फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   farmer seeds

बीज-खाद के इंतजाम में परेशान हो रहे किसान

Mon, 14 Nov 2016 11:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी Updated Mon, 14 Nov 2016 11:57 PM IST
विज्ञापन
farmer seeds
other
धान की बेहतर उपज कर अन्न देवता ने अबकी राहत की सांस ली थी। गेहूं की खेती में किसान पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर रहा था, लेकिन रुपये की ऐसी मार पड़ी कि वह कुछ भी कर सकने की स्थिति में नहीं है। बीज खरीद लेता है तो खाद का जुगाड़ नहीं हो पा रहा है। घर के गेहूं को बो देता है तो सिंचाई व मजदूरी देने का संकट है। उधार की संभावनाएं खत्म हो चुकी हैं। सोसायटी से बैरंग वापस लौटाएं जा रहे हैं। बीज गोदाम उनके लिए एकदम से बंद हो चुके हैं। क्या करें और कहां जाए? इस उधेड़बुन में उनकी खेती का माकूल समय भी जाया हो रहा है।
विज्ञापन


  ओलावृष्टि व सूखे जैसी स्थिति से निपटने वाला किसान नोट बंद होने के बाद चार दिन के भीतर हलाकान व परेशान हो गया। गेहूं की अगैती खेती करने वालों ने बाजी मार ली, लेकिन जो पिछड़ गए हैं। अब वह मायूस हैं। किसानों के लिए लगभग सारे दरवाजे बंद हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 40 हजार हेक्टेयर से ज्यादा गेहूं व दो सौ हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल में चना व मटर की खेती होती है। अभी तक लगभग दो हजार हेक्टेयर में ही गेहूं की बुवाई हो सकी है। बुवाई का समय आया तो नोट बंद होने से किसान के थोथे उड़ गए। धान बिक नहीं रहा है। नोट बंदी का परिणाम यह रहा कि व्यापारियों ने भी किसानों से किनारा करना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन


दीवर कोतारी के काश्तकार अभय सिंह यादव का कहना है कि घर में धान डंप पड़ा है। बेचकर गेहूं के बीज व खाद खरीदने की सोच रहे थे। थोड़ी-बहुत उम्मीद सोसायटी से भी थी, लेकिन नोट क्या बंद हुई। उम्मीद पर पानी ही फिर गया। कहते हैं कि जब उपज बिक नहीं रही है तो कहां से वह बीज व खाद खरीदेंगे। यदि बीज खरीद लेते हैं तो खाद का इंतजाम करना मुश्किल है। यही हाल सरसवां के राधेश्याम का है। वह भी उपज बेचकर बुवाई की तैयारी कर रहे थे। पिछली खेती का भी लेन-देन बाकी है। उससे निपटने का रास्ता निकाल लिया था, लेकिन आगे ऐसी मुसीबत खड़ी हो गई है कि पीछे मुड़कर वह देख ही नहीं पा रहे हैं। अगियौना के प्रगतिशील किसान मंजर अब्बास ने बताया कि फिलहाल किसान अभी दिक्कत में है। बैंकों से रुपया मिलने जरूर लगा है, लेकिन किसान का भला तो तभी होगा जब उसकी उपज बिकेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


पिछड़ सकती है खेती
किसानों का मानना है कि मौजूदा स्थिति से निपटने में वक्त लगेगा। कहा कि यदि धान की खरीद में तेजी न आई और व्यापारियों ने सहयोग न किया तो गेहूं की खेती पिछड़ना तय है। आशंका जताई गई है कि यदि गेहूं की खेती पिछड़ती है तो लेट वेरायटी का बीज भी बमुश्किल ही लोगों को मिलेगा, क्योंकि यह बहुत सीमित मात्रा में आता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed