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सऊदी में फंसे लोगों की याद में तड़प रहे परिजन
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 07 Nov 2016 01:29 AM IST
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सऊदी अरब में कौशांबी के चार लोग एजेंट की लापरवाही से फंस गए हैं। वह वहां भूखे पेट तड़प रहे हैं और मुल्क वापसी के लिए छटपटा रहे हैं। सऊदी में फंसे लोेगों की वापसी के लिए उनके परिजन भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। अपनों की याद में वह यहां बेचैन हैं। इनके घरों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
रोजी-रोटी के चक्कर में सिराथू तहसील क्षेत्र के टीकरडीह गांव के पूर्व प्रधान लल्लू के बड़े बेटे मक्खनलाल (30) के साथ गांव के गनेश कुमार (28), रमेश कुमार (29) और कादीपुर निवासी ओम प्रकाश (40) के साथ एक माह पहले सऊदीअरब गया था। वह वहां अपने साथियों के साथ हायल शहर के निजम्मा में काम कर रहे थे। मक्खन लाल ने शनिवार की शाम को अपने पिता लल्लू को इंटरनेट के माध्यम से फोन करके जानकारी दी कि उनको यहां परेशान किया जा रहा है।
पहले रुपया नहीं दिया जा रहा था, अब उनका खाना-पानी भी बंद कर दिया गया है। इससे वह परेशान है। बाहर भी नहीं निकलने दिया जा रहा है। इसकी जानकारी होते ही पूर्व प्रधान के होश उड़ गए। उन्होंने रविवार की सुबह मक्खन की पत्नी इंद्रादेवी समेत रमेश व गनेश के परिजनों को सूचना दी तो उनके घर में सन्नाटा पसर गया। सुबह परिजन घर में मायूस बैठे रहे। सऊदी में फंसे लोगों के परिजन गमजदा हैं। वह अपनों को याद कर रो रहे हैं। उनको यही चिंता खाए जा रही है कि आखिर उनके अपने वहां कैसे होंगे।
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रोते-रोते सूख गए आंख के आंसू
अमर उजाला में रविवार को सऊदीअरब में फंसे लोगों की खबर छपते ही टीकरडीह गांव की आबोहवा बदल चुकी थी। फोन करके लोगों ने एक दूसरे से पूछा कि आखिर वहां कौन-कौन फंसा है। जब लोगों को यह पता चल गया कि गांव के मक्खन के साथ रमेश व गनेश वहां फंसे हैं तो गांव में इसकी चर्चा भी शुरू हो गई। उधर जैसे ही पूर्व प्रधान ने परिजनों को इस हकीकत से रूबरू कराया तो घरों में रोना-पीटना मच गया। मक्खन की पत्नी इंद्रादेवी, गनेश की मां केशरानी, भाई महेश व राजेश कुमार और रमेश की मां रानी देवी व भाई इंद्रजीत व परमेश का रो-रो कर बुरा हाल था।
एजेंट पर लगाए गंभीर आरोप
सऊदी में फंसे मक्खनलाल व उसके साथी रमेश, गनेश व ओम प्रकाश को कूरामुरीदन गांव के शमीम ने मुंबई के एक एजेंट के माध्यम से वहां भिजवाया था। मक्खन के पिता का आरोप है कि शमीम की लापरवाही से उनके परिजन वहां फंस गए हैं। अब शमीम मदद भी नहीं कर रहा है, इससे वह वापस नहीं आ पा रहे हैं। शमीम कथित तौर पर डॉक्टरी पेशा भी करता है। इस मामले में शमीम का कहना है कि मक्खन व उसके साथियों को उन्होंने नहीं भेजा है। उन्होंने केवल जानकारी दी थी। अब वह एजेंट को फोन न कर उसे परेशान कर रहे हैं। बताया कि मक्खन ने उनको तीन दिन पहले व शनिवार की रात व्हाट्सएप पर मैसेज किया था। इस पर उन्होंने सलाह दी थी कि उनका एग्रीमेंट हुआ है, उनका लौटना मुश्किल है। इस संबंध में वह अपने एजेंट से बात करें।
