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72 लाख का बिल आने पर उड़े होश
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Thu, 06 Apr 2017 12:30 AM IST
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कौशाम्बी
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जिला अस्पताल के आवास में दूसरे विभागों के कर्मचारी रहते हैं। इनमें संविदा कर्मी भी हैं। आवास का आवंटन नहीं हुआ है। कर्मी अवैध तरीके से इन आवासों में रहते हैं। हाल ही में बिजली विभाग ने 72 लाख रुपये का बिल सीएमएस को भेजा। बिल मिलते ही सीएमएस का माथा ठनक गया। प्रकरण की जानकारी डीएम को दी। डीएम ने आवासों में रहने वाले कर्मचारियों का सत्यापन शुरू करा दिया है।
जिला अस्पताल के आवासों में बड़ी संख्या में बाहरी लोग रह रहे हैं। जिला अस्पताल के आवास में वही कर्मी रह सकते हैं, जिनको आवास का आवंटन हुआ है, लेकिन आवास का आवंटन कराने वालों की जगह, यहां दूसरे लोग रह रहे हैं। कई लोगों ने अपने रिश्तेदारों को आवास दे दिया है। इनके अलावा दूसरे विभागों के भी कर्मी अवैध तरीके से यहां रह रहे हैं। अभी तक इस पर्दा पड़ा था। अधिकारी भी खामोश थे। हाल ही में बिजली विभाग ने 72 लाख 23 हजार का बिल सीएमएस को थमाया तो उनके होश उड़ गए। इतनी मोटी रकम कैसे जमा होगी, इस संबंध में उन्होंने लिपिकों से बातचीत की तो उन्होंने भी हाथ खड़े कर लिए।
इसके बाद पता चला कि आवासों में बाहरी लोग रहे हैं। सीएमएस ने इसकी रिपोर्ट डीएम को भेजी। डीएम अखंड प्रताप सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आवासों का सत्यापन शुरू करा दिया है। इसके लिए तीन अधिकारियों की कमेटी गठित की गई है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वह जांच कर यह बताएं कि कितने लोगों को आवास का आवंटन हुआ है और कितने लोग अवैध तरीके से रह रहे हैं। डीएम की इस कार्रवाई से जिला अस्पताल में रहने वाले लोगों के होश उड़ गए हैं।
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किराए पर रहते हैं कर्मचारी
जिला अस्पताल के कई कर्मचारी किराए पर रहते हैं। सरकारी आवास पर दूसरों का कब्जा होने से यह किराया देने को मजबूर हैं। इसकी कई बार कर्मियों ने शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब डीएम ने सत्यापन शुरू कराया तो बिना आवंटन रह रहे लोगों की बेचैनी बढ़ गई है।
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जिला अस्पताल के आवासों में बड़ी संख्या में बाहरी लोग रह रहे हैं। जिला अस्पताल के आवास में वही कर्मी रह सकते हैं, जिनको आवास का आवंटन हुआ है, लेकिन आवास का आवंटन कराने वालों की जगह, यहां दूसरे लोग रह रहे हैं। कई लोगों ने अपने रिश्तेदारों को आवास दे दिया है। इनके अलावा दूसरे विभागों के भी कर्मी अवैध तरीके से यहां रह रहे हैं। अभी तक इस पर्दा पड़ा था। अधिकारी भी खामोश थे। हाल ही में बिजली विभाग ने 72 लाख 23 हजार का बिल सीएमएस को थमाया तो उनके होश उड़ गए। इतनी मोटी रकम कैसे जमा होगी, इस संबंध में उन्होंने लिपिकों से बातचीत की तो उन्होंने भी हाथ खड़े कर लिए।
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इसके बाद पता चला कि आवासों में बाहरी लोग रहे हैं। सीएमएस ने इसकी रिपोर्ट डीएम को भेजी। डीएम अखंड प्रताप सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आवासों का सत्यापन शुरू करा दिया है। इसके लिए तीन अधिकारियों की कमेटी गठित की गई है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वह जांच कर यह बताएं कि कितने लोगों को आवास का आवंटन हुआ है और कितने लोग अवैध तरीके से रह रहे हैं। डीएम की इस कार्रवाई से जिला अस्पताल में रहने वाले लोगों के होश उड़ गए हैं।
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किराए पर रहते हैं कर्मचारी
जिला अस्पताल के कई कर्मचारी किराए पर रहते हैं। सरकारी आवास पर दूसरों का कब्जा होने से यह किराया देने को मजबूर हैं। इसकी कई बार कर्मियों ने शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब डीएम ने सत्यापन शुरू कराया तो बिना आवंटन रह रहे लोगों की बेचैनी बढ़ गई है।