Kaushambi Blast : दो किमी दूर तक सुनाई दिए धमाके, लगा बम विस्फोट हो गया
हादसे में मारूफपुर अमहा गांव के रामभवन पटेल भी बुरी तरह झुलसे। एसआरएन अस्पताल पहुंची उनकी पत्नी सांवला देवी ने बताया कि उनके घर से फैक्ट्री करीब दो किमी की दूरी पर है। दोपहर में अचानक बहुत जोर की आवाज आई।
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कौशाम्बी के भरवारी में पटाखा फैक्ट्री में हुआ विस्फोट इतना जबरदस्त था कि इसके धमाकों की गूंज दो किमी दूर तक सुनाई दी। एसआरएन अस्पताल पहुंचे मरीजों के तीमारदारों और घटना के चश्मदीदों ने बताया कि ऐसा लगा मानो बम विस्फोट हो गया हो। हाल यह था कि दो किमी दूर स्थित गांव में भी घरों की खिड़कियां-दरवाजे तक हिलने लगे।
जोर की आवाज हुई और फैक्ट्री से निकला आग का गोला
हादसे में मारूफपुर अमहा गांव के रामभवन पटेल भी बुरी तरह झुलसे। एसआरएन अस्पताल पहुंची उनकी पत्नी सांवला देवी ने बताया कि उनके घर से फैक्ट्री करीब दो किमी की दूरी पर है। दोपहर में अचानक बहुत जोर की आवाज आई। लगा मानो बम फट गया हो। घरवालों के साथ वह बाहर निकली तो देखा कि जिस स्थान पर फैक्ट्री थी, उसके आसपास से आग का गोला निकलता दिखाई दिया। वह अन्य परिजनों संग भागकर पहुंची तो देखा कि वहां आग लगी है। बहुत से लोग झुलस गए थे जिनमें उसके पति भी शामिल थे। उनकी पीठ व सिर का पिछला हिस्सा बुरी तरह झुलस गया है।
मांस के चीथड़े बिखरे पड़े थे, चीख रहे थे लोग
घायलों में राकेश कुमार निवासी सगुनी कौशांबी भी शामिल रहे। एसआरएन पहुंचे उनके बेटे विपिन ने बताया कि पापा रोज सुबह खाना लेकर फैक्ट्री जाते थे। रविवार को सिलेंडर खत्म हो गया था, ऐसे में खाना देर से बना। वह घटना के कुछ देर पहले फैक्ट्री खाना देने गया था। वहां से लौटकर कुछ दूर ही पहुंचा था कि अचानक धमाके होने लगे। फैक्ट्री से आग की कई फिट ऊंची-ऊंची लपटें उठती दिखाई दीं। वह भागकर पहुंचा तो देखा कि मांस के चीथड़े बिखरे पड़े थे। साथ ही फैक्ट्री के भीतर से चीख पुकार की आवाज आ रही थी। कुछ देर बाद उसे उसके पिता भी बुरी तरह झुलसी हालत में मिले। इसके बाद उसके सूचना देने पर अन्य घरवाले आए और फिर उन्हें जिला अस्पताल और वहां से एसआरएन लाया गया।
दीवारों में आ गई दरारें
इस हादसे ने चमंधा निवासी मंजुला देवी को दोहरा जख्म दिया। घटना में न सिर्फ उनके पति हरिलाल बल्कि बेटा मुकेश भी बुरी तरह झुलसा। बेटे को एसआरएन लेकर वह अन्य परिजनों संग पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि ऐसा पहले कभी नहीं देखा। करीब दो घंटे तक रह-रहकर धमाके होते रहे। मौके की हालत ऐसी थी कि सब कुछ राख हो चुका था। उनके साथ आए परिवार के लोगों ने बताया कि धमाका इतना जबरदस्त था कि कई घरों की दीवारों में दरारें आ गईं। कई लोग फैक्ट्री के भीतर ही फंंसे थे और उनके घरवालों में चीखपुकार मची थी। मंजुला एसआरएन में बिलखती रहीं।
जोरदार धमाका हुआ और ढह गई दीवारें
हादसे में जख्मी कुल सात लोग एसआरएन अस्पताल पहुंचे और इनमें से 16 साल का मंगलदास ही ऐसा था जिसकी हालत खतरे से बाहर थी। वह फैक्ट्री में ही काम करता है और जिस वक्त घटना हुई, वह भी भीतर था। उसने बताया कि 11.30 के आसपास का वक्त था। सभी लोग अपने काम में व्यस्त थे। उसे गुटखा थूकना था तो वह बाहर की ओर जाने लगा। अचानक बहुत जोर का धमाका हुआ तो वह जान बचाकर भागा। हालांकि धमाका इतना तेज था कि दीवारें ढह गईं। इन्हीं में से एक दीवार की चपेट में वह आ गया और मलबे के नीचे दब गया। किसी तरह उसने खुद को बाहर निकाला और फिर फैक्ट्री के बाहर आया। उसकी कमर और चेहरे पर चोट आई है।