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इस बार आम आदमी से दूर हूआ इलाहाबादी अमरूद
Mon, 31 Dec 2018 12:47 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Mon, 31 Dec 2018 12:47 AM IST
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अमरूद
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अपने स्वाद और खुशबू के दम पर देश-प्रदेश में डंका बजाने वाले इलाहाबादी (कौशाम्बी) अमरूद पर इस बार मौसम की मार पड़ गई है। उत्पादन में 50 फीसदी तक की गिरावट आ गई है। इसकी भरपाई के लिए बागवानों ने कीमत दो गुनी कर दी है। बाजार में इस वक्त उत्तम गुणवत्ता का सुर्खा अमरूद 50 रुपये किलो से ऊपर पहुंच गया है।
रंग स्वाद और खुबसूरती में कौशाम्बी के अमरूद की अपनी अलग पहचान है। यहां के चायल, नेवादा, मूरतगंज और मंझनपुर ब्लॉक के विभिन्न गांवों में तकरीबन ढाई हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में इसकी बागवानी होती है। जिले में यूं तो अमरूद की सफेदा, सुर्खा, नरमा, चरखा और पट्ठा वेरायटी का उत्पादन किया जाता है। पर, सुर्खा की बात ही कुछ अलग है। बिलकुल सेब की तरह दिखने वाले इस वैरायटी की डिमांड देश-प्रदेश के विभिन्न हिसों में होती है। पर, इस मर्तबा मई-जून में अधिक गर्मी पड़ने के कारण पेड़ों पर ही फूल झुलसकर झर गए थे। इस वजह से अमरूद के रंग और स्वाद में बड़ा फर्क पड़ा है। उद्यान निरीक्षक इंद्रमणि यादव का कहना है कि इस बार उत्पादन आधा हो गया है। इसी वजह से इसकी कीमतों में भारी उछाल आ गया है। पिछले साल फुटकर में 30-35 रुपये किलो बिकने वाला सुर्खा अमरूद इस बार 50 या फिर इससे ऊपर बिक रहा है। इसी तरह से सफेदा भी 30 रुपये किलो बिक रहा है।
30 से 35 कुंतल में सिमटी पैदावार
अमरूद के बाग में बाधा रहित पैदावार 70 से 75 कुंतल प्रति हेक्टेयर होती है। लेकिन इस साल यह पैदावार 30 से 35 कुंतल में सिमट कर रह गई है। केसरिया निवासी बागवान रामराज की मानें तो मौसम मुफीद नहीं होने से इस बार उत्पादन कमजोर हुआ है।
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रोजाना 50 टन होता है निर्यात
कौशाम्बी जिले के मूरतगंज, सैयद सरावां, सैनी, करारी, सरायअकिल आदि स्थानों से रोजाना तकरीबन 50 टन अमरूद निर्यात किया जाता है। बागवान असलम ने बताया कि इन स्थानों से अमरूद डीसीएम में लोड कर प्रदेश के प्रयागराज, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, वाराणसी, गोरखपुर के अलावा पंजाब, दिल्ली, पटना, टाटानगर, झारखंड, आदि प्रांतों के लिए भेजा जाता है।
कुंभ मेले में और बढ़ सकते हैं दाम
पड़ोसी जनपद प्रयागराज में पखवाड़े भर बाद कुंभ मेला है। इसमें देश-दुनिया के करोड़ों लोग हिस्सा लेने आएंगे। ऐसे में कौशाम्बी (इलाहाबादी) अमरूद की खपत बढ़ना लाजिमी है। कारोबारियों को उम्मीद है कि कुंभ मेले के दौरान अमरूद के दाम सौ रुपये किलो तक पहुंच सकते हैं।
कौशाम्बी के अमरूद की देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में खासी डिमांड रहती है। इस बार उत्पादन में गिरावट से कीमतें बढ़ी हैं। कुंभ मेले में यहां के अमरूद की ब्रांडिंग की जाएगी।
सुरेंद्र राम भाष्कर-डीएचओ
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रंग स्वाद और खुबसूरती में कौशाम्बी के अमरूद की अपनी अलग पहचान है। यहां के चायल, नेवादा, मूरतगंज और मंझनपुर ब्लॉक के विभिन्न गांवों में तकरीबन ढाई हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में इसकी बागवानी होती है। जिले में यूं तो अमरूद की सफेदा, सुर्खा, नरमा, चरखा और पट्ठा वेरायटी का उत्पादन किया जाता है। पर, सुर्खा की बात ही कुछ अलग है। बिलकुल सेब की तरह दिखने वाले इस वैरायटी की डिमांड देश-प्रदेश के विभिन्न हिसों में होती है। पर, इस मर्तबा मई-जून में अधिक गर्मी पड़ने के कारण पेड़ों पर ही फूल झुलसकर झर गए थे। इस वजह से अमरूद के रंग और स्वाद में बड़ा फर्क पड़ा है। उद्यान निरीक्षक इंद्रमणि यादव का कहना है कि इस बार उत्पादन आधा हो गया है। इसी वजह से इसकी कीमतों में भारी उछाल आ गया है। पिछले साल फुटकर में 30-35 रुपये किलो बिकने वाला सुर्खा अमरूद इस बार 50 या फिर इससे ऊपर बिक रहा है। इसी तरह से सफेदा भी 30 रुपये किलो बिक रहा है।
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30 से 35 कुंतल में सिमटी पैदावार
अमरूद के बाग में बाधा रहित पैदावार 70 से 75 कुंतल प्रति हेक्टेयर होती है। लेकिन इस साल यह पैदावार 30 से 35 कुंतल में सिमट कर रह गई है। केसरिया निवासी बागवान रामराज की मानें तो मौसम मुफीद नहीं होने से इस बार उत्पादन कमजोर हुआ है।
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रोजाना 50 टन होता है निर्यात
कौशाम्बी जिले के मूरतगंज, सैयद सरावां, सैनी, करारी, सरायअकिल आदि स्थानों से रोजाना तकरीबन 50 टन अमरूद निर्यात किया जाता है। बागवान असलम ने बताया कि इन स्थानों से अमरूद डीसीएम में लोड कर प्रदेश के प्रयागराज, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, वाराणसी, गोरखपुर के अलावा पंजाब, दिल्ली, पटना, टाटानगर, झारखंड, आदि प्रांतों के लिए भेजा जाता है।
कुंभ मेले में और बढ़ सकते हैं दाम
पड़ोसी जनपद प्रयागराज में पखवाड़े भर बाद कुंभ मेला है। इसमें देश-दुनिया के करोड़ों लोग हिस्सा लेने आएंगे। ऐसे में कौशाम्बी (इलाहाबादी) अमरूद की खपत बढ़ना लाजिमी है। कारोबारियों को उम्मीद है कि कुंभ मेले के दौरान अमरूद के दाम सौ रुपये किलो तक पहुंच सकते हैं।
कौशाम्बी के अमरूद की देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में खासी डिमांड रहती है। इस बार उत्पादन में गिरावट से कीमतें बढ़ी हैं। कुंभ मेले में यहां के अमरूद की ब्रांडिंग की जाएगी।
सुरेंद्र राम भाष्कर-डीएचओ