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मां चंद्रघंटा स्वरूप में पूजी गईं जगत जननी
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फोटो नं-31,32 कड़ा स्थित शीतला धाम में मां की झलक पाने को लगी भीड़ व चंद्रघंटा स्वरूप में सजी मां शीतला की प्रतिमा
मां चंद्रघंटा स्वरूप में पूजी गईं जगत जननी
देवी मंदिरों, पंडालों में मां के दर्शन, पूजन को उमड़े श्रद्धालु
मंझनपुर। नवरात्र के तीसरे दिन जिलेभर में जगत जननी के चंद्रघंटा स्वरूप का पूजन किया गया। वहीं मां शीतला के दर्शन को कड़ा धाम समेत जिले भर के देवी मंदिरों, पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। माता के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
आदि शक्ति का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा है। नवरात्र के तीसरे दिन मां के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। मान्यता है कि माता का यह रूप श्रद्धालुओं को यश की प्राप्ति दिलाता है। इनकी उपासना से धन, यश के साथ तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम आदि की प्राप्ति होती है। सोमवार को शक्ति की आराधना के इस पर्व पर मां चंद्रघंटा की पूरे दोआबा में विधिवत पूजा की गई। 51 शक्तिपीठों में शामिल शीतला धाम कड़ा में मां की एक झलक पाने को भक्तों की लाइन भोर से ही लगी रही। श्रद्धालुओं को घंटों लाइन में लगे रहने के बाद मां का दर्शन प्राप्त हुआ। इसके बाद सभी ने श्रद्धा के साथ मां के चरणों में शीश झुकाया। कड़ा धाम के अलावा मंझनपुर स्थित दुर्गा मंदिर, करारी रामलीला मैदान स्थित मां शीतला मंदिर, पश्चिमशरीरा के झारखंडी देवी मंदिर व अढ़ौली स्थित आनंदी माता के मंदिर में भी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा।
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गाय के गले में घंटी बांधने से विरोधी हो जाते हैं अपने
पुराणों के अनुसार देवी के चंद्रघंटा स्वरूप का दर्शन करने के पश्चात जो भक्त गाय के गले में घंटी बांधते हैं। उनके विरोधी भी अपने हो जाते हैं। आचार्य दिनेश शांडिल्य बताते हैं कि घंटी की शंखनाद से चंद्र की ध्वनि निकलती है। जो देवी मां को अति प्रिय लगती है।
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मां चंद्रघंटा स्वरूप में पूजी गईं जगत जननी
देवी मंदिरों, पंडालों में मां के दर्शन, पूजन को उमड़े श्रद्धालु
मंझनपुर। नवरात्र के तीसरे दिन जिलेभर में जगत जननी के चंद्रघंटा स्वरूप का पूजन किया गया। वहीं मां शीतला के दर्शन को कड़ा धाम समेत जिले भर के देवी मंदिरों, पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। माता के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
आदि शक्ति का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा है। नवरात्र के तीसरे दिन मां के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। मान्यता है कि माता का यह रूप श्रद्धालुओं को यश की प्राप्ति दिलाता है। इनकी उपासना से धन, यश के साथ तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम आदि की प्राप्ति होती है। सोमवार को शक्ति की आराधना के इस पर्व पर मां चंद्रघंटा की पूरे दोआबा में विधिवत पूजा की गई। 51 शक्तिपीठों में शामिल शीतला धाम कड़ा में मां की एक झलक पाने को भक्तों की लाइन भोर से ही लगी रही। श्रद्धालुओं को घंटों लाइन में लगे रहने के बाद मां का दर्शन प्राप्त हुआ। इसके बाद सभी ने श्रद्धा के साथ मां के चरणों में शीश झुकाया। कड़ा धाम के अलावा मंझनपुर स्थित दुर्गा मंदिर, करारी रामलीला मैदान स्थित मां शीतला मंदिर, पश्चिमशरीरा के झारखंडी देवी मंदिर व अढ़ौली स्थित आनंदी माता के मंदिर में भी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा।
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गाय के गले में घंटी बांधने से विरोधी हो जाते हैं अपने
पुराणों के अनुसार देवी के चंद्रघंटा स्वरूप का दर्शन करने के पश्चात जो भक्त गाय के गले में घंटी बांधते हैं। उनके विरोधी भी अपने हो जाते हैं। आचार्य दिनेश शांडिल्य बताते हैं कि घंटी की शंखनाद से चंद्र की ध्वनि निकलती है। जो देवी मां को अति प्रिय लगती है।
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