कौशाम्बी में यमुना में बाढ़ का पानी घटा, बढ़ीं परेशानियां
यमुना का रौद्र रूप थमने के बाद अब ग्रामीण घरों की साफ-सफाई व मरम्मत के लिए वापस लौटने लगे हैं। ग्रामीणों को समाजसेवी व प्रशासन की तरफ से राशन बांटा जा रहा है, लेकिन मवेशियों के चारे का इंतजाम नहीं किया जा रहा।
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यमुना का जलस्तर गिरने के साथ ही बाढ़ पीड़ित ग्रामीण अब घर वापसी करने लगे हैं। गांव पहुंचने पर किसी के घर की दीवार गिरी मिल रही है तो किसी का कच्चा घर धराशाई हो गया है। फिलहाल यह परिवार किसी तरह से खुद के रहने का जुगाड़ कर ले रहे हैं। भोजन की व्यवस्था हो जा रही है, लेकिन समस्या अब मवेशियों का पेट भरने की है।
बाढ़ का पानी भले ही कम हो गया हो, लेकिन खेतों में पानी भरा हुआ है। वहां दलदल की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में वहां मवेशियों को चराना खतरे से खाली नहीं है। पशुपालकों के घरों में रखा भूसा भी खराब हो चुका है। इससे पशु पालक परेशान हैं। दरअसल तराई के अधिकतर ग्रामीण सारा दिन अपने मवेशियों को जंगल में ले जाकर चराया करते थे। इसके कारण भूसा का खर्चा काफी कम रहता था। इस बार बाढ़ के कारण लोगों ने घरों में जो भूसा रखा था वह लगभग खराब हो चुका है।
इनका कहना है
बाढ़ग्रस्त इलाके में मांग के सापेक्ष चारे की व्यवस्था पशु पालन विभाग करता है। इस बार कहीं कोई पशु प्रभावित नहीं हुआ है। प्रभावित पशुपालकों की तरफ से भी चारे की मांग नहीं की गई है। बाढ़ प्रभावित गांवों में शिविर लगाकर मवेशियों का वैक्सीनेशन कराया जा रहा है।-डॉ. बीपी पाठक, सीवीओ