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आग से दो मकान, लाखों की गृहस्थी राख
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Thu, 31 Dec 2015 11:43 PM IST
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जलती ढिबरी गिरने से सिरसी गांव में लगी आग से दो किसान भाईयों के मकान जल गए। लपटों की जद में आने से बाइक, बर्तन, बिस्तर, खाद्यान्न समेत लाखों रुपये की गृहस्थी राख हो गई। आग से जलती हुई गृहस्थी बचाने के प्रयास में एक विवाहिता भी झुलस गई। घर से उठती लपटें और चीख-पुकार पर जुटे ग्रामीण करीब 3 घंटे तक जूझने के बाद आग पर काबू पा सके।
चरवा थाना क्षेत्र के सिरसी गांव निवासी नंदन पासी किसान है। बुधवार की रात करीब 10 बजे बिजली आने पर वह नलकूप से गेंहू की फसल सींचने के लिए पूरे परिवार के साथ खेत में था। घर में उसका सिर्फ 10 वर्षीय बेटा रवि सो रहा था। कमरे में बेटे के सोने के कारण नंदन की पत्नी ने कमरे में ढिबरी जला दी थी। वहीं रात करीब 11 बजे उसके घर में आग लग गई। तपिश से नींद टूटने पर रवि चीखते-चिल्लाते बाहर को भागा। उसकी चीखें सुनकर बगल में बने नंदन के छोटे भाई फूलचंद्र के साथ ही गांववाले दौड़े। उधर, जब तक ग्रामीण आग बुझाने का प्रयास करते।
बेकाबू लपटें नंदन के घर और गृहस्थी का राख करने के बाद फूलचंद्र के मकान को भी अपनी चपेट में ले लिया। घर में आग लगने पर फूलचंद्र की बहू मालती देवी जलती हुए सामान को बचाने का प्रयास करने लगी। इस दौरान वह भी झुलस गई। वहीं करीब तीन घंटे तक गांव के सैकड़ों लोग आग बुझाने में जुटे रहे। घंटों की मशक्कत के बाद ग्रामीण किसी तरह आग पर काबू पा सके। हालांकि जब तक ग्रामीण आग बुझाते। नंदन का घर और उसकी सारी गृहस्थी लपटों की भेंट चढ़ चुकी थी। आग से 5 कुंतल गेहूं, 15 कुंतल धान, बर्तन, बिस्तर, गहने, कपड़ों के अलावा 5 हजार रुपये नगदी और फूलचंद्र की बाइक आदि राख हो गया। आग कैसे लगी? इसकी सही जानकारी किसी को नहीं है। हालांकि माना जा रहा है कि जलती हुई ढिबरी गिरने से यह हादसा हुआ है।
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चरवा थाना क्षेत्र के सिरसी गांव निवासी नंदन पासी किसान है। बुधवार की रात करीब 10 बजे बिजली आने पर वह नलकूप से गेंहू की फसल सींचने के लिए पूरे परिवार के साथ खेत में था। घर में उसका सिर्फ 10 वर्षीय बेटा रवि सो रहा था। कमरे में बेटे के सोने के कारण नंदन की पत्नी ने कमरे में ढिबरी जला दी थी। वहीं रात करीब 11 बजे उसके घर में आग लग गई। तपिश से नींद टूटने पर रवि चीखते-चिल्लाते बाहर को भागा। उसकी चीखें सुनकर बगल में बने नंदन के छोटे भाई फूलचंद्र के साथ ही गांववाले दौड़े। उधर, जब तक ग्रामीण आग बुझाने का प्रयास करते।
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बेकाबू लपटें नंदन के घर और गृहस्थी का राख करने के बाद फूलचंद्र के मकान को भी अपनी चपेट में ले लिया। घर में आग लगने पर फूलचंद्र की बहू मालती देवी जलती हुए सामान को बचाने का प्रयास करने लगी। इस दौरान वह भी झुलस गई। वहीं करीब तीन घंटे तक गांव के सैकड़ों लोग आग बुझाने में जुटे रहे। घंटों की मशक्कत के बाद ग्रामीण किसी तरह आग पर काबू पा सके। हालांकि जब तक ग्रामीण आग बुझाते। नंदन का घर और उसकी सारी गृहस्थी लपटों की भेंट चढ़ चुकी थी। आग से 5 कुंतल गेहूं, 15 कुंतल धान, बर्तन, बिस्तर, गहने, कपड़ों के अलावा 5 हजार रुपये नगदी और फूलचंद्र की बाइक आदि राख हो गया। आग कैसे लगी? इसकी सही जानकारी किसी को नहीं है। हालांकि माना जा रहा है कि जलती हुई ढिबरी गिरने से यह हादसा हुआ है।
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