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रत्नावली रत्नों की माला आर दुनिया रत्नों की खान:बापू

Sat, 13 Apr 2019 07:10 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 13 Apr 2019 07:10 PM IST
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रत्नावली रत्नों की माला आर दुनिया रत्नों की खान:बापू
रत्नावली रत्नों की माला और दुनिया रत्नों की खान:बापू
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रत्नावली के गांव महेवाघाट में चल रही नौ दिवसीय रामकथा के आठवें दिन बोले संत मोरारी बापू
फोटो नं-
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। रत्नावली के गांव महेवाघाट में चल रही नौ दिवसीय रामकथा के आठवें दिन संत मोरारी बापू ने कहा कि रत्न शब्द वेदकालीन है। रामचरित मानस स्वयं एक वेद है। वेद जब व्यासपीठ पर होता है तब कोई मर्यादा लागू नहीं होती है।
संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से आयोजित रामकथा मानस रत्नावली के प्रसंग में बापू ने शिव-पार्वती वंदना के साथ अयोध्याकांड की शरुआत करते हुए राम की मन:स्थिति का वर्णन किया। बताया कि मानस का बालकांड बचपन को और अयोध्याकांड जवानी को दर्शाता है। सूर्य को सदैव दूसरों के लिए ही जलना पड़ता है। संसार में भरत को जो श्रद्धापूर्वक सुनेगा व जानेगा उसे सीताराम के श्रीचरणों में अवश्य स्थान मिलेगा। बापू ने मानस के तहत शनिवार को राम वनवास, भरत राजतिलक, सीताहरण, हनुमान द्वारा राम सुग्रीव की मैत्री, लंका दहन, सेतु निर्माण आदि का वृत्तांत किया। बताया कि रत्नावली रत्नों की माला है। रत्न का कहीं ना कहीं तेज ऊर्जावान तत्व से सम्बन्ध होता है। रत्न हमें जीव के शरीर से, खनिज से, वनस्पति से, अग्नि के तत्व से प्राप्त होते हैं। भगवान राम नीलमणि रत्न है। बौद्धकालीन परम्परा में बुद्ध रत्न हैं। धर्म और एकता रत्न है। दुनिया रत्नों की खान है। संसार में कुछ भी आकस्मिक नहीं होता है, सब कुछ सुनियोजित होता है। अनिश्चितता शोकदायक होती है। लेकिन जो निश्चित है उसका आनंद अवश्य लेना चाहिए। दुनिया रत्नों की खान है और रत्न खोजने पड़ते हैं। तब जाकर प्राप्त होते हैं। रत्न को जानने के लिए मर्यादा चाहिए, बोध चाहिए। एक अच्छा बेटा बाप के लिए रत्न है जो अपने स्वभाव से पिता को प्रसन्न रखे। एक अच्छा शिष्य गुरू के लिए रत्न है। घर का मुख्य व्यक्ति परिवार के लिए रत्न है और अच्छा भाई, अच्छी बेटी भी रत्न है। इस दौरान मुख्य आयोजनकर्ता मदन पालीवाल, रविन्द्र जोषी, रूपेश व्यास, विकास पुरोहित, मंत्रराज पालीवाल, प्रकाष पुरोहित सहित कई गणमान्य लोगों ने व्यासपीठ पर पुष्प अर्पित कर कथा श्रवण का लाभ लिया।
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बापू ने कहा कि युवाओं को चाहिए कि वह नकारात्मक दृष्टि को छोड़कर सकारात्मकता अपनाएं। हमें मनरूपी दर्पण में देखना चाहिए कि हमारी बुद्धि ठीक है या नहीं। मंथरा की कुमति संशय के कारण कैकेयी में प्रवेश करती हैं। किसी को भी अछूत नहीं समझना चाहिए। बल्कि, संक्रामकता को स्पर्र्श नहीं करना चाहिए।
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भक्ति की सूक्ष्मता के लिए नौ चीजें छोड़ें
मंझनपुर। साधनों की स्थूलता से ही सूक्ष्मता का परिचय होता है। भक्ति की सूक्ष्मता को जानने के लिए नौ चीजें छोड़नी पड़ती है। धनवान कृपण ना बनें, धन का अहंकार ना आए तथा धन के द्वारा दूसरों के साथ छल कपट ना करें। स्वधर्म नही छोड़ना चाहिए। चेतन को प्रकट करना चाहिए। सुख और दुख का द्वन्द्व भी छोड़ना पड़ता है।


नौ दिवसीय राम कथा का समापन आज
मंझनपुर। संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से रत्नावली धाम के महेवा घाट पर पिछले आठ दिनों से चल रही अभूतपूर्व रामकथा मानस रत्नावली का विराम रविवार को होगा। यह जानकारी कथा के मुख्य आयोजन कर्ता मदन पालीवाल ने दी।
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