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न खाद न पानी, डूब रही किसानी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sat, 19 Aug 2017 01:24 AM IST
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योगी सरकार में दोआबा का किसान यूरिया और पानी की समस्या से जूझ रहा है। साधन सहकारी समितियों से यूरिया पखवारे भर से गायब है तो नहरें बारिश के मौसम में सूख रही हैं। जिम्मेदार हैं कि किसानों की समस्याओं की अनदेखी कर तमाशा देख रहे हैं। इससे किसान परेशान हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।
सूबे की योगी सरकार भले ही किसानों की हितैषी बनते हुए तमाम घोषणाएं कर रही है पर हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। किसानों की समस्याओं को लेकर अफसर तनिक भी संजीदा नहीं दिख रहे हैं। खरीफ की खेती के दौरान फसलों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए साधन सहकारी समितियों से यूरिया पखवारे भर से गायब है। पिछले सप्ताह यूरिया को लेकर किसानों के बीच मची हायतौबा को देखते हुए एआर को-ऑपरेटिव अजीत कुमार सिंह ने इलाहाबाद से पांच हजार मीट्रिक टन यूरिया की डिमांड की थी। सप्ताह भर का समय बीत जाने के बाद भी समितियों में यूरिया नहीं पहुंच सकी। दूसरी प्रमुख समस्या फसलों की सिंचाई की है।
जिले के आधे हिस्से में किशनपुर पम्प कैनाल की 28 माइनरों व छह रजबहों का जाल बिछा है। इन माइनरों और रजबहों से किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। म्योहर, कनैली, बंधुरी रसूलीपुर, घोसिया सहित दर्जन भर माइनरों में माह भर से पानी ही नहीं पहुुंच रहा। इसके चलते नहरी क्षेत्र के किसानों की फसलें नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है। एक्सईएन सिंचाई का कहना है कि लो-वोल्टेज की समस्या के चलते पंप का संचालन ठीक से नहीं हो पा रहा। इसके चलते माइनरों में पानी आगे नहीं बढ़ पा रहा है। बहरहाल खाद-पानी की समस्या से जूझ रहे किसानों का योगी सरकार में बुरा हाल है।
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लो-वोल्टेज के चलते पांच पंप ही उगल रहे पानी
किशनपुर पम्प कैनाल में कुल आठ पंप लगाए गए हैं। इन पंपों का संचालन नहर में पानी की जरूरत के हिसाब से समय-समय पर किया जाता है। मौजूदा समय में सिंचाई की सख्त जरूरत के मौके पर कम से कम पांच पंपों का संचालन जरूरी है। लेकिन लो-वोल्टेज के चलते महज पांच पंप ही चालू हैं। सिंचाई के ऐन वक्त पर पांच पंपों का पानी प्रमुख नहर में ही सोख जाता है। ऐसे में माइनरों के किसानों को बूंद भर पानी नहीं मिल पा रहा है। एक्सईएन सिंचाई आरके निरंजन का कहना है कि लो-वोल्टेज की जानकारी एक्सईएन हाइड्रिल को दे दी गई है, सुधार होने के बाद ही समस्या दूर हो सकेगी।
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सूबे की योगी सरकार भले ही किसानों की हितैषी बनते हुए तमाम घोषणाएं कर रही है पर हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। किसानों की समस्याओं को लेकर अफसर तनिक भी संजीदा नहीं दिख रहे हैं। खरीफ की खेती के दौरान फसलों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए साधन सहकारी समितियों से यूरिया पखवारे भर से गायब है। पिछले सप्ताह यूरिया को लेकर किसानों के बीच मची हायतौबा को देखते हुए एआर को-ऑपरेटिव अजीत कुमार सिंह ने इलाहाबाद से पांच हजार मीट्रिक टन यूरिया की डिमांड की थी। सप्ताह भर का समय बीत जाने के बाद भी समितियों में यूरिया नहीं पहुंच सकी। दूसरी प्रमुख समस्या फसलों की सिंचाई की है।
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जिले के आधे हिस्से में किशनपुर पम्प कैनाल की 28 माइनरों व छह रजबहों का जाल बिछा है। इन माइनरों और रजबहों से किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। म्योहर, कनैली, बंधुरी रसूलीपुर, घोसिया सहित दर्जन भर माइनरों में माह भर से पानी ही नहीं पहुुंच रहा। इसके चलते नहरी क्षेत्र के किसानों की फसलें नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है। एक्सईएन सिंचाई का कहना है कि लो-वोल्टेज की समस्या के चलते पंप का संचालन ठीक से नहीं हो पा रहा। इसके चलते माइनरों में पानी आगे नहीं बढ़ पा रहा है। बहरहाल खाद-पानी की समस्या से जूझ रहे किसानों का योगी सरकार में बुरा हाल है।
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लो-वोल्टेज के चलते पांच पंप ही उगल रहे पानी
किशनपुर पम्प कैनाल में कुल आठ पंप लगाए गए हैं। इन पंपों का संचालन नहर में पानी की जरूरत के हिसाब से समय-समय पर किया जाता है। मौजूदा समय में सिंचाई की सख्त जरूरत के मौके पर कम से कम पांच पंपों का संचालन जरूरी है। लेकिन लो-वोल्टेज के चलते महज पांच पंप ही चालू हैं। सिंचाई के ऐन वक्त पर पांच पंपों का पानी प्रमुख नहर में ही सोख जाता है। ऐसे में माइनरों के किसानों को बूंद भर पानी नहीं मिल पा रहा है। एक्सईएन सिंचाई आरके निरंजन का कहना है कि लो-वोल्टेज की जानकारी एक्सईएन हाइड्रिल को दे दी गई है, सुधार होने के बाद ही समस्या दूर हो सकेगी।