फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   Doctors officers

डॉक्टरों-अफसरों की जिद के आगे हारी मौत

Mon, 21 Aug 2017 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी Updated Mon, 21 Aug 2017 01:36 AM IST
विज्ञापन
Doctors officers
कौशाम्बी
जन्मजात बीमारी लेकर पैदा हुए एक मासूम की सांसें गिनती की थीं। डॉक्टरों ने 24 घंटे का वक्त दिया था। इसके बाद उसकी मौत लगभग तय थी। मासूम को एनोरेक्टल मॉल फारमेशन बीमारी थी, उसका मल द्वार बंद था। ऑपरेशन ही इलाज था, लेकिन गरीब मां-बाप के पास रुपये नहीं थे। आरबीएसके टीम के डॉक्टर अरुण केशरवानी ने चिल्ड्रेन अस्पताल में एड़ीचोटी का जोर लगाया लेकिन वहां बात नहीं बनी। बजट का पेच फंस गया। वह भागकर वापस अधिकारियों के पास आए। डीएम, सीएमओ के संज्ञान में मामला लाया तो चंदा इकट्ठा किया गया और ऑपरेशन समय रहते कराया गया। परिणाम यह रहा कि 24 घंटे की सांसें ताउम्र में बदल गई। अब मासूम के साथ उसके मां-बाप भी खिलखिलाकर हंस रहे हैं।
विज्ञापन


टेंगाई की शांती देवी की ससुराल साढ़ो है। उसका पति नागेश कुमार बाहर रहकर कमाई करता है, इसलिए वह अपने मायके में रहती है। 17 अगस्त की सुबह उसने एक बच्चे को मंझनपुर पीएचसी में जन्म दिया। बच्चे का मल द्वार बंद था। यह उसकी जन्मजात बीमारी थी। बच्चा अचानक रोने व चीखने लगा तो जांच की गई, तब यह बीमारी पता चली। आरबीएसके टीम जांच को पहुंची तो जन्मजात बीमारी (कंजेनाइटल) का पता चलते ही वह सक्रिय हो गई। डॉ. अरुण केशरवानी बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एससी श्रीवास्तव ने जांच के बाद बताया कि बगैर आपरेशन के बच्चे की जिंदगी बचाना संभव नहीं है। आपरेशन यहां नहीं हो सकता है। बच्चे को सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय (इलाहाबाद) रेफर किया गया। 18 अगस्त को टीम बच्चे को लेकर वहां पहुंची तो वहां डॉ. मनीषा ने आरबीएसके टीम से फंड मांगा।
विज्ञापन


टीम ने फंड न होने की बात बताई। इसके बाद मेडिकल कालेज के एसपीएम हेड डॉ. शिव प्रकाश से मदद मांगी गई। वहां भी फंड का पेंच फंस गया। डॉ. अरुण केशरवानी मायूस हो चुके थे। मासूम की जिंदगी 24 घंटे थी, जिसमें आठ घंटे वह गंवा चुके थे। वह भागकर शाम को करीब चार बजे दोबारा जिला मुख्यालय आाए और डीएम मनीष कुमार वर्मा से मिले। इसके बाद नोडल अधिकारी एमके सिन्हा से भी बातचीत की। डीपीआरओ कमल किशोर भी वहां मौजूद थे। किस बजट से इलाज कराया जाए, पहले इस पर चर्चा हुई। जब यह तय हो गया कि बजट रिलीज करने में ही वक्त लग जाएगा तो अधिकारियों ने चंदा करके डॉक्टर को दोबारा इलाहाबाद भेजा जहां बच्चे का सफल आपरेशन हुआ। इस पर डॉक्टरों व अधिकारियों ने राहत की सांस ली। डॉक्टर अरुण केशरवानी ने ही आपरेशन के बाद बच्चे का नाम राकेश भी रख दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed