घर पहुंचकर रक्षासूत्र बांधा।
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रक्षाबंधन पर्व पर भोर से लेकर दोपहर तक कौशाम्बी के कुछ इलाके में बारिश होती रही। बरसात की रिमझिम फुहारें भी कोई असर भाई-बहन के स्नेह के रास्ते में कोई रोड़ा नहीं अटका सकी। सुबह तमाम बहनें ससुराल से भीगती हुई जहां भाई को राखी बांधने मायके आई। वहीं जिनकी बहनें किसी कारणवश घर नहीं आ सकी। वे भाई भी राखी बंधवाने के लिए बहन के ससुराल गए।
श्रावणी पूर्णिमा पर मौसम खराब होने के बाद भी गंगा के कुबरी, कड़ा, कालेश्वर, संदीपनि आदि घाटों पर स्नानार्थियों की भीड़ रही। लोगों ने गंगा में डुबकी लगाकर मां गंगे की पूजा-अर्चना की। वहीं कुबरी घाट पर गंगा स्नान करने वालों ने मां शीतला के दरबार में भी हाजिरी लगाई। गंगाघाटों पर स्नानार्थियों की सुरक्षा के सारे इंतजाम नदारत थे। घाट पर बैरिकेटिंग, नाव, गोताखोर और पुलिस कुछ भी नहीं रही।
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सावन पूर्णिमा पर भाई-बहन के प्रेम का पर्व रक्षाबंधन मनाया जाता है। इस साल राखी का यह त्यौहार शनिवार को मनाया गया। रक्षाबंधन की चहल-पहल तो सुबह से ही दिखने लगी थी। पर, राखी बांधने का शुभमुर्हुत दोपहर बाद होने के कारण इसमें तेजी आई। बहनों ने पूजा की थाल सजाकर भाईयों की आरती उतारी। उनके माथे में हल्दी, कुमकुम और अक्षत का मंगल टीका लगाया। राखी बांधकर मुंह मीठा कराया।
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फिर उनसे तोहफे लेकर उनके जीवन में सभी खुशियां आने की कामना की। भाईयों ने भी बहनों के हर दुख-सुख में साथ रहने का वादा किया। वहीं राखी पर दिनभर बाजारों में भी चहल-पहल दिखी। मंझनपुर, सिराथू, चायल, अजुहा, कड़ा, देवीगंज, भरवारी, करारी, मूरतगंज, सरायअकिल, मनौरी, पुरामुफ्ती, पश्चिमशरीरा समेत सभी बाजारों में मिठाई और राखी की दुकान पर तो दिनभर खरीददारों की भीड़ रही। वहीं रक्षाबंधन पर पुरोहितों ने भी यजमानों के घर पहुंचकर रक्षासूत्र बांधा।
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रक्षाबंधन पर्व पर भोर से लेकर दोपहर तक कौशाम्बी के कुछ इलाके में बारिश होती रही। बरसात की रिमझिम फुहारें भी कोई असर भाई-बहन के स्नेह के रास्ते में कोई रोड़ा नहीं अटका सकी। सुबह तमाम बहनें ससुराल से भीगती हुई जहां भाई को राखी बांधने मायके आई। वहीं जिनकी बहनें किसी कारणवश घर नहीं आ सकी। वे भाई भी राखी बंधवाने के लिए बहन के ससुराल गए।
श्रावणी पूर्णिमा पर मौसम खराब होने के बाद भी गंगा के कुबरी, कड़ा, कालेश्वर, संदीपनि आदि घाटों पर स्नानार्थियों की भीड़ रही। लोगों ने गंगा में डुबकी लगाकर मां गंगे की पूजा-अर्चना की। वहीं कुबरी घाट पर गंगा स्नान करने वालों ने मां शीतला के दरबार में भी हाजिरी लगाई। गंगाघाटों पर स्नानार्थियों की सुरक्षा के सारे इंतजाम नदारत थे। घाट पर बैरिकेटिंग, नाव, गोताखोर और पुलिस कुछ भी नहीं रही।