{"_id":"5c02da3abdec22417f79f819","slug":"31543690810-kaushambi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"49 से 112 करोड़ हो गई लागत, फिर भी नहीं बन सका यमुना में पुल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
49 से 112 करोड़ हो गई लागत, फिर भी नहीं बन सका यमुना में पुल
Updated Sun, 02 Dec 2018 12:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंझनपुर। अटकी, भटकी, लटकी परियोजनाओं को पूरा करने का दावा करने वाली भाजपा सरकार में ही बहु प्रतीक्षित महिला घाट पर निर्माणाधीन यमुना पुल सियासत का शिकार है। चित्रकूट व कौशाम्बी जिले को जोड़ने वाले इस पुल की लागत सात साल में ढाई गुना बढ़ गई। पर, काम महज एक चौथाई ही हो सका है। कछुए की चाल से बन रहे पुल की रफ्तार देख 2022 तक निर्माण पूरा होने की संभावना नहीं दिख रही है।
वर्ष 2011 में तत्कालीन बसपा सरकार के लोक निर्माण मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने यमुना नदी पर मऊ-महिला घाट पर पुल का शिलान्यास किया था। उस वक्त पुल की लागत 40.53 करोड़ रुपये (एप्रोच रोड सहित 49.54 करोड़) थी। सूत्रों की मानें तो पुल को लेकर शुरू से ही सियासत होती रही। इस पार के कुछ लोग यमुना में पुल का निर्माण नहीं चाहते हैं। पर, सत्ता की हनक के चलते उनकी नहीं चली। लेकिन 2012 में सत्ता परिवर्तन हो गया। सूबे में सपा की सरकार बनते ही पुल निर्माण पर ग्रहण लग गया।
शासन स्तर से धनराशि ही नहीं अवमुक्त की गई। वर्ष 2013-14 व 14-15 में करीब दो साल तक निर्माण कार्य ठप हो गया था। एक बार फिर निजाम बदला और जिले के केशव मौर्या को प्रदेश का डिप्टी सीएम व लोक निर्माण मंत्री बनाया गया तो कौशाम्बी के बाशिंदों को पुल निर्माण में तेजी आने की उम्मीद जगी। पर, डेढ़ साल गुजरने के बावजूद हालात जस के तस हैं। दूसरी तरफ कछुए की चाल से चल रहे निर्माण कार्य की वजह से पुल की लागत जरूर बढ़ गई। कई बार एस्टीमेट तैयार किया जा चुका है। कार्यदायी संस्था सेतु निगम के मुख्य परियोजना प्रबंधक डीआर विद्यार्थी ने बताया कि 112 करोड़ का रिवाइज एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया है।
विज्ञापन
चार साल में पूरा होना था निर्माण
जिस वक्त पुल स्वीकृत हुआ था। उस दौरान परियोजना पूरी करने के लिए चार साल का समय दिया गया था। पर, चार की जगह सात साल से अधिक वक्त गुजर गया। इसके बावजूद महज एक चौथाई ही काम हो सका। जानकारों का कहना है कि यही रफ्तार रही तो अगले दस साल तक महिला में यमुना पुल नहीं तैयार हो सकेगा।
32 की जगह बनेंगे 41 स्पान
महिला घाट पर निर्माणाधीन पुल पहले 32 स्पान का बनना था। इसी हिसाब से एस्टीमेट स्वीकृत हुआ। पुल निर्माण के लिए पूर्व में स्वीकृत 40.53 करोड़ रुपये की समूची धनराशि अवमुक्त भी हो गई। पर, अब पुल में नौ स्पान बढ़ाकर 41 किए जाएंगे। प्रोजेक्ट मैनेजर डीआर विद्यार्थी ने बताया कि काम प्रारंभ करने पर यमुना का पाट ज्यादा चौड़ा दिखा। इस वजह से स्पान बढ़ाए जाएंगे।
चट्टानों की कटाई से देरी का दे रहे हवाला
स्पान तैयार करने के लिए यमुना की धारा में कुंआ खुदाई के दौरान नीचे बड़ी-बड़ी चट्टानें मिल रही हैं। ब्रिज कारर्पोरेशन के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि चट्टानों की कटाई में वक्त लग रहा है। इस वजह से काम की रफ्तार नहीं बढ़ पा रही है।
रामायण सर्किट में मुख्य भूमिका निभाएगा पुल
पिछले दिनों सरकार ने जिले को रामायण सर्किट से जोड़ने का ऐलान किया था। नेपाल से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश होते हुए कौशाम्बी के चरवा से होकर चित्रकूट को जोड़ने का प्लान है। ऐसे में महिला घाट का यह पुल रामायण सर्किट में मुख्य भूमिका निभाते हुए कौशाम्बी जनपद को बुंदेलखंड और अवध प्रान्त को सीधे जोड़ने का काम करेगा।
विज्ञापन
वर्ष 2011 में तत्कालीन बसपा सरकार के लोक निर्माण मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने यमुना नदी पर मऊ-महिला घाट पर पुल का शिलान्यास किया था। उस वक्त पुल की लागत 40.53 करोड़ रुपये (एप्रोच रोड सहित 49.54 करोड़) थी। सूत्रों की मानें तो पुल को लेकर शुरू से ही सियासत होती रही। इस पार के कुछ लोग यमुना में पुल का निर्माण नहीं चाहते हैं। पर, सत्ता की हनक के चलते उनकी नहीं चली। लेकिन 2012 में सत्ता परिवर्तन हो गया। सूबे में सपा की सरकार बनते ही पुल निर्माण पर ग्रहण लग गया।
विज्ञापन
शासन स्तर से धनराशि ही नहीं अवमुक्त की गई। वर्ष 2013-14 व 14-15 में करीब दो साल तक निर्माण कार्य ठप हो गया था। एक बार फिर निजाम बदला और जिले के केशव मौर्या को प्रदेश का डिप्टी सीएम व लोक निर्माण मंत्री बनाया गया तो कौशाम्बी के बाशिंदों को पुल निर्माण में तेजी आने की उम्मीद जगी। पर, डेढ़ साल गुजरने के बावजूद हालात जस के तस हैं। दूसरी तरफ कछुए की चाल से चल रहे निर्माण कार्य की वजह से पुल की लागत जरूर बढ़ गई। कई बार एस्टीमेट तैयार किया जा चुका है। कार्यदायी संस्था सेतु निगम के मुख्य परियोजना प्रबंधक डीआर विद्यार्थी ने बताया कि 112 करोड़ का रिवाइज एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया है।
विज्ञापन
चार साल में पूरा होना था निर्माण
जिस वक्त पुल स्वीकृत हुआ था। उस दौरान परियोजना पूरी करने के लिए चार साल का समय दिया गया था। पर, चार की जगह सात साल से अधिक वक्त गुजर गया। इसके बावजूद महज एक चौथाई ही काम हो सका। जानकारों का कहना है कि यही रफ्तार रही तो अगले दस साल तक महिला में यमुना पुल नहीं तैयार हो सकेगा।
32 की जगह बनेंगे 41 स्पान
महिला घाट पर निर्माणाधीन पुल पहले 32 स्पान का बनना था। इसी हिसाब से एस्टीमेट स्वीकृत हुआ। पुल निर्माण के लिए पूर्व में स्वीकृत 40.53 करोड़ रुपये की समूची धनराशि अवमुक्त भी हो गई। पर, अब पुल में नौ स्पान बढ़ाकर 41 किए जाएंगे। प्रोजेक्ट मैनेजर डीआर विद्यार्थी ने बताया कि काम प्रारंभ करने पर यमुना का पाट ज्यादा चौड़ा दिखा। इस वजह से स्पान बढ़ाए जाएंगे।
चट्टानों की कटाई से देरी का दे रहे हवाला
स्पान तैयार करने के लिए यमुना की धारा में कुंआ खुदाई के दौरान नीचे बड़ी-बड़ी चट्टानें मिल रही हैं। ब्रिज कारर्पोरेशन के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि चट्टानों की कटाई में वक्त लग रहा है। इस वजह से काम की रफ्तार नहीं बढ़ पा रही है।
रामायण सर्किट में मुख्य भूमिका निभाएगा पुल
पिछले दिनों सरकार ने जिले को रामायण सर्किट से जोड़ने का ऐलान किया था। नेपाल से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश होते हुए कौशाम्बी के चरवा से होकर चित्रकूट को जोड़ने का प्लान है। ऐसे में महिला घाट का यह पुल रामायण सर्किट में मुख्य भूमिका निभाते हुए कौशाम्बी जनपद को बुंदेलखंड और अवध प्रान्त को सीधे जोड़ने का काम करेगा।