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नशे ने ले ली मजदूरों की जान
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 16 Jan 2017 01:01 AM IST
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धवाड़ा ईंट-भट्ठे में शनिवार की रात दिल दहला देने वाली घटना हुई। प्रभाषगिरी के दर्शन के बाद साथी के यहां पनाह लेने मजदूर ईंट-भट्ठा पहुंचे थे। सभी लोगों ने पहले शराब पी। इसके बाद खाना खाया था। अलाव तापने के बाद वह झोपड़ी के भीतर गहरी नींद में सो गए। आधी रात को अलाव की चिंगारी मजदूरों पर कहर बनकर गिरी। नशे में होने के कारण जब झोपड़ी में आग लगी तो मजदूर जग नहीं सके थे। आग की चपेट में आए तो चीखने-चिल्लाने पर आसपास के मजदूरों ने तीन लोगाें को बड़ी मुश्किल से बचाया। दो मजदूर जिंदा जल गए। लोगों ने लाश देखी तो उनकी रूह कांप गई।
सरायअकिल के घोसिया गांव का रहने वाला लवकुश साथी रामलखन और मनीष के साथ शनिवार को प्रभाषगिरी का मेला देखने गया था। यहां पर उसकी मुलाकात रमेश निवासी असकरनपुर मगरोहनी से हुई। मेला देखने के बाद धवाड़ा ईंट-भट्ठे में काम करने वाले साथी ठेकेदार मोहन से मिलने पहुंच गए। रात होने के कारण सभी ने रुकने का फैसला कर लिया। इसके बाद सभी ने एक साथ बैठकर पहले शराब पी इसके बाद खाना खाने के बाद जलता अलाव छोड़कर झोपड़ी में सो गए। रात में मौत बनकर अलाव से उड़ी चिंगारी ने झोपड़ी को आगोश में ले लिया। आग की चपेट में आने से मोहन और लवकुश जिंदा जल मरे। आग की तपिस पर शराब का नशा भारी पड़ा।
मजदूरों की मौत से परिजनों का रो-रोकर हाल बेहाल है। रमेश, रामलखन का कहना है कि कब क्या हुआ? उन्हें कुछ पता ही नहीं चला। जब आग की चपेट में वह गए तो उन्होंने शोर मचाया, इसके बाद अगल-बगल रहने वाले लोग भागकर आए और उन्हें किसी तरह बाहर निकाला। हादसे के बाद से रमेश सहम गया। वह डर-डर कर बातें कर रहा था। पुलिस अधिकारियों ने तीनों से पूछताछ की। इसके बाद इनको बचाने वाले मजदूरों से भी पूछताछ की गई। मजदूर मूलचंद्र, शिवलोचन, हरीलाल, आदि लोगों ने घटना की जानकारी दी।
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बाल-बाल बचा मोहन का परिवार
ईट भट्ठा मजदूर मोहन साथियों के साथ एक झोपड़ी में सो गया था। जबकि उसकी पत्नी राजवंती और चार बच्चों के साथ बगल की झोपड़ी में सो रही थी। अफरा-तफरी के बीच लोगों की सूझ-बूझ से मोहन का परिवार बाल-बाल बच गया, क्योंकि आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था। वह धीरे-धीरे मोहन की दूसरी झोपड़ी की ओर बढ़ रही थी।
साल भर में ही सूनी हुई पुष्पा की मांग
धवाड़ा ईंट-भट्ठे में शनिवार की रात मौत का शिकार हुए लवकुश की शादी मई 2015 में पुष्पा के साथ हुई थी। शादी को साल भर ही बीते थे कि पुष्पा की मांग उजड़ गई। सुबह घटना की खबर लवकुश के घर वालों को हुई तो उनके होश उड़ गए। जानकारी होते ही पुष्पा घर के भीतर ही अचेत हो गई। किसी तरह उसको ईंट-भट्ठा ले जाया गया तो वहां दहाड़े मारकर रोने लगी।
