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डीएपी के बाद अब यूरिया का संकट
Updated Mon, 18 Dec 2017 09:21 PM IST
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डीएपी के बाद अब यूरिया का संकट
-ऐन मौके पर सहकारी समितियों से गायब हुई उर्वरक निजी -दुकानदारों से उर्वरक खरीदने को मजबूर किसान
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। रबी की खेती शुरू होते ही जिले की साधन सहकारी समितियों में उर्वरक का संकट बना है। डीएपी के बाद अब यूरिया की किल्लत खड़ी हो गई है। समितियों में यूरिया न होने से किसान महंगे दामों पर निजी दुकानदारों से खाद खरीदने को मजबूर हैं।
रबी की बुवाई नवंबर माह के पहले सप्ताह से ही शुरू हो जाती है। 15 नवंबर के बाद से रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई जोर पकड़ लेती है। गेहूं की बुवाई करने वाले किसानों को डीएपी की आपूर्ति जिले की 62 साधन सहकारी समितियों से होती है। इस साल बुवाई शुरू होने के बाद किसानों को पहले डीएपी के संकट से जूझना पड़ा। किसानों ने किसी तरह गेहूं की बुवाई कर ली तो अब उन्हें पहली सिंचाई के बाद यूरिया के संकट से जूझना पड़ रहा है। 62 समितियों में लगभग 40 से यूरिया गायब है। समितियों में यूरिया न मिलने से किसान खुले बाजार में दुकानदारों से उर्वरक खरीदकर फसलों में डालने के लिए मजबूर हैं। बानगी के तौर में साधन सहकारी समिति म्योहर, संचवारा, बसुहार आदि को लिया जा सकता है। यहां पर पखवारे भर से यूरिया गायब है। जिले में यूरिया के संकट से जूझ रहे किसानों का हाल बेहाल है। विभागीय सूत्रों की मानें तो परिवहन समस्या के चलते समितियों में यूरिया नहीं पहुंच पा रही है।
20 से 30 रुपए प्रति बोरी अधिक ले रहे निजी दुकानदार
साधन सहकारी समितियों में यूरिया खत्म होने के बाद निजी दुकानदारों की बिक्री बढ़ गई है। उर्वरक के निजी दुकानदारों को समितियों में यूरिया संकट का लाभ उठाने में जुट गए हैं। म्योहर निवासी किसान श्रीराम सिंह की मानें तो निजी दुकानों में यूरिया साढ़े तीन सौ रुपए बोरी दी जा रही है जबकि यही यूरिया 320 रुपए प्रति बोरी अभी तक बेची जा रही थी।
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कृषि विभाग की मिली भगत से हो रहा खेल
साधन सहकारी समितियों में यूरिया खत्म होने के बाद निजी दुकानदार यूरिया की प्रति बोरी में किसानों से 20 से 30 रुपए अधिक मुनाफ कमा रहे हैं जबकि किसी भी उर्वरक की बिक्री संबंधित दुकानदारों को निर्धारित मूल्य में करने का लाइसेंस दिया जाता है। निजी दुकानदारों व कृषि विभाग के अफसरों के बीच चल रही साठगांठ के चलते यह खेल जिले के सरायअकिल, म्योहर, बेनीराम कटरा, मनौरी सहित सभी प्रमुख बाजारों में चल रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
परिवहन समस्या के कारण उर्वरक का संकट हुआ है। पर्याप्त मात्रा में उर्वरक का रैक लगा है। जल्द ही साधन सहकारी समितियों को उर्वरक उपलब्ध कराते हुए समस्या का समाधान करा दिया जाएगा।
अजीत कुमार सिंह, एआर कोऑपरेटिव
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-ऐन मौके पर सहकारी समितियों से गायब हुई उर्वरक निजी -दुकानदारों से उर्वरक खरीदने को मजबूर किसान
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। रबी की खेती शुरू होते ही जिले की साधन सहकारी समितियों में उर्वरक का संकट बना है। डीएपी के बाद अब यूरिया की किल्लत खड़ी हो गई है। समितियों में यूरिया न होने से किसान महंगे दामों पर निजी दुकानदारों से खाद खरीदने को मजबूर हैं।
रबी की बुवाई नवंबर माह के पहले सप्ताह से ही शुरू हो जाती है। 15 नवंबर के बाद से रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई जोर पकड़ लेती है। गेहूं की बुवाई करने वाले किसानों को डीएपी की आपूर्ति जिले की 62 साधन सहकारी समितियों से होती है। इस साल बुवाई शुरू होने के बाद किसानों को पहले डीएपी के संकट से जूझना पड़ा। किसानों ने किसी तरह गेहूं की बुवाई कर ली तो अब उन्हें पहली सिंचाई के बाद यूरिया के संकट से जूझना पड़ रहा है। 62 समितियों में लगभग 40 से यूरिया गायब है। समितियों में यूरिया न मिलने से किसान खुले बाजार में दुकानदारों से उर्वरक खरीदकर फसलों में डालने के लिए मजबूर हैं। बानगी के तौर में साधन सहकारी समिति म्योहर, संचवारा, बसुहार आदि को लिया जा सकता है। यहां पर पखवारे भर से यूरिया गायब है। जिले में यूरिया के संकट से जूझ रहे किसानों का हाल बेहाल है। विभागीय सूत्रों की मानें तो परिवहन समस्या के चलते समितियों में यूरिया नहीं पहुंच पा रही है।
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20 से 30 रुपए प्रति बोरी अधिक ले रहे निजी दुकानदार
साधन सहकारी समितियों में यूरिया खत्म होने के बाद निजी दुकानदारों की बिक्री बढ़ गई है। उर्वरक के निजी दुकानदारों को समितियों में यूरिया संकट का लाभ उठाने में जुट गए हैं। म्योहर निवासी किसान श्रीराम सिंह की मानें तो निजी दुकानों में यूरिया साढ़े तीन सौ रुपए बोरी दी जा रही है जबकि यही यूरिया 320 रुपए प्रति बोरी अभी तक बेची जा रही थी।
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कृषि विभाग की मिली भगत से हो रहा खेल
साधन सहकारी समितियों में यूरिया खत्म होने के बाद निजी दुकानदार यूरिया की प्रति बोरी में किसानों से 20 से 30 रुपए अधिक मुनाफ कमा रहे हैं जबकि किसी भी उर्वरक की बिक्री संबंधित दुकानदारों को निर्धारित मूल्य में करने का लाइसेंस दिया जाता है। निजी दुकानदारों व कृषि विभाग के अफसरों के बीच चल रही साठगांठ के चलते यह खेल जिले के सरायअकिल, म्योहर, बेनीराम कटरा, मनौरी सहित सभी प्रमुख बाजारों में चल रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
परिवहन समस्या के कारण उर्वरक का संकट हुआ है। पर्याप्त मात्रा में उर्वरक का रैक लगा है। जल्द ही साधन सहकारी समितियों को उर्वरक उपलब्ध कराते हुए समस्या का समाधान करा दिया जाएगा।
अजीत कुमार सिंह, एआर कोऑपरेटिव