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डॉक्टरों की लापरवाही में गई नवजात की जान
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Sat, 11 Apr 2015 12:35 AM IST
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कड़ा (कौशाम्बी)। भगवान का दूसरा रूप कहे जाने वाले डॉक्टरों की लापरवाही से शुक्रवार को कड़ा के ताज मल्लाहन गांव के एक नवजात बच्चे की मौत हो गई। विवाहिता को शुक्रवार की सुबह ही प्रसव के लिए सीएचसी इस्माइलपुर में भर्ती कराया गया था। जुड़वा बच्चे पैदा होने के कुछ देर बाद ही उसे घर भेज दिया गया। आरोप है कि घर पहुंचते ही एक बच्चे की मौत हो गई। पीड़ित परिवार ने सीएचसी के डॉक्टरों की लापरवाही से बच्चे की मौत होने का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत सीएमओ से की है।
कड़ा ब्लाक के ताज मल्लाहन (महरानापर) गांव निवासी अमर सिंह ने बताया कि उसकी पत्नी प्रीति देवी (24) को शुक्रवार की सुबह करीब सात बजे प्रसव पीड़ा होने लगी थी। सुरक्षित प्रसव के लिए उसने पत्नी को लाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इस्माइलपुर में भर्ती कराया था। बताया कि सुबह करीब नौ बजे प्रीति ने जुड़वा बच्चे (एक लड़का और एक लड़की) को जन्म दिया। उसका कहना है कि बच्चों के जन्म लेने के करीब घंटेभर बाद ही प्रीति को अस्पताल से डिस्चार्ज करते हुए एंबुलेंस से घर भेज दिया गया।
घर पहुंचते ही एक नवजात बच्चे (बेटे) की तबीयत बिगड़ गई। उसने इसकी सूचना फोन आशा महिला स्वास्थ्य कार्यकत्री को देकर एंबुलेंस भेजने को कहा। आरोप है कि आशा कार्यकत्री ने एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं होने और किसी प्राइवेट वाहन से जच्चा-बच्चा को दुबारा किसी अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी और मोबाइल काट दिया। अमर सिंह का कहना है कि वह वाहन के इंतजाम को भटकता रहा।
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इस दौरान ही उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई। उसने बच्चे की मौत के लिए अस्पताल के डाक्टर और कर्मचारियों की लापरवाही को कसूरवार ठहराया है। साथ ही इसकी शिकायत सीएमओ से की है। सीएमओ डॉ. आरके मिश्रा ने बताया कि यदि प्रसव के तत्काल बाद जज्चा-बच्चा को डिस्चार्ज करके घर भेज दिया गया है, तो यह बड़ी लापरवाही है। क्योंकि प्रसव के 48 घंटे बाद जच्चा-बच्चा को अस्पताल से डिस्चार्ज करने का प्राविधान है। सीएमओ का कहना है कि शिकायत की जांच की जा रही है। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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कड़ा ब्लाक के ताज मल्लाहन (महरानापर) गांव निवासी अमर सिंह ने बताया कि उसकी पत्नी प्रीति देवी (24) को शुक्रवार की सुबह करीब सात बजे प्रसव पीड़ा होने लगी थी। सुरक्षित प्रसव के लिए उसने पत्नी को लाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इस्माइलपुर में भर्ती कराया था। बताया कि सुबह करीब नौ बजे प्रीति ने जुड़वा बच्चे (एक लड़का और एक लड़की) को जन्म दिया। उसका कहना है कि बच्चों के जन्म लेने के करीब घंटेभर बाद ही प्रीति को अस्पताल से डिस्चार्ज करते हुए एंबुलेंस से घर भेज दिया गया।
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घर पहुंचते ही एक नवजात बच्चे (बेटे) की तबीयत बिगड़ गई। उसने इसकी सूचना फोन आशा महिला स्वास्थ्य कार्यकत्री को देकर एंबुलेंस भेजने को कहा। आरोप है कि आशा कार्यकत्री ने एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं होने और किसी प्राइवेट वाहन से जच्चा-बच्चा को दुबारा किसी अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी और मोबाइल काट दिया। अमर सिंह का कहना है कि वह वाहन के इंतजाम को भटकता रहा।
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इस दौरान ही उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई। उसने बच्चे की मौत के लिए अस्पताल के डाक्टर और कर्मचारियों की लापरवाही को कसूरवार ठहराया है। साथ ही इसकी शिकायत सीएमओ से की है। सीएमओ डॉ. आरके मिश्रा ने बताया कि यदि प्रसव के तत्काल बाद जज्चा-बच्चा को डिस्चार्ज करके घर भेज दिया गया है, तो यह बड़ी लापरवाही है। क्योंकि प्रसव के 48 घंटे बाद जच्चा-बच्चा को अस्पताल से डिस्चार्ज करने का प्राविधान है। सीएमओ का कहना है कि शिकायत की जांच की जा रही है। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।