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अंग्रेजी हुकूमत में बने भवन में संचालित हो रहा स्कूल
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sun, 17 Jul 2016 12:34 AM IST
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स्थानीय कस्बे में संचालित हो रहे एक विद्यालय का भवन नौनिहालों की जान पर कभी भी आफत बनकर गिर सकता है। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान बनी इस भवन की छत और दीवार पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। जिम्मेदार हैं कि जानकारी होने के बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
सराय अकिल कस्बे में आदर्श प्राथमिक विद्यालय का संचालन कई सालों से आदर्श बालिका इंटर कालेज के भवन में हो रहा है। अंग्रेजी हुकूमत में बने इस भवन की छत और दीवार पूरी तरह से जर्जर हो चुकी हैं। छत से प्लास्टर के टुकड़े आए दिन बच्चों के सिर पर टूटकर गिर रहे हैं। इस जर्जर भवन की छत कभी भी बच्चों पर आफत बनकर गिर सकती है। इससे स्कूल में कक्षा एक से पांच तक पढ़ने आने वाले नौनिहालों की जान पर खतरा मंडराता रहता है।
ऐसा नहीं है कि मामले की जानकारी स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों को नहीं है। शिक्षकों ने इसकी रिपोर्ट कई बार विद्यालय के प्रधानाचार्य को दी लेकिन आज तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। बारिश के दिनों में तो छत के गिरने का खतरा और बढ़ जाता है। जर्जर छत का बारिश से वजन बढ़ने के कारण हादसा कभी भी हो सकता है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा कि क्या जिम्मेदारों को छत गिरने और बच्चों की जान जाने का इंतजार है। कुछ भी हो यदि जल्द ही इस भवन में नौनिहालों का शिक्षण कार्य बंद नहीं कराया गया तो कभी भी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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बारिश के दिनों में बैठने तक की नहीं रही जगह
जर्जर भवन में संचालित हो रहे आदर्श प्राथमिक विद्यालय में सबसे बुरा हाल बारिश के दिनों में रहता है। प्राथमिक विद्यालय के कक्षा एक से पांच तक की कक्षाएं जिस भवन में चल रही हैं उनकी एक भी छत ऐसी नहीं है जो जगह-जगह से टपकती न हो। ऐसे में बारिश के दिनों में बच्चों को कक्षाओं में बैठने तक की जगह नहीं बचती। यहां तक कि उनकी किताब और कापियां भी भीगकर नष्ट हो जाती हैं।
जर्जर भवन के चलते बंद कराई गई लड़कियों की क्लास
आदर्श प्राथमिक विद्यालय वाले भवन में पहले आदर्श बालिका विद्यालय संचालित होता था। भवन की जर्जर हालत को देख शिक्षकों ने रिपोर्टिंग किया तो बालिकाओं की कक्षाएं संयुक्त रूप से आदर्श इंटर कालेज में संचालित की जाने लगीं। इसके बाद रिक्त पड़े इस भवन में एक से पांच तक के नौनिहालों की क्लास चलाई जाने लगी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब बालिकाओं की कक्षाएं भवन जर्जर होने के कारण यहां बंद कराई गई तो नौनिहालों की कक्षाओं का संचालन क्यों कराया जा रहा है।
भवन के जर्जर होने की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा चुकी है। इसी के चलते छात्राओं की कक्षाएं वहां बंद कराई गई है। विद्यालय में भवन न होने की वजह से वहां पर कक्षाओं का संचालन कराना मजबूरी है। प्रयास सफल रहा तो अगले साल प्राथमिक कक्षाएं दूसरे भवन में शिफ्ट करा दी जाएंगी।
शंकर दयाल त्रिपाठी, प्रधानाचार्य
आदर्श इंटर कालेज, सरायअकिल
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सराय अकिल कस्बे में आदर्श प्राथमिक विद्यालय का संचालन कई सालों से आदर्श बालिका इंटर कालेज के भवन में हो रहा है। अंग्रेजी हुकूमत में बने इस भवन की छत और दीवार पूरी तरह से जर्जर हो चुकी हैं। छत से प्लास्टर के टुकड़े आए दिन बच्चों के सिर पर टूटकर गिर रहे हैं। इस जर्जर भवन की छत कभी भी बच्चों पर आफत बनकर गिर सकती है। इससे स्कूल में कक्षा एक से पांच तक पढ़ने आने वाले नौनिहालों की जान पर खतरा मंडराता रहता है।
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ऐसा नहीं है कि मामले की जानकारी स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों को नहीं है। शिक्षकों ने इसकी रिपोर्ट कई बार विद्यालय के प्रधानाचार्य को दी लेकिन आज तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। बारिश के दिनों में तो छत के गिरने का खतरा और बढ़ जाता है। जर्जर छत का बारिश से वजन बढ़ने के कारण हादसा कभी भी हो सकता है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा कि क्या जिम्मेदारों को छत गिरने और बच्चों की जान जाने का इंतजार है। कुछ भी हो यदि जल्द ही इस भवन में नौनिहालों का शिक्षण कार्य बंद नहीं कराया गया तो कभी भी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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बारिश के दिनों में बैठने तक की नहीं रही जगह
जर्जर भवन में संचालित हो रहे आदर्श प्राथमिक विद्यालय में सबसे बुरा हाल बारिश के दिनों में रहता है। प्राथमिक विद्यालय के कक्षा एक से पांच तक की कक्षाएं जिस भवन में चल रही हैं उनकी एक भी छत ऐसी नहीं है जो जगह-जगह से टपकती न हो। ऐसे में बारिश के दिनों में बच्चों को कक्षाओं में बैठने तक की जगह नहीं बचती। यहां तक कि उनकी किताब और कापियां भी भीगकर नष्ट हो जाती हैं।
जर्जर भवन के चलते बंद कराई गई लड़कियों की क्लास
आदर्श प्राथमिक विद्यालय वाले भवन में पहले आदर्श बालिका विद्यालय संचालित होता था। भवन की जर्जर हालत को देख शिक्षकों ने रिपोर्टिंग किया तो बालिकाओं की कक्षाएं संयुक्त रूप से आदर्श इंटर कालेज में संचालित की जाने लगीं। इसके बाद रिक्त पड़े इस भवन में एक से पांच तक के नौनिहालों की क्लास चलाई जाने लगी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब बालिकाओं की कक्षाएं भवन जर्जर होने के कारण यहां बंद कराई गई तो नौनिहालों की कक्षाओं का संचालन क्यों कराया जा रहा है।
भवन के जर्जर होने की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा चुकी है। इसी के चलते छात्राओं की कक्षाएं वहां बंद कराई गई है। विद्यालय में भवन न होने की वजह से वहां पर कक्षाओं का संचालन कराना मजबूरी है। प्रयास सफल रहा तो अगले साल प्राथमिक कक्षाएं दूसरे भवन में शिफ्ट करा दी जाएंगी।
शंकर दयाल त्रिपाठी, प्रधानाचार्य
आदर्श इंटर कालेज, सरायअकिल