रियाल व दीनार से चमक रहा कौशांबी
बेरोजगार युवकों के लिए खाड़ी देशों की नौकरी खूब भा रही है। जनपद के पांच हजार से ज्यादा लोग सऊदीअरब, ओमान, बहरीन, दुबई, कुबैत आदि देशों में काम करते हैं। वहां से रियाल व दीनार के रूप में आने वाली रकम का ही कमाल है कि कौशांबी को एक नई चमक मिली है। लग्जरी गाड़ियों के साथ लोगों के आलीशान बंगले इसी की देन है। यही कारण कि खाड़ी देश जाने के लालायित जालसाज एजेंटों के झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई लूटा रहे हैं।
कौशांबी के पांच हजार से अधिक लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं। कामगारों की पहली पसंद होती है कि वह सऊदीअरब अथवा दुबई जाएं। इसके बाद वह कुबैत व ओमान जाते हैं। सबको ट्रेड के हिसाब से वहां काम मिलता है। कौशांबी के तो दर्जनों लोग ऐसे हैं जिनका अब वहां खुद का कारोबार हैं और वह मोटी रकम हर दिन कमा रहे हैं। लाखों में खेलने वाले इन लोगों का रहन-सहन बिलकुल बदल चुका है। इनकी आलीशान कोठियां देखकर लोग विदेश भागने के चक्कर में लग जाते हैं। सिराथू तहसील क्षेत्र के सबसे ज्यादा खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं। इनमें परास ऐसा गांव हैं, जहां के हर घर का कोई न कोई बंदा खाड़ी देश में रहकर काम कर रहा है।
इस गांव को मिनी सऊदी भी कहा जाता है। इनके अलावा कूरा, गोरियों संयारा, बिजलीपुर, करनपुर, नगियामई, शहजादपुर, इस्माइलपुर, कड़ा, जफरपुर, मीरापुर तकिया, सिपाह घोसियाना, हब्बू नगर, कमालपुर, फरीदागंज के अलावा करारी, मंझनपुर, महगांव, सरायअकिल आदि इलाकों के लोग बड़ी संख्या में विदेश में हैं। वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के एजेंटों का मानना है कि इनकी वजह से हर माह करोड़ों रुपये का ट्रांजक्शन होता है।
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रोजी-रोटी के चक्कर में सिराथू तहसील क्षेत्र के टीकरडीह गांव के पूर्व प्रधान लल्लू के बड़े बेटे मक्खनलाल (30) के साथ गांव के गनेश कुमार (28), रमेश कुमार (29) और कादीपुर निवासी ओम प्रकाश (40) के साथ एक माह पहले सऊदीअरब गया था। वह वहां अपने साथियों के साथ हायल शहर के निजम्मा में काम कर रहे थे। मक्खन लाल ने शनिवार की शाम को अपने पिता लल्लू को इंटरनेट के माध्यम से फोन करके जानकारी दी कि उनको यहां परेशान किया जा रहा है।
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पहले रुपया नहीं दिया जा रहा था, अब उनका खाना-पानी भी बंद कर दिया गया है। इससे वह परेशान है। बाहर भी नहीं निकलने दिया जा रहा है। इसकी जानकारी होते ही पूर्व प्रधान के होश उड़ गए। उन्होंने रविवार की सुबह मक्खन की पत्नी इंद्रादेवी समेत रमेश व गनेश के परिजनों को सूचना दी तो उनके घर में सन्नाटा पसर गया। सुबह परिजन घर में मायूस बैठे रहे। सऊदी में फंसे लोगों के परिजन गमजदा हैं। वह अपनों को याद कर रो रहे हैं। उनको यही चिंता खाए जा रही है कि आखिर उनके अपने वहां कैसे होंगे।
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रोते-रोते सूख गए आंख के आंसू
