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डीएपी के बाद अब यूरिया का संकट
कौशाम्बी ब्यूरो
Updated Mon, 18 Dec 2017 09:49 PM IST
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रबी की खेती शुरू होते ही जिले की साधन सहकारी समितियों में उर्वरक का संकट बना है। डीएपी के बाद अब यूरिया की किल्लत खड़ी हो गई है। समितियों में यूरिया न होने से किसान महंगे दामों पर निजी दुकानदारों से खाद खरीदने को मजबूर हैं।
रबी की बुवाई नवंबर माह के पहले सप्ताह से ही शुरू हो जाती है। 15 नवंबर के बाद से रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई जोर पकड़ लेती है। गेहूं की बुवाई करने वाले किसानों को डीएपी की आपूर्ति जिले की 62 साधन सहकारी समितियों से होती है। इस साल बुवाई शुरू होने के बाद किसानों को पहले डीएपी के संकट से जूझना पड़ा। किसानों ने किसी तरह गेहूं की बुवाई कर ली तो अब उन्हें पहली सिंचाई के बाद यूरिया के संकट से जूझना पड़ रहा है। 62 समितियों में लगभग 40 से यूरिया गायब है।
समितियों में यूरिया न मिलने से किसान खुले बाजार में दुकानदारों से उर्वरक खरीदकर फसलों में डालने के लिए मजबूर हैं। बानगी के तौर में साधन सहकारी समिति म्योहर, संचवारा, बसुहार आदि को लिया जा सकता है। यहां पर पखवारे भर से यूरिया गायब है। जिले में यूरिया के संकट से जूझ रहे किसानों का हाल बेहाल है। विभागीय सूत्रों की मानें तो परिवहन समस्या के चलते समितियों में यूरिया नहीं पहुंच पा रही है।
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रबी की बुवाई नवंबर माह के पहले सप्ताह से ही शुरू हो जाती है। 15 नवंबर के बाद से रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई जोर पकड़ लेती है। गेहूं की बुवाई करने वाले किसानों को डीएपी की आपूर्ति जिले की 62 साधन सहकारी समितियों से होती है। इस साल बुवाई शुरू होने के बाद किसानों को पहले डीएपी के संकट से जूझना पड़ा। किसानों ने किसी तरह गेहूं की बुवाई कर ली तो अब उन्हें पहली सिंचाई के बाद यूरिया के संकट से जूझना पड़ रहा है। 62 समितियों में लगभग 40 से यूरिया गायब है।
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समितियों में यूरिया न मिलने से किसान खुले बाजार में दुकानदारों से उर्वरक खरीदकर फसलों में डालने के लिए मजबूर हैं। बानगी के तौर में साधन सहकारी समिति म्योहर, संचवारा, बसुहार आदि को लिया जा सकता है। यहां पर पखवारे भर से यूरिया गायब है। जिले में यूरिया के संकट से जूझ रहे किसानों का हाल बेहाल है। विभागीय सूत्रों की मानें तो परिवहन समस्या के चलते समितियों में यूरिया नहीं पहुंच पा रही है।
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