आर्थिक सहायता दिलाए जाने का दिया आश्वासन
ईंट-भट्ठा में घटना के बाद रविवार को जांच करने पहुंचे जिलाधिकारी एपी सिंह ने मृतकों के परिजनों को आश्वासन दिया कि उनकी हर संभव मदद की जाएगी। डीएम ने कहा कि उनको आर्थिक सहायता भी दिलाई जाएगी। इसके लिए वह शासन को पत्र भेजेंगे। फौरी राहत राशि उन्हें तहसील से जल्द ही दिलाई जाएगी।
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सरायअकिल के घोसिया गांव का रहने वाला लवकुश साथी रामलखन और मनीष के साथ शनिवार को प्रभाषगिरी का मेला देखने गया था। यहां पर उसकी मुलाकात रमेश निवासी असकरनपुर मगरोहनी से हुई। मेला देखने के बाद धवाड़ा ईंट-भट्ठे में काम करने वाले साथी ठेकेदार मोहन से मिलने पहुंच गए। रात होने के कारण सभी ने रुकने का फैसला कर लिया। इसके बाद सभी ने एक साथ बैठकर पहले शराब पी इसके बाद खाना खाने के बाद जलता अलाव छोड़कर झोपड़ी में सो गए। रात में मौत बनकर अलाव से उड़ी चिंगारी ने झोपड़ी को आगोश में ले लिया। आग की चपेट में आने से मोहन और लवकुश जिंदा जल मरे। आग की तपिस पर शराब का नशा भारी पड़ा।
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मजदूरों की मौत से परिजनों का रो-रोकर हाल बेहाल है। रमेश, रामलखन का कहना है कि कब क्या हुआ? उन्हें कुछ पता ही नहीं चला। जब आग की चपेट में वह गए तो उन्होंने शोर मचाया, इसके बाद अगल-बगल रहने वाले लोग भागकर आए और उन्हें किसी तरह बाहर निकाला। हादसे के बाद से रमेश सहम गया। वह डर-डर कर बातें कर रहा था। पुलिस अधिकारियों ने तीनों से पूछताछ की। इसके बाद इनको बचाने वाले मजदूरों से भी पूछताछ की गई। मजदूर मूलचंद्र, शिवलोचन, हरीलाल, आदि लोगों ने घटना की जानकारी दी।
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बाल-बाल बचा मोहन का परिवार
ईट भट्ठा मजदूर मोहन साथियों के साथ एक झोपड़ी में सो गया था। जबकि उसकी पत्नी राजवंती और चार बच्चों के साथ बगल की झोपड़ी में सो रही थी। अफरा-तफरी के बीच लोगों की सूझ-बूझ से मोहन का परिवार बाल-बाल बच गया, क्योंकि आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था। वह धीरे-धीरे मोहन की दूसरी झोपड़ी की ओर बढ़ रही थी।
साल भर में ही सूनी हुई पुष्पा की मांग
धवाड़ा ईंट-भट्ठे में शनिवार की रात मौत का शिकार हुए लवकुश की शादी मई 2015 में पुष्पा के साथ हुई थी। शादी को साल भर ही बीते थे कि पुष्पा की मांग उजड़ गई। सुबह घटना की खबर लवकुश के घर वालों को हुई तो उनके होश उड़ गए। जानकारी होते ही पुष्पा घर के भीतर ही अचेत हो गई। किसी तरह उसको ईंट-भट्ठा ले जाया गया तो वहां दहाड़े मारकर रोने लगी।
आर्थिक सहायता दिलाए जाने का दिया आश्वासन
ईंट-भट्ठा में घटना के बाद रविवार को जांच करने पहुंचे जिलाधिकारी एपी सिंह ने मृतकों के परिजनों को आश्वासन दिया कि उनकी हर संभव मदद की जाएगी। डीएम ने कहा कि उनको आर्थिक सहायता भी दिलाई जाएगी। इसके लिए वह शासन को पत्र भेजेंगे। फौरी राहत राशि उन्हें तहसील से जल्द ही दिलाई जाएगी।