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कलयुग में राम महामंत्र व तारक मंत्र है:मोरारी बापू

Wed, 10 Apr 2019 11:51 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 10 Apr 2019 11:51 PM IST
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कलयुग में राम महामंत्र व तारक मंत्र है:मोरारी बापू
कलियुग में राम महामंत्र व तारक मंत्र है : मोरारी बापू
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रत्नावली के गांव महेवा में बापू की रामकथा सुनने उमड़ा सैलाब
फोटो नं-
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। गोस्वामी तुलसीदास की पत्नी रत्नावली के गांव महेवा में चल रही नौ दिवसीय रामकथा के पांचवें दिन संत मोरारी बापू ने कहा कि कलियुग में राम महामंत्र व तारक मंत्र है। जो जगत को तार रहा और तैरना सिखा रहा है। नाम के प्रभाव से ही जिसको विश्राम मिले वो राम है। राम तत्व आदि अनादि है। जब कोई नहीं था तब भी राम थे और आज भी राम हैं। मेरे पास राम नाम है जो बीज मंत्र भी है। राम के नाम से बड़ा कोई भजन नहीं है। गोस्वामी तुलसीदास की पूरी साधना हरि नाम पर आधारित है। प्रभु का नाम जाप करने से ध्यान, यज्ञ, पूजा और अर्चना हो जाती हैं। प्रेम के बिना ना तो राम का और ना ही रामचरित मानस प्रकट होता है। तुलसी होने के लिए श्रुति जरूरी है।
संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से आयोजित रामकथा श्रवण के लिए उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए बापू ने कहा कि सदाचारी व्यक्ति सदा सुखी रहता है। दुखी वही होता है जो दूसरों की प्रगति को देखकर ईर्ष्या करता है। बताया कि ब्रह्म ही निर्दोष है और बाकी सब दोषी हैं। इतिहास में तथ्यों को मिलाना पड़ता है। अध्यात्म में सत्य को मिलाना पड़ता है। इसलिए सत्य को समझना आवश्यक है। संसार में विचार बहुत होते हैं। लेकिन स्वीकार बहुत कम होते हैं। सत्य को स्वीकारना सत्संग है। कान्ता की आशक्ति भक्ति का एक प्रकार है। राम नाम जपने वालों के लिए नाम मंत्र जरूरी है। परम तत्व की प्राप्ति हो जाए तब भी हमें यज्ञ, तप और दान को कभी नही़ छोड़ना चाहिए। चित्त प्रसन्न रहे वही परमात्मा के दर्शन का द्वार है। भरत वही है जो सबका पोषण करे और किसी का शोषण नहीं करे। ऐसा नहीं करने वाले पर मंत्र काम नहीं करेगा। किसी से शत्रुता या कटुता ना रखे वो शत्रुघ्न है। लक्ष्मण के रूप में हम जितने का आधार बन पाएं बनना चाहिए। तभी नाम मंत्र की सार्थकता है। इस दौरान बुधवार को मुख्य आयोजनकर्ता मदन पालीवाल, रविन्द्र जोषी, रूपेष व्यास, विकास पुरोहित, मंत्रराज पालीवाल, प्रकाश पुरोहित सहित तमाम लोगों ने व्यासपीठ पर पुष्प अर्पित कर कथा श्रवण का लाभ लिया।
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जीवन बड़ा मूल्यवान है और विश्वास कभी निराश नहीं होता है। कोई किसी के पास बिना काम के नहीं जाता है। संसार में ऐसा कोई नहीं है जिसने भूल नही की हो। संत को कोई पापी दिखाई ही नही देता है। कई प्रकार की मृत्यु ने हमें घेर रखा है लेकिन कोई रत्ना मिल जाए तो जीवन का उद्धार हो जाता है। चित्त प्रसन्न रहे वही परमात्मा दर्शन का द्वार है। संशय मौत है और विश्वास जीवन है।
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ताकत से बड़ी तकनीक है
मंझनपुर। राम ने धनुष ताकत से नहीं बल्कि, तकनीक से तोड़ा था। जिसने आत्मा को बांध ली हो वो निंदक नहीं हो सकता है। आत्मवान के पास अद्भुत कला होती है। जो उसे निन्दा होने से बचा देती है। विश्व मंगल के लिए छोटी सी अधार्मिकता भी देश व काल के लिए धार्मिक सिद्ध हो जाती है। आतंकियों का मारना कोई पाप नही है।
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संसार में तीन रत्न होते हैं
मंझनपुर। संसार में तीन रत्न विद्या, श्री और दुर्गा होते हैं। रत्नावली में ये तीनों रत्न थे। मातृ शक्ति सामान्य नही होती है। नारी अबला नही सबला होती है। इसी तरह से सती के सात विधान होते हैं। जिसके जीवन में नख, शिख, सत हो वो सती है। तप सती का दूसरा विधान है। क्षमा करना, शौर्य, धैर्य, पति, प्रियता तथा प्यार व समर्पण सत्य के अन्य विधान है। रत्नावली में सती के सभी विधान सिद्ध होते है। संशय या संदेह इंसान का नाश करता है। भागवत कथा एवं प्रभु सुमिरन करने से संदेह मिट जाता है। जब तक संदेह का नाश नहीं होता तब तक कथा श्रवण करों और बाद में तो आप स्वयं अभ्यस्त हो जाओंगे। किसी भी बुद्ध पुरुष के पास चुप बैठने े अथवा साक्षी बन जाने से संदेह समाप्त होता है। जितना हो सके जीवन में मौन धारण करना चाहिए। ज्योतिष के लिए मर्मज्ञ जानकार का होना आवश्यक है। बापू ने कहा कि मैं इस विद्या को नहीं मानता हूं। लेकिन ज्योतिष में मेरी रूचि है। वर्तमान की कार्यशैली पर ही भविष्य निर्भर रहता है। इसलिए हमें सिर्फ अपने कर्म पर ही ध्यान देना चाहिए। ज्योतिषियों से हमें सिर्फ यह पूछना चाहिए कि हरि कब मिलेंगे।
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विविध संस्कृतियों का समागम
मंझनपुर। मोरारी बापू की रामकथा में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेष, बिहार, दिल्ली सहित अन्य शहरों से आए श्रोता मानस रत्नावली का आनंद रस लूट रहे हैं। वहीं जिले के ग्रामीणांचलों से आने वाला जन सैलाब भी कथा सागर में समाकर संस्कृतियों का मेल करा रही है। कही ठेट देहात की बोली कानों में गूजं रही है तो कही गुजराती, राजस्थानी, मराठी व मेवाती प्रभु प्रसंगों की चर्चा का जरिया बनी हुई है। कथा से पूर्व आस पास के गांवों से लोगों के पहुंचने को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। दूर दराज से भी लोग हजारों की संख्या में कथा स्थल पर पहुंच रहे है। कई नि:शक्तजन भी व्हील चैयर एवं अन्य शहारों से कथा श्रवण को आ रहे है। हर आयु वर्ग के लोग बापू की कथा सुनने पहुुच रहे हैं।

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जोशी कल देंगे अपनी प्रस्तुति
मंझनपुर। संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से आयोजित रामकथा के तहत सांस्कृतिक संध्या में शुक्रवार की शाम शरमन जोशी अपने प्रमुख नाटक राजू, राजाराम और मैं की प्रस्तुति देंगे।
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