कौशाम्बी : मां को बंदरों से बचाने गए बैंक कैशियर की करंट की चपेट में आने से मौत, मचा कोहराम
सहारनपुर के रवि नगर निवासी अक्षय कुमार (30) पुत्र बृजपाल सिंह बीओबी की देवीगंज शाखा में बतौर कैशियर कार्यरत थे। वह सैनी क्षेत्र के सुभाष नगर में किराए का कमरा लेकर अपनी मां सुषमा देवी और अपनी एक साल की बेटी परि के साथ रह रहे थे।
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सैनी इलाके में शुक्रवार को सुभाष नगर में किराए के घर में रह रहे बैंक आफ बड़ौदा के कैशियर की करंट की चपेट में आ जाने से मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें बचाया नहीं जा सका। बेटे की मौत से बूढ़ी मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है। साथ ही उनकी अबोध बच्ची भी अनाथ हो गई है।
सहारनपुर के रवि नगर निवासी अक्षय कुमार (30) पुत्र बृजपाल सिंह बीओबी की देवीगंज शाखा में बतौर कैशियर कार्यरत थे। वह सैनी क्षेत्र के सुभाष नगर में किराए का कमरा लेकर अपनी मां सुषमा देवी और अपनी एक साल की बेटी परि के साथ रह रहे थे। घटना शुक्रवार की सुबह साढ़े 7 बजे की है। बताते हैं कि युवक की मां छत पर कुड़ा फेंकने गई थी। इस दौरान ऊपर बदंरों की आवाज सुनाई दी।
नीचे मौजूद अक्षय ने सोचा कि कहीं बंदर मां पर हमला न कर दें। वह भागकर ऊपर बंदरो को दौड़ाने जा पहुंचा। बंदर भगाने के दौरान छत पर फिसलन होने से वह गिर गया। इस दौरान उसने लोहे की रेलिंग पकड़ लिया। इस रेलिंग में पहले से करेंट प्रवाहित हो रहा था। करेंट की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से झुलस गया। स्थानीय लोगों की मदद से उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने देखते ही उसे मृत घोषित कर दिया। सैनी कोतवाल भुवनेश कुमार का कहना है कि शव को अपने कब्जे में लेकर पीएम के लिए भेज दिया है। घटना से परिजनों में शोक का माहौल है।
मां मुझे आज सपने में पिता जी आए थे। वह मुझे अपने पास बुला रहे हैं। कह रहे थे कि बेटा तुमने मेरी बहुत सेवा की है। अपनी जिदंगी में बहुत परेशान हो। मेरे पास आ जाओ। मरने से पूर्व यह कहना था बैंक कैशियर अक्षय कुमार का।
शुक्रवार की सुबह करेंट की चपेट में आने से बेटे अक्षय कुमार की मौत मां सुषमा के लिए कुठाराघात जैसा है। वह बताती हैं कि आज सुबह 6 बजे बेटा अक्षय मेरे पास उठकर आया। कहने लगा। मां भोर में पिजा जी सपने में आए थे। बोल रहे थे कि बेटा तुम बहुत परेशान रहते हो। मेरे पास आ जाओ। इसके बाद वह अपने काम में लग गया। उसे क्या पता था कि वह कुछ ही घंटे में इस दुनिया को छोड़ अपने पिता के पास जाने वाला है। सब कुछ पलक झपकते हो गया।
बेटे ने बंदरो के डर से पहला घर भी बदला था। यहां भी बदंरों ने पीछा नहीं छोड़ा। काल बनकर आए बंदर बेटे की मौत का कारण बन गए। बेटा मेरी जान बचाने के लिए छत पर गया था। हलांकि बंदरों ने हमला नहीं किया थ। सिर्फ वे झुंड में हो शोर मचा रहे थे। ऐसा पैर फिसला की हाथ लोहे की रेलिंग से छू गया। देखते ही देखते बेटा इस दुनिया को छोड गया। वह मदद के लिए शोर मचाती रह गई।
चार माह की बेटी को छोडक़र चली गई थी पत्नी
करंट की चपेट में आने से जान गंवाने वाले बैंक कैशियर अक्षय कुमार की एक साल की नन्हीं परी को भला क्या पता कि उसके सिर से पिता की साया सदा-सदा के लिए उठ गया है। वह इतनी बदनसीब है कि चार माह पूर्व उसकी मां भी उसे छोडक़र चली गई है। उसकी दादी उसे पाल रही थी।
करंट की चपेट से जान गंवाने वाले अक्षय कुमार के दाम्पत्य जीवन में बहुत कलह थी। विवाद कर उसकी पत्नी चार माह पूर्व अपनी बेटी परी को छोड कर चली गई। बच्ची को दादी की मदद से अक्षय पालन-पोषण कर रहा था। परी जैसे बेटी को अनाथ होता देख हर किसी का गला भारी हो जा रहा था।