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पुत्रों की मंगलकामना के लिए महिलाओं ने रखा व्रत
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 16 Jan 2017 01:01 AM IST
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गणेश चतुर्थी का पर्व जिले भर में धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने अपने पुत्रों की दीर्घायु के लिए दिनभर निर्जला व्रत रखा। चंद्र दर्शन के बाद महिलाओं ने शंखनाद के बीच भगवान गणेश और सकट देवी की विधि विधान से पूजा की। इसके बाद तिल-गुड़, सिंघाड़े के आटे, रामदाना व शकरकंद से बने पकवानों को खाकर व्रत समाप्त किया।
गणेश चतुर्थी (सकट) पर्व महिलाओं द्वारा सदियों से मनाया जा रहा है। इसके पीछे मान्यता है कि विघ्न विनाशक भगवान लंबोदर का जन्म इसी दिन हुआ था। मान्यता है कि जो माताएं इस व्रत का नियमपूर्वक पालन कर शाम को चंद्र दर्शन के बाद पूजन-अर्चन करती हैं तो उनके पुत्रों को दीर्घायु के साथ धन-धान्य से संपन्नता मिलती है। इसके अलावा कभी भी उनके जीवन में बाधाएं नहीं आती। पुत्रों की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने गणेश चतुर्थी का निर्जला व्रत रखा।
शाम को महिलाओं ने तिल-गुड़, शकरकंद, रामदाना, सिंघाड़े के आटे आदि से तरह-तरह के पकवान बनाए। इसके बाद शाम 8.33 बजे चतुर्थी के चांद का दर्शन कर सकट महरानी की गन्ने, काले तिल-गुड़ से बने पहाड़, बैगन, अमरूद आदि फलों को रखकर पूजन-अर्चन किया। पूजन के बाद महिलाओं ने देर रात फलाहारी पकवान रूपी प्रसाद को ग्रहण कर व्रत समाप्त किया। पर्व को लेकर महिलाओं के साथ-साथ बच्चों में भी काफी उत्साह देखने को मिला।
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बाजारों में रही रौनक
गणेश चतुर्थी पर्व को लेकर वैसे तो सप्ताह भर से तैयारियों चल रही थी। रामदाना, सिंघाड़ा, तिल आदि की खरीदारी कर महिलाएं उसे धुलकर सुखा रही थीं, लेकिन शनिवार और रविवार को बाजारों में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी। सबसे अधिक भीड़ कपड़ों की दुकानों में देखने को मिली। अपनी मनपसंद साड़ी खरीदने के लिए दुकानों में गई महिलाओं की खासी भीड़ रही। इसके अलावा तिल, गुड़, सिंघाड़ा खरीदने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
महंगा बिका गन्ना, अमरूद और बैगन
गणेश चतुर्थी पर्व में गन्ना, अमरूद और बैगन पूजन सामग्री में प्रमुख मानी जाती हैं। माना जाता है कि गन्ना गणेश भगवान को बहुत प्रिय है। इसके अलावा अमरूद और बैगन का भी पूजन में विशेष महत्व है। इसके चलते प्रत्येक उपासक महिला को पूजन करने के लिए इन सभी चीजों की विशेष जरूरत होती है। पर्व वाले दिन इनके दाम आसमान छूते नजर आए। पांच से छह रुपये में बिकने वाला गन्ना 15 से 20 रुपये में एक बिका तो, 15 रुपये किलो मिलने वाला अमरूद भी 40 रुपये किलो तक पहुंच गया। इतना ही नहीं बैगन भी दो गुने दाम पर बिका। रविवार को बैगन 20 रुपये किलो तक बिका।
क्या कहते हैं जानकार
गणेश चतुर्थी (सकट) पर्व का पुत्रवती महिलाओं के लिए विशेष महत्व है। इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ है। व्रत रखने वाली महिलाओं के पुत्रों के जीवन में कभी किसी प्रकार का संकट और बाधा नहीं आती।
पं. अतुष कुमार शास्त्री
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गणेश चतुर्थी (सकट) पर्व महिलाओं द्वारा सदियों से मनाया जा रहा है। इसके पीछे मान्यता है कि विघ्न विनाशक भगवान लंबोदर का जन्म इसी दिन हुआ था। मान्यता है कि जो माताएं इस व्रत का नियमपूर्वक पालन कर शाम को चंद्र दर्शन के बाद पूजन-अर्चन करती हैं तो उनके पुत्रों को दीर्घायु के साथ धन-धान्य से संपन्नता मिलती है। इसके अलावा कभी भी उनके जीवन में बाधाएं नहीं आती। पुत्रों की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने गणेश चतुर्थी का निर्जला व्रत रखा।
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शाम को महिलाओं ने तिल-गुड़, शकरकंद, रामदाना, सिंघाड़े के आटे आदि से तरह-तरह के पकवान बनाए। इसके बाद शाम 8.33 बजे चतुर्थी के चांद का दर्शन कर सकट महरानी की गन्ने, काले तिल-गुड़ से बने पहाड़, बैगन, अमरूद आदि फलों को रखकर पूजन-अर्चन किया। पूजन के बाद महिलाओं ने देर रात फलाहारी पकवान रूपी प्रसाद को ग्रहण कर व्रत समाप्त किया। पर्व को लेकर महिलाओं के साथ-साथ बच्चों में भी काफी उत्साह देखने को मिला।
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बाजारों में रही रौनक
गणेश चतुर्थी पर्व को लेकर वैसे तो सप्ताह भर से तैयारियों चल रही थी। रामदाना, सिंघाड़ा, तिल आदि की खरीदारी कर महिलाएं उसे धुलकर सुखा रही थीं, लेकिन शनिवार और रविवार को बाजारों में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी। सबसे अधिक भीड़ कपड़ों की दुकानों में देखने को मिली। अपनी मनपसंद साड़ी खरीदने के लिए दुकानों में गई महिलाओं की खासी भीड़ रही। इसके अलावा तिल, गुड़, सिंघाड़ा खरीदने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
महंगा बिका गन्ना, अमरूद और बैगन
गणेश चतुर्थी पर्व में गन्ना, अमरूद और बैगन पूजन सामग्री में प्रमुख मानी जाती हैं। माना जाता है कि गन्ना गणेश भगवान को बहुत प्रिय है। इसके अलावा अमरूद और बैगन का भी पूजन में विशेष महत्व है। इसके चलते प्रत्येक उपासक महिला को पूजन करने के लिए इन सभी चीजों की विशेष जरूरत होती है। पर्व वाले दिन इनके दाम आसमान छूते नजर आए। पांच से छह रुपये में बिकने वाला गन्ना 15 से 20 रुपये में एक बिका तो, 15 रुपये किलो मिलने वाला अमरूद भी 40 रुपये किलो तक पहुंच गया। इतना ही नहीं बैगन भी दो गुने दाम पर बिका। रविवार को बैगन 20 रुपये किलो तक बिका।
क्या कहते हैं जानकार
गणेश चतुर्थी (सकट) पर्व का पुत्रवती महिलाओं के लिए विशेष महत्व है। इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ है। व्रत रखने वाली महिलाओं के पुत्रों के जीवन में कभी किसी प्रकार का संकट और बाधा नहीं आती।
पं. अतुष कुमार शास्त्री