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दोआबा में खप रही है कुंडा की अवैध शराब
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 01 Aug 2016 12:36 AM IST
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अवैध शराब का गढ़ बने प्रतापगढ़ के तस्करों के तार दोआबा के कारोबारियों से भी जुड़े हैं। गैर प्रांतों से तस्करी कर लाई जाने वाली शराब को यमुना की तराई में खुले सरकारी ठेकों के अलावा गांव-गांव कारोबारियों के घर पहुंचाया जा रहा है। अच्छी बचत होने के कारण कारोबारी बेखौफ होकर धंधे को अंजाम दे रहे हैं। इससे कभी भी अवैध शराब से दोआबा में बड़ी घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
पड़ोसी जनपद प्रतापगढ़ में अवैध शराब की तस्करी का डंका बजा रहे कारोबारियों के तार दोआबा के कुछ लोगों से जुड़े हैं। इसके चलते प्रतापगढ़ में तस्करी कर लाई गई शराब गंगा पार कर कौशाम्बी भी भेज दी जाती है। दोआबा में अवैध शराब के कारोबारी तस्करी कर लाई गई शराब की खपत कौशाम्बी, पश्चिम शरीरा और महेवाघाट, सरायअकिल इलाके में कर रहे हैं। इन क्षेत्रों की सरकारी देसी शराब की दुकानों में धड़ल्ले से बिक्री तो की ही जा रही है गांव-गांव कारोबारियों ने अपना जाल बिछा रखा है।
सूत्रों की माने तो अधिक आबादी वाले गांवों को कारोबारियों ने अपने निशाने पर रखा है। इन गांवों के युवकों को अच्छी बचत का लालच देकर शराब की खेप भेज दी जाती है। कमाई का चस्का लगने के बाद गांव के कारोबारी तस्करों से शराब लेने के लिए खुद पहुंचने लगते हैं। इलाकाई पुलिस है कि उसे इसकी कानो कान तक भनक नहीं है। बीट के कुछ सिपाहियों को इसकी जानकारी है लेकिन उनका काम फिट होने की वजह से मामले में चुप्पी साधे रहते हैं। ।
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कारोबारियों को प्राप्त है असरदारों का संरक्षण
दोआबा में अवैध शराब के कारोबार में लिप्त लोगों को स्थानीय असरदारों का संरक्षण प्राप्त है। इसके चलते इलाकाई पुलिस भी मामले में टांग नहीं फंसाती। पुलिस का मुंह बंद करने के बाद कारोबारी बेखौफ होकर धंधे को अंजाम दे रहे हैं। यदि कभी किसी पुलिस वाले ने टांग फंसाने की कोशिश की तो असरदार के बीच में आने के बाद पूरा मामला फौरन शांत हो जाता है।
कई बार बरामद हो चुकी तस्करी की शराब
दोआबा में तस्करी कर लाई जाने वाली अवैध शराब को इलाकाई पुलिस ने कई बार बरामद किया है। पिछले दिनों महेवाघाट पुलिस ने एक पिकअप में लादकर लाई जा रही अवैध शराब को बरामद करने में सफलता हासिल की थी। इससे पहले कोखराज, पूरामुफ्ती और सैनी पुलिस ने भी ट्रकों में लादकर ले जाई जा रही अवैध शराब को बरामद किया था। इसके बावजूद दोआबा में अवैध शराब का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है।
पइंसा पुलिस की मिलीभगत से क्षेत्र के कई गांव में शराब का अवैध कारोबार धड़ल्ले से हो रहा है। गांव-गांव हो रहे शराब के अवैध कारोबार ने बहू-बेटियों का घर से बाहर निकलना दूभर कर दिया है।
पइंसा क्षेत्र में शराब का अवैध कारोबार पुलिस की सरपरस्ती में सिर चढ़ कर बोल रहा है। ग्रामीणोें की शिकायत है कि क्षेत्र के पइंसा, अनेठा, बिगिनियापुर, पतीकापुरवा आदि गांव में देशी शराब का कारोबार बड़े पैमाने पर हो रहा है। वर्ग विशेष के लोगों ने इस गोरखधंधे को कुटीर उद्योग के रूप में फैला कर कमाई का जरिया बना लिया है।
शिकायत है कि इलाकाई पुलिस भी इन अड्डों से मोटी रकम बंध जाने से अपना खामोश समर्थन दिए रहती है। पुलिस संरक्षण होने से कारोबारी एवं नशा के शौकीनों के लिए फायदेमंद रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां भी शराब को अत्यधिक नशीला बनाने के लिए केमिकल का प्रयोग किया जाता है। केमिकल की मिलावट में जरा सी चूक होने पर शराब के जहरीली हो जाने का भी खतरा बना रहता है। कहते हैं कि इस कारोबार में लिप्त लोग अपने को खतरों का खिलाड़ी ही मानते हैं। एसओ पइंसा का कहना है कि पुलिस के संज्ञान में कहीं भी शराब का अवैध कारोबार नहीं हो रहा है।
