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सीबीआई ने डाला डेरा, डीएम से मांगे अभिलेख
Updated Tue, 25 Jul 2017 12:39 AM IST
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सीबीआई ने डाला डेरा, डीएम से मांगे अभिलेख
-वर्ष 2012 से हुए खनन की होगी जांच
-अवैध खनन का रहस्य उजागर करने के लिए इंस्पेक्टर ने शुरू की पड़ताल
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अवैध खनन की विस्तृत जांच के लिए डेरा डाल दिया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर पिछले साल प्रारंभिक जांच करने के बाद सीबीआई ने हाल ही में खनन निरीक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। रिपोर्ट लिखने के बाद सीबीआई ने कौशाम्बी में वर्ष 2012 से हुए अब तक के खनन की गहराई से जांच शुरू कर दी है। जांच अधिकारी ने डीएम से खनन विभाग के अभिलेख मांगे हैं।
सपा सरकार में वर्ष 2016 में जिले में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हुआ था। जिले में एक भी वैध पट्टा नहीं था। इसके बावजूद सभी घाटों से सिंडीकेट ने बालू की निकासी कराई थी। अवैध खनन करने वालों को प्रशासन का पूरा संरक्षण प्राप्त था। कार्रवाई न होने पर लोगों ने हाईकोर्ट में रिट दाखिल की थी। उच्च न्यायालय ने 27 जुलाई वर्ष 2016 को सीबीआई को प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच शुरू की थी। सभी घाटों को खंगलवाया और साथ ही बड़े पैमाने पर डंप बालू सीज कराया। इसके अलावा रैन बसेरा में बालू कारोबारियों को बुलाकर पूछताछ की गई। सीबीआई की इस कार्रवाई से जिले में हड़कंप मच गया था। जांच के बाद सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपने के साथ ही 30 जून वर्ष 2017 को खनन निरीक्षक अरविंद कुमार व अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला भी दर्ज कर लिया। रिपोर्ट दर्ज करने के बाद सीबीआई ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। सीबीआई अब वर्ष 2012 से अब तक हुए अवैध खनन की परत-दर-परत उधेड़ने में जुट गई है। विवेचना के लिए इंस्पेक्टर भी नामित कर दिया है। विवेचना मिलते ही इंस्पेक्टर ने अपनी टीम के साथ कौशाम्बी मे डेरा डाल दिया है। सोमवार को सीबीआई इंस्पेक्टर ने जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा से मुलाकात की। साथ ही जांच के लिए संबंधित अभिलेख मांगे। सीबीआई के दोबारा दस्तक देते ही खनन विभाग में हड़कंप मच गया है।
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-वर्ष 2012 से हुए खनन की होगी जांच
-अवैध खनन का रहस्य उजागर करने के लिए इंस्पेक्टर ने शुरू की पड़ताल
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अवैध खनन की विस्तृत जांच के लिए डेरा डाल दिया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर पिछले साल प्रारंभिक जांच करने के बाद सीबीआई ने हाल ही में खनन निरीक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। रिपोर्ट लिखने के बाद सीबीआई ने कौशाम्बी में वर्ष 2012 से हुए अब तक के खनन की गहराई से जांच शुरू कर दी है। जांच अधिकारी ने डीएम से खनन विभाग के अभिलेख मांगे हैं।
सपा सरकार में वर्ष 2016 में जिले में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हुआ था। जिले में एक भी वैध पट्टा नहीं था। इसके बावजूद सभी घाटों से सिंडीकेट ने बालू की निकासी कराई थी। अवैध खनन करने वालों को प्रशासन का पूरा संरक्षण प्राप्त था। कार्रवाई न होने पर लोगों ने हाईकोर्ट में रिट दाखिल की थी। उच्च न्यायालय ने 27 जुलाई वर्ष 2016 को सीबीआई को प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच शुरू की थी। सभी घाटों को खंगलवाया और साथ ही बड़े पैमाने पर डंप बालू सीज कराया। इसके अलावा रैन बसेरा में बालू कारोबारियों को बुलाकर पूछताछ की गई। सीबीआई की इस कार्रवाई से जिले में हड़कंप मच गया था। जांच के बाद सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपने के साथ ही 30 जून वर्ष 2017 को खनन निरीक्षक अरविंद कुमार व अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला भी दर्ज कर लिया। रिपोर्ट दर्ज करने के बाद सीबीआई ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। सीबीआई अब वर्ष 2012 से अब तक हुए अवैध खनन की परत-दर-परत उधेड़ने में जुट गई है। विवेचना के लिए इंस्पेक्टर भी नामित कर दिया है। विवेचना मिलते ही इंस्पेक्टर ने अपनी टीम के साथ कौशाम्बी मे डेरा डाल दिया है। सोमवार को सीबीआई इंस्पेक्टर ने जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा से मुलाकात की। साथ ही जांच के लिए संबंधित अभिलेख मांगे। सीबीआई के दोबारा दस्तक देते ही खनन विभाग में हड़कंप मच गया है।
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