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युवा हो रहे कैशलेश, मजदूर व किसान परेशान
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sun, 25 Dec 2016 12:46 AM IST
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पीएम मोदी ने नोटबंदी की घोषणा करते हुए 50 दिन मांगे थे। अभी छह दिन शेष बचे हैं, लेकिन मारामारी के इस दौर से निपटने के लिए युवाओं ने कैशलेश का तरीका अपनाना शुरू कर दिया है। कारोबारियों ने भी इसमें तेजी दिखाई है। एक महीने के भीतर जनपद में 50 से ज्यादा स्वैप व पीओएस मशीन लग चुकी है। इस कैशलेश व्यवस्था से मजदूर व किसान जरूर दूर भाग रहे हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि उन्हें इस व्यवस्था पर विश्वास नहीं है। न ही उनके पास एटीएम व डेबिट कार्ड है। जिसके जरिए वह इस व्यवस्था में शामिल हो सकें।
जिले की लगभग 17 लाख आबादी है। इनमें से 25 फीसदी युवा हैं। अधिकांश लोग किसान व मजदूर वर्ग से जुड़े हैं। नोटबंदी के बाद सरकार ने कैशलेश व्यवस्था पर जोर दिया है। इसका असर जिले में महज 15 फीसदी लोगों पर हुआ है। कैशलेश व्यवस्था पर नौकरी-पेशा व संपन्न परिवारों को ही भरोसा है। छोटे कारोबारी से लेकर बड़े कारोबारियों ने भी कैशलेश व्यवस्था को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है। सिराथू में नोटबंदी के बाद अब तक 28 स्वैप व पीओएस मशीनें लग चुकी हैं। इनमें छोटे कारोबारी भी शामिल हैं। यही हाल मंझनपुर का भी है। जिला मुख्यालय की सात दुकानों में पहले से पीओएस मशीनें लगी थी, लेकिन नोटबंदी के बाद से अचानक इसकी मांग बढ़ी।
अब तक 20 मशीनें लग चुकी हैं। इन मशीनों का इस्तेमाल सरकारी नौकरी करने वाले अथवा पढ़े-लिखे परिवार के लोग ही करते हैं। किसान व मजदूर इस मशीन से दूर भागते हैं। मंझनपुर के कारोबारी नीरज अग्रहरि बताते हैं कि उनके यहां तीन साल से मशीन लगी है। नोटबंदी के इस मशीन का इस्तेमाल बढ़ गया है, लेकिन इस मशीन का इस्तेमाल सरकारी कर्मचारी अथवा पढ़े लिखे लोग ही करते हैं। किसान व मजदूर इस पर भरोसा ही नहीं करते हैं, जबकि उनको इसकी बारीकियां भी वह सिखाने का प्रयास करते हैं।
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न एटीएम व डेबिट कार्ड, कैसे हों कैशलेश
डेढ़ लाख मनरेगा मजदूर, 60 हजार जनधन खाता धारक, लगभग दो लाख कामगार। सबके खाते खुले हैं। इनके पास न तो एटीएम कार्ड है, न ही डेबिट कार्ड। कैशलेश व्यवस्था में यह कैसे शामिल हों। इनको यही नहीं सूझ रहा है। दूसरी सबसे बड़ी बात यह कि इनमें से 70 फीसदी लोग अनपढ़ हैं। किसान व मजदूरों का कहना है कि यदि वह एटीएम व डेबिट कार्ड लें भी लेते हैं तो क्या भरोसा कि दुकानदार उनके कार्ड का सही इस्तेमाल करेगा। इचौली के रामभरोसे का कहना है कि वह मनरेगा मजदूर हैं। एटीएम बैंक दे नहीं रहा है। यही हाल दीवर कोतारी के रामसजीवन का है। उनका कहना है कि जनधन खाता उन्होंने खुलवाया है, लेकिन बैंक एटीएम कार्ड नहीं दे रहा है। ऐसे में वह कैसे किसी मशीन के जरिए सामान की खरीदारी कर सकते हैं।
एलडीएम दिनेश मिश्र का कहना है कि नोटबंदी के बाद कैशलेश व्यवस्था ने तेजी पकड़ी है। पीओएस व स्वैप मशीन की मांग बढ़ी है। जल्द से जल्द ग्राहकों को कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे।
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जिले की लगभग 17 लाख आबादी है। इनमें से 25 फीसदी युवा हैं। अधिकांश लोग किसान व मजदूर वर्ग से जुड़े हैं। नोटबंदी के बाद सरकार ने कैशलेश व्यवस्था पर जोर दिया है। इसका असर जिले में महज 15 फीसदी लोगों पर हुआ है। कैशलेश व्यवस्था पर नौकरी-पेशा व संपन्न परिवारों को ही भरोसा है। छोटे कारोबारी से लेकर बड़े कारोबारियों ने भी कैशलेश व्यवस्था को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है। सिराथू में नोटबंदी के बाद अब तक 28 स्वैप व पीओएस मशीनें लग चुकी हैं। इनमें छोटे कारोबारी भी शामिल हैं। यही हाल मंझनपुर का भी है। जिला मुख्यालय की सात दुकानों में पहले से पीओएस मशीनें लगी थी, लेकिन नोटबंदी के बाद से अचानक इसकी मांग बढ़ी।
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अब तक 20 मशीनें लग चुकी हैं। इन मशीनों का इस्तेमाल सरकारी नौकरी करने वाले अथवा पढ़े-लिखे परिवार के लोग ही करते हैं। किसान व मजदूर इस मशीन से दूर भागते हैं। मंझनपुर के कारोबारी नीरज अग्रहरि बताते हैं कि उनके यहां तीन साल से मशीन लगी है। नोटबंदी के इस मशीन का इस्तेमाल बढ़ गया है, लेकिन इस मशीन का इस्तेमाल सरकारी कर्मचारी अथवा पढ़े लिखे लोग ही करते हैं। किसान व मजदूर इस पर भरोसा ही नहीं करते हैं, जबकि उनको इसकी बारीकियां भी वह सिखाने का प्रयास करते हैं।
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न एटीएम व डेबिट कार्ड, कैसे हों कैशलेश
डेढ़ लाख मनरेगा मजदूर, 60 हजार जनधन खाता धारक, लगभग दो लाख कामगार। सबके खाते खुले हैं। इनके पास न तो एटीएम कार्ड है, न ही डेबिट कार्ड। कैशलेश व्यवस्था में यह कैसे शामिल हों। इनको यही नहीं सूझ रहा है। दूसरी सबसे बड़ी बात यह कि इनमें से 70 फीसदी लोग अनपढ़ हैं। किसान व मजदूरों का कहना है कि यदि वह एटीएम व डेबिट कार्ड लें भी लेते हैं तो क्या भरोसा कि दुकानदार उनके कार्ड का सही इस्तेमाल करेगा। इचौली के रामभरोसे का कहना है कि वह मनरेगा मजदूर हैं। एटीएम बैंक दे नहीं रहा है। यही हाल दीवर कोतारी के रामसजीवन का है। उनका कहना है कि जनधन खाता उन्होंने खुलवाया है, लेकिन बैंक एटीएम कार्ड नहीं दे रहा है। ऐसे में वह कैसे किसी मशीन के जरिए सामान की खरीदारी कर सकते हैं।
एलडीएम दिनेश मिश्र का कहना है कि नोटबंदी के बाद कैशलेश व्यवस्था ने तेजी पकड़ी है। पीओएस व स्वैप मशीन की मांग बढ़ी है। जल्द से जल्द ग्राहकों को कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे।