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हैंडपंपों का रीबोर कराने से कतरा रहे ग्राम प्रधान

Sat, 15 Jul 2017 07:14 PM IST
Updated Sat, 15 Jul 2017 07:14 PM IST
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हैंडपंपों का रीबोर कराने से कतरा रहे ग्राम प्रधान
हैंडपंप बेपानी, प्रधान कर रहे मनमानी
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शासन के निर्देश के बावजूद रीबोर कराने से कतरा रहे ग्राम प्रधान
राज्य और चौदहवें वित्त के धन से रिबोर कराने की मिली है छूट
ग्रामीण इलाके में चार हजार से अधिक हैंडपंपों को हैं रीबोर का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। गांवों में बोर बर्स्ट होने के चलते ठप पड़े हैंडपंपों के दिन बहुरते नहीं दिख रहे हैं। शासन के फरमान के बाद निर्धारित इस्टीमेट पर बोर कराने को लेकर पहले तो प्रधानों ने विरोध भी जताया था। मगर उच्चाधिकारियों के दबाव को देखते हुए प्रधान महज कोरम पूरा करते दिख रहे हैं। उनके द्वारा गांव में खराब हैंडपंपाें को रीबोर कराने के नाम पर दो-चार की सूची बनाई गई है। बाकी हैंडपंपों का रीबोर अधर में लटका है। इससे गांवों में पेयजल संकट बरकरार है।
जिले की 498 ग्राम सभाओं मे लगभग 25 हजार इंडिया मार्का हैंडपंप जल निगम ने लगवा रखा है। तेजी से नीचे खिसक रहे भूगर्भ जल स्तर के चलते 20 फीसदी हैंडपंपों का बोर बर्स्ट हो चुका है। शासन से पैसा नहीं मिलने की वजह से इन हैंडपंपों का रीबोर कई साल से नहीं हो पा रहा था। इसके चलते ग्रामीणों को पेयजल के संकट से गुजरना पड़ रहा है। सूबे में आई योगी सरकार ने हैंडपंपों का रीबोर राज्य व चौदहवें वित्त की रकम से कराने की छूट ग्राम प्रधानों को दे दी है। इसके बाद ब्लॉक स्तरीय टीम लगाकर गांवों में खराब व रीबोर लायक हैंडपंपों का सत्यापन कराया गया तो 4416 हैंडपंपों का बोर बर्स्ट मिला। शासन के निर्देश पर जल निगम द्वारा सामान्य व डार्क जोन में बोरिंग का अलग-अलग इस्टीमेट निर्धारित कर ग्राम प्रधानों को बोरिंग कराने का निर्देश दिया गया। निर्धारित इस्टीमेट पर रिबोर कराने की जानकारी ग्राम प्रधानों को हुई तो उन्हें सांप सूंघ गया। इसके विरोध में प्रधानों ने डीएम व सीडीओ कार्यालय में इस्टीमेट कम होने की शिकायत भी कई। अफसरों से कोई सहानुभूति नहीं मिलने पर अब ग्राम प्रधान रिबोर के नाम पर महज कोरम पूरा कर रहे हैं। वह अपने चहेतों के दरवाजे लगे हैंडपंपों का रीबोर कराकर बाकी को लंबित किए हुए हैं। इससे ग्रामीणों की पेयजल की समस्या दूर होने का नाम नहीं ले रही है। सूत्रों का मानना है कि ग्रामसभाओं में राज्य व चौदहवें वित्त की रकम ग्राम प्रधान मनमानी तरीके से खर्च कर मोटी कमाई करते हैं। हैंडपंप रीबोर में बचत नहीं होने के चलते वह कतरा रहे हैं।
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इनसेट
महज 895 हैंडपंपों का हो सका रीबोर
हैंडपंपों का रिबोर कराने में ग्राम प्रधान कितनी रुचि ले रहे हैं यह बताने के लिए डेढ़ माह में जुटाए गए आंकड़े पर्याप्त हैं। जून से 15 जुलाई तक 498 ग्राम सभाओं में महज 895 हैंडपंपों का रीबोर हो सका है। जबकि 3521 हैंडपंपों का रिबोर अभी भी होना है। खाते में पर्याप्त पैसा होने के बावजूद ग्राम प्रधान पेयजल जैसे महत्वपूर्ण मामले में चुप्पी साधे हैं।
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क्या कहते हैं डीडीओ
हैंडपंपों का शतप्रतिशत रीबोर कराने का निर्देश ग्राम प्रधानों को दिया गया है। इसकी समय-समय पर समीक्षा भी की जा रही है। जब तक एक-एक हैंडपंपों का रीबोर नहीं हो जाता तब तक बोरिंग का काम अनवरत रूप से चलता रहेगा। जिस प्रधान द्वारा रीबोरिंग में शिथिलता बरती जाएगी उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
डीके दोहरे, डीडीओ
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