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सपा में भितरघातियों के लिए मिशन क्लीन शुरू
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विधानसभा चुनाव का सेमी फाइनल माने जा रहे जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर मिली हार के बाद समाजवादी पार्टी अब भितरघातियों के सफाए में जुट गई है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के निर्देश के बाद चुनाव में भितरघात करने वालों की सूची तैयार की जा रही है। इस सूची में पार्टी के महासचिव से लेकर पूर्व जिलाध्यक्ष व विधानसभा प्रत्याशी रहे कुछ लोगों के नाम शामिल हैं। माना जा रहा है कि हाईकमान कोर कमेटी से सूची की हकीकत खंगलवाने के बाद इनको पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाएगा।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव सपा ऐन मौके पर हार गई। पार्टी प्रत्याशी के पास 16 सदस्य होने के दावे किए जा रहे थे। ये सभी सदस्य प्रत्याशी के साथ छत्तीसगढ़ में ठहरे थे। इसके अलावा यह भी दावा किया जा रहा था कि भाजपा खेमे के कुछ सदस्य भी पार्टी के हक में क्रास वोटिंग कर सकते हैं। चुनाव के दिन भी सपा प्रत्याशी के साथ पहले एकमुश्त 12 और फिर चार सदस्य मतदान करने के लिए गए।
इसके बाद भी पार्टी समर्थित प्रत्याशी को महज 11 मत ही हासिल हुए। एक मत अवैध करार दिया गया। इसके बावजूद सपा प्रत्याशी विजमा देवी दो मतों से चुनाव हार गईं। चुनाव में शिकस्त मिलने के बाद पार्टी ने मंथन शुरू कर दिया है। पार्टी ने सबसे पहले जिला पंचायत सदस्य रहे शेर मोहम्मद को बाहर का रास्ता दिखाया।
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अब पार्टी के महासचिव, एक निर्वतमान ब्लॉक प्रमुख, एक पूर्व अध्यक्ष व पूर्व में सपा के टिकट से चुनाव लड़ चुके कुछ प्रत्याशियों की सूची तैयार की गई है। पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ बगावत करके भाजपा का समर्थन किया। कई सदस्यों को भी उन्होंने भाजपा के पाले में किया।
माना जा रहा है कि जल्द ही इस सूची पर सपा की कोर कमेटी जांच करेगी। बताया जा रहा है कि जांच के बाद सभी भितरघातियों को सपा से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। सपा जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव का कहना है कि पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने जिले में सपा की हार को गंभीरता से लिया है। सपा के अंदर भितरघात करने वाले पदाधिकारियों को चिन्हित कर लिया गया है। जल्द ही सूची राष्ट्रीय अध्यक्ष को सौंप दी जाएगी।
सपा में कलह, फिर मुखर हुई गुटबाजी
जिला पंचायत चुनाव में करारी शिकस्त के बाद समाजवादी पार्टी में कलह शुरू हो गई है। पार्टी का एक धड़ा इस हार के लिए जिला इकाई को जिम्मेदार मान रहा है। इसी के साथ पार्टी में गुटबाजी तेज हो गई है।
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में मतदान से पहले तक सपा की स्थिति बेहद मजबूत थी। बहुमत के जादुई आंकड़े से ज्यादा सदस्य पार्टी के समर्थन में थे।
इसके बावजूद शनिवार को हुए चुनाव में पार्टी प्रत्याशी दो मतों से हार गईं। चुनावी नतीजे आने के बाद सपाइयों में अंतर कलह शुरू हो गई है। संगठन के लोग एक-दूसरे पर हार का ठीकरा फोड़ रहे हैं। एक धड़ा जहां संगठन के कई जिम्मेदारों पर चुनावी परिदृश्य से गायब होने का आरोप लगा रहा है, साथ ही इन्हें ही पराजय का कारण मान रहा है,
वहीं दूसरे गुट का कहना है कि पार्टी के कुछ प्रमुख चेहरों ने साथ रहकर विभीषण की भूमिका निभाई।
एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। अब पार्टी हाईकमान के निर्देश पर जिला इकाई पराजय के कारणों की समीक्षा करने में जुट गई है। जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव का कहना है कि सात जुलाई को संगठन अपनी रिपोर्ट पार्टी मुखिया को सौंप देगा।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव सपा ऐन मौके पर हार गई। पार्टी प्रत्याशी के पास 16 सदस्य होने के दावे किए जा रहे थे। ये सभी सदस्य प्रत्याशी के साथ छत्तीसगढ़ में ठहरे थे। इसके अलावा यह भी दावा किया जा रहा था कि भाजपा खेमे के कुछ सदस्य भी पार्टी के हक में क्रास वोटिंग कर सकते हैं। चुनाव के दिन भी सपा प्रत्याशी के साथ पहले एकमुश्त 12 और फिर चार सदस्य मतदान करने के लिए गए।
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इसके बाद भी पार्टी समर्थित प्रत्याशी को महज 11 मत ही हासिल हुए। एक मत अवैध करार दिया गया। इसके बावजूद सपा प्रत्याशी विजमा देवी दो मतों से चुनाव हार गईं। चुनाव में शिकस्त मिलने के बाद पार्टी ने मंथन शुरू कर दिया है। पार्टी ने सबसे पहले जिला पंचायत सदस्य रहे शेर मोहम्मद को बाहर का रास्ता दिखाया।
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अब पार्टी के महासचिव, एक निर्वतमान ब्लॉक प्रमुख, एक पूर्व अध्यक्ष व पूर्व में सपा के टिकट से चुनाव लड़ चुके कुछ प्रत्याशियों की सूची तैयार की गई है। पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ बगावत करके भाजपा का समर्थन किया। कई सदस्यों को भी उन्होंने भाजपा के पाले में किया।
माना जा रहा है कि जल्द ही इस सूची पर सपा की कोर कमेटी जांच करेगी। बताया जा रहा है कि जांच के बाद सभी भितरघातियों को सपा से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। सपा जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव का कहना है कि पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने जिले में सपा की हार को गंभीरता से लिया है। सपा के अंदर भितरघात करने वाले पदाधिकारियों को चिन्हित कर लिया गया है। जल्द ही सूची राष्ट्रीय अध्यक्ष को सौंप दी जाएगी।
सपा में कलह, फिर मुखर हुई गुटबाजी
जिला पंचायत चुनाव में करारी शिकस्त के बाद समाजवादी पार्टी में कलह शुरू हो गई है। पार्टी का एक धड़ा इस हार के लिए जिला इकाई को जिम्मेदार मान रहा है। इसी के साथ पार्टी में गुटबाजी तेज हो गई है।
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में मतदान से पहले तक सपा की स्थिति बेहद मजबूत थी। बहुमत के जादुई आंकड़े से ज्यादा सदस्य पार्टी के समर्थन में थे।
इसके बावजूद शनिवार को हुए चुनाव में पार्टी प्रत्याशी दो मतों से हार गईं। चुनावी नतीजे आने के बाद सपाइयों में अंतर कलह शुरू हो गई है। संगठन के लोग एक-दूसरे पर हार का ठीकरा फोड़ रहे हैं। एक धड़ा जहां संगठन के कई जिम्मेदारों पर चुनावी परिदृश्य से गायब होने का आरोप लगा रहा है, साथ ही इन्हें ही पराजय का कारण मान रहा है,
वहीं दूसरे गुट का कहना है कि पार्टी के कुछ प्रमुख चेहरों ने साथ रहकर विभीषण की भूमिका निभाई।
एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। अब पार्टी हाईकमान के निर्देश पर जिला इकाई पराजय के कारणों की समीक्षा करने में जुट गई है। जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव का कहना है कि सात जुलाई को संगठन अपनी रिपोर्ट पार्टी मुखिया को सौंप देगा।