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पड़ोसी जनपद प्रतापगढ़ में अवैध शराब की तस्करी का डंका बजा रहे कारोबारियों के तार दोआबा के कुछ लोगों से जुड़े हैं। इसके चलते प्रतापगढ़ में तस्करी कर लाई गई शराब गंगा पार कर कौशाम्बी भी भेज दी जाती है। दोआबा में अवैध शराब के कारोबारी तस्करी कर लाई गई शराब की खपत कौशाम्बी, पश्चिम शरीरा और महेवाघाट, सरायअकिल इलाके में कर रहे हैं। इन क्षेत्रों की सरकारी देसी शराब की दुकानों में धड़ल्ले से बिक्री तो की ही जा रही है गांव-गांव कारोबारियों ने अपना जाल बिछा रखा है।
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सूत्रों की माने तो अधिक आबादी वाले गांवों को कारोबारियों ने अपने निशाने पर रखा है। इन गांवों के युवकों को अच्छी बचत का लालच देकर शराब की खेप भेज दी जाती है। कमाई का चस्का लगने के बाद गांव के कारोबारी तस्करों से शराब लेने के लिए खुद पहुंचने लगते हैं। इलाकाई पुलिस है कि उसे इसकी कानो कान तक भनक नहीं है। बीट के कुछ सिपाहियों को इसकी जानकारी है लेकिन उनका काम फिट होने की वजह से मामले में चुप्पी साधे रहते हैं। ।
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कारोबारियों को प्राप्त है असरदारों का संरक्षण
दोआबा में अवैध शराब के कारोबार में लिप्त लोगों को स्थानीय असरदारों का संरक्षण प्राप्त है। इसके चलते इलाकाई पुलिस भी मामले में टांग नहीं फंसाती। पुलिस का मुंह बंद करने के बाद कारोबारी बेखौफ होकर धंधे को अंजाम दे रहे हैं। यदि कभी किसी पुलिस वाले ने टांग फंसाने की कोशिश की तो असरदार के बीच में आने के बाद पूरा मामला फौरन शांत हो जाता है।
कई बार बरामद हो चुकी तस्करी की शराब
दोआबा में तस्करी कर लाई जाने वाली अवैध शराब को इलाकाई पुलिस ने कई बार बरामद किया है। पिछले दिनों महेवाघाट पुलिस ने एक पिकअप में लादकर लाई जा रही अवैध शराब को बरामद करने में सफलता हासिल की थी। इससे पहले कोखराज, पूरामुफ्ती और सैनी पुलिस ने भी ट्रकों में लादकर ले जाई जा रही अवैध शराब को बरामद किया था। इसके बावजूद दोआबा में अवैध शराब का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है।
पइंसा पुलिस की मिलीभगत से क्षेत्र के कई गांव में शराब का अवैध कारोबार धड़ल्ले से हो रहा है। गांव-गांव हो रहे शराब के अवैध कारोबार ने बहू-बेटियों का घर से बाहर निकलना दूभर कर दिया है।
पइंसा क्षेत्र में शराब का अवैध कारोबार पुलिस की सरपरस्ती में सिर चढ़ कर बोल रहा है। ग्रामीणोें की शिकायत है कि क्षेत्र के पइंसा, अनेठा, बिगिनियापुर, पतीकापुरवा आदि गांव में देशी शराब का कारोबार बड़े पैमाने पर हो रहा है। वर्ग विशेष के लोगों ने इस गोरखधंधे को कुटीर उद्योग के रूप में फैला कर कमाई का जरिया बना लिया है।
शिकायत है कि इलाकाई पुलिस भी इन अड्डों से मोटी रकम बंध जाने से अपना खामोश समर्थन दिए रहती है। पुलिस संरक्षण होने से कारोबारी एवं नशा के शौकीनों के लिए फायदेमंद रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां भी शराब को अत्यधिक नशीला बनाने के लिए केमिकल का प्रयोग किया जाता है। केमिकल की मिलावट में जरा सी चूक होने पर शराब के जहरीली हो जाने का भी खतरा बना रहता है। कहते हैं कि इस कारोबार में लिप्त लोग अपने को खतरों का खिलाड़ी ही मानते हैं। एसओ पइंसा का कहना है कि पुलिस के संज्ञान में कहीं भी शराब का अवैध कारोबार नहीं हो रहा है।