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धूल फांक रहा छह करोड़ की लागत से बना सीएचसी चायल
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kaushambi news
- फोटो : KAUSHAMBI
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चायल। स्थानीय कस्बे में छह साल पहले बनकर तैयार हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल बदहाल है। गड्ढे में भवन निर्माण से बारिस में जलभराव की समस्या को देखते हुए शासन ने कार्यदायी संस्था सीएनडीएस का 83 लाख रुपये रोक दिया। इसके चलते अस्पताल भवन का हस्तानांतरण नहीं किया जा रहा है। जबकि, शासन ने इस अस्पताल के नाम पर डॉक्टर सहित आठ स्टाफ की नियुक्ति भी कर दी है, लेकिन भवन हस्तानांतरण के अभाव में मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इलाकाई गरीबों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए वर्ष 2012 में शासन ने चायल कस्बे में छह करोड़ की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्वीकृत किया था। कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निमग ने वर्ष 2013 में भवन बनाकर तैयार भी कर दिया। पर, सड़क की सतह से भवन काफी नीचे होने के चलते बरसात के दिनों में जलभराव की समस्या को देखते हुए शासन ने कार्यदायी संस्था 83 लाख रुपये रोक दिया। इसके चलते कार्यदायी संस्था से स्वास्थ्य विभाग को भवन हस्तानांतरित नहीं किया जा सका। ऐसे में देखरेख और मरम्मत के अभाव में भवन जर्जर हो गया है। अब तो इस भवन को अराजकतत्वों ने अपना ठिकाना बना लिया है। भवन के अंदर अक्सर जुआरियों की फड़ सजती है। भवन की दीवारें टूट रही हैं, खिड़की दरवाजे निकाले जा रहे हैं। इसे लेकर कस्बावासियों में विभाग के प्रति आक्रोश है।
कार्यदायी संस्था को कई मर्तबा पत्राचार किया जा चुका है। इसके बाद भी संस्था भवन हस्तांतरित नहीं कर रही है। बगैर भवन के अस्पताल का संचालन भी नहीं किया जा सकता है।
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डॉ मुक्तेश द्विवेदी, प्रभारी चिकित्साधिकारी चायल
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इलाकाई गरीबों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए वर्ष 2012 में शासन ने चायल कस्बे में छह करोड़ की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्वीकृत किया था। कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निमग ने वर्ष 2013 में भवन बनाकर तैयार भी कर दिया। पर, सड़क की सतह से भवन काफी नीचे होने के चलते बरसात के दिनों में जलभराव की समस्या को देखते हुए शासन ने कार्यदायी संस्था 83 लाख रुपये रोक दिया। इसके चलते कार्यदायी संस्था से स्वास्थ्य विभाग को भवन हस्तानांतरित नहीं किया जा सका। ऐसे में देखरेख और मरम्मत के अभाव में भवन जर्जर हो गया है। अब तो इस भवन को अराजकतत्वों ने अपना ठिकाना बना लिया है। भवन के अंदर अक्सर जुआरियों की फड़ सजती है। भवन की दीवारें टूट रही हैं, खिड़की दरवाजे निकाले जा रहे हैं। इसे लेकर कस्बावासियों में विभाग के प्रति आक्रोश है।
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कार्यदायी संस्था को कई मर्तबा पत्राचार किया जा चुका है। इसके बाद भी संस्था भवन हस्तांतरित नहीं कर रही है। बगैर भवन के अस्पताल का संचालन भी नहीं किया जा सकता है।
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डॉ मुक्तेश द्विवेदी, प्रभारी चिकित्साधिकारी चायल