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हत्या के तीन आरोपी को आजीवन कारावास
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पिपरी कोतवाली के दरियापुर गांव में 18 साल पहले रंग खेलने को लेकर लाठी-डंडे व कुल्हाड़ी से वारकर की गई हत्या के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी बीना नारायण की अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी तीन सगे भाइयों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही तीनों दोषियों पर 15-15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
दरियापुर गांव में सात मार्च 2004 को रंग खेलने के विवाद में दशरथ लाल पटेल की वहीं के रहने वाले फूलचंद्र के बेटों ने गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक दशरथ के बेटे वीरेंद्र कुमार, राजेंद्र कुमार व सुरेंद्र अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए फूलचंद्र के बेटे अलगू, पलटू उर्फ लंगड़ा की तलाश कर रहे थे।
दूसरे दिन सुबह आठ बजे गांव के बाहर ईंट-भट्ठे के पास चंद्रहाश, फूलचंद्र व चिरकू छिपे दिखे। इस पर दशरथ के बेटे वीरेंद्र, राजेंद्र व सुरेंद्र ने घेराबंदी की। इस दौरान चंद्रहाश व फूलचंद्र मौका पाकर मौके से भाग गए। मौके पर मिले चिरकू को तीनों ने मिलकर लाठी-डंडों व कुल्हाड़ी से वारकर हत्या कर दी।
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मृतक चिरकू के पिता छेदीलाल ने तीनों के खिलाफ हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज कराया। विवेचना के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। मुकदमे की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी बीना नारायण की अदालत में चली। अभियोजन की तरफ से शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमार मौर्य व पंकज सोनकर ने गवाहों को परीक्षित कराकर सख्त सजा देने की मांग की। दोनों पक्षों की बहस व पत्रावली में मौजूद साक्ष्यों का परिशीलन के बाद मंगलवार को कोर्ट ने वीरेंद्र, राजेंद्र व सुरेंद्र को दोषी करार दिया। कोर्ट ने तीनों दोषियों को आजीवन कारावास और 15-15 हजार रुपये अर्थदंड की सुनाई।
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दरियापुर गांव में सात मार्च 2004 को रंग खेलने के विवाद में दशरथ लाल पटेल की वहीं के रहने वाले फूलचंद्र के बेटों ने गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक दशरथ के बेटे वीरेंद्र कुमार, राजेंद्र कुमार व सुरेंद्र अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए फूलचंद्र के बेटे अलगू, पलटू उर्फ लंगड़ा की तलाश कर रहे थे।
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दूसरे दिन सुबह आठ बजे गांव के बाहर ईंट-भट्ठे के पास चंद्रहाश, फूलचंद्र व चिरकू छिपे दिखे। इस पर दशरथ के बेटे वीरेंद्र, राजेंद्र व सुरेंद्र ने घेराबंदी की। इस दौरान चंद्रहाश व फूलचंद्र मौका पाकर मौके से भाग गए। मौके पर मिले चिरकू को तीनों ने मिलकर लाठी-डंडों व कुल्हाड़ी से वारकर हत्या कर दी।
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मृतक चिरकू के पिता छेदीलाल ने तीनों के खिलाफ हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज कराया। विवेचना के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। मुकदमे की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी बीना नारायण की अदालत में चली। अभियोजन की तरफ से शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमार मौर्य व पंकज सोनकर ने गवाहों को परीक्षित कराकर सख्त सजा देने की मांग की। दोनों पक्षों की बहस व पत्रावली में मौजूद साक्ष्यों का परिशीलन के बाद मंगलवार को कोर्ट ने वीरेंद्र, राजेंद्र व सुरेंद्र को दोषी करार दिया। कोर्ट ने तीनों दोषियों को आजीवन कारावास और 15-15 हजार रुपये अर्थदंड की सुनाई।