अमर उजाला में रविवार को सऊदीअरब में फंसे लोगों की खबर छपते ही टीकरडीह गांव की आबोहवा बदल चुकी थी। फोन करके लोगों ने एक दूसरे से पूछा कि आखिर वहां कौन-कौन फंसा है। जब लोगों को यह पता चल गया कि गांव के मक्खन के साथ रमेश व गनेश वहां फंसे हैं तो गांव में इसकी चर्चा भी शुरू हो गई। उधर जैसे ही पूर्व प्रधान ने परिजनों को इस हकीकत से रूबरू कराया तो घरों में रोना-पीटना मच गया। मक्खन की पत्नी इंद्रादेवी, गनेश की मां केशरानी, भाई महेश व राजेश कुमार और रमेश की मां रानी देवी व भाई इंद्रजीत व परमेश का रो-रो कर बुरा हाल था।
एजेंट पर लगाए गंभीर आरोप
सऊदी में फंसे मक्खनलाल व उसके साथी रमेश, गनेश व ओम प्रकाश को कूरामुरीदन गांव के शमीम ने मुंबई के एक एजेंट के माध्यम से वहां भिजवाया था। मक्खन के पिता का आरोप है कि शमीम की लापरवाही से उनके परिजन वहां फंस गए हैं। अब शमीम मदद भी नहीं कर रहा है, इससे वह वापस नहीं आ पा रहे हैं। शमीम कथित तौर पर डॉक्टरी पेशा भी करता है। इस मामले में शमीम का कहना है कि मक्खन व उसके साथियों को उन्होंने नहीं भेजा है। उन्होंने केवल जानकारी दी थी। अब वह एजेंट को फोन न कर उसे परेशान कर रहे हैं। बताया कि मक्खन ने उनको तीन दिन पहले व शनिवार की रात व्हाट्सएप पर मैसेज किया था। इस पर उन्होंने सलाह दी थी कि उनका एग्रीमेंट हुआ है, उनका लौटना मुश्किल है। इस संबंध में वह अपने एजेंट से बात करें।
रियाल व दीनार से चमक रहा कौशांबी
बेरोजगार युवकों के लिए खाड़ी देशों की नौकरी खूब भा रही है। जनपद के पांच हजार से ज्यादा लोग सऊदीअरब, ओमान, बहरीन, दुबई, कुबैत आदि देशों में काम करते हैं। वहां से रियाल व दीनार के रूप में आने वाली रकम का ही कमाल है कि कौशांबी को एक नई चमक मिली है। लग्जरी गाड़ियों के साथ लोगों के आलीशान बंगले इसी की देन है। यही कारण कि खाड़ी देश जाने के लालायित जालसाज एजेंटों के झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई लूटा रहे हैं।
कौशांबी के पांच हजार से अधिक लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं। कामगारों की पहली पसंद होती है कि वह सऊदीअरब अथवा दुबई जाएं। इसके बाद वह कुबैत व ओमान जाते हैं। सबको ट्रेड के हिसाब से वहां काम मिलता है। कौशांबी के तो दर्जनों लोग ऐसे हैं जिनका अब वहां खुद का कारोबार हैं और वह मोटी रकम हर दिन कमा रहे हैं। लाखों में खेलने वाले इन लोगों का रहन-सहन बिलकुल बदल चुका है। इनकी आलीशान कोठियां देखकर लोग विदेश भागने के चक्कर में लग जाते हैं। सिराथू तहसील क्षेत्र के सबसे ज्यादा खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं। इनमें परास ऐसा गांव हैं, जहां के हर घर का कोई न कोई बंदा खाड़ी देश में रहकर काम कर रहा है।
इस गांव को मिनी सऊदी भी कहा जाता है। इनके अलावा कूरा, गोरियों संयारा, बिजलीपुर, करनपुर, नगियामई, शहजादपुर, इस्माइलपुर, कड़ा, जफरपुर, मीरापुर तकिया, सिपाह घोसियाना, हब्बू नगर, कमालपुर, फरीदागंज के अलावा करारी, मंझनपुर, महगांव, सरायअकिल आदि इलाकों के लोग बड़ी संख्या में विदेश में हैं। वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के एजेंटों का मानना है कि इनकी वजह से हर माह करोड़ों रुपये का ट्रांजक्शन